126 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में सीबीआई ने तलब किया यीडा बोर्ड के सदस्यों का ब्योरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा में 126 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। जांच एजेंसी ने यमुना प्राधिकरण बोर्ड के सभी सदस्यों का ब्योरा तलब किया है। जमीन खरीदने के लिए बनी मूल फाइल और मिनट्स भी मांगे हैं। बोर्ड के सदस्य होने के नाते शासन स्तर तक के अधिकारी लपेटे में आ सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि यमुना प्राधिकरण के पास सीबीआई का पत्र आया है, जिसमें सीबीआई ने मथुरा में मास्टर प्लान से बाहर जमीन खरीदने के लिए हुई बोर्ड बैठक के मिनट्स उपलब्ध कराने को कहा है। उस समय बोर्ड बैठक में कौन-कौन से अधिकारी शामिल रहे हैं, उनका भी ब्योरा मांगा गया है।
जमीन खरीदने के लिए बनी मूल फाइल भी शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है। यमुना प्राधिकरण में बोर्ड के अध्यक्ष प्राधिकरण के चेयरमैन व यमुना प्राधिकरण के सीईओ सचिव होते हैं। ग्रेटर नोएडा न नोएडा प्राधिकरण के सीईओ, गौतमबुद्ध नगर, आगरा के डीएम भी इसके सदस्य होते हैं।
मथुरा, खुर्जा व वृंदावन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, प्रमुख सचिव अवास, वित्त, औद्योगिक विकास, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग के सचिव व मुख्य वास्तुविद नियोजक के प्रतिनिधि भी बोर्ड के सदस्य होते हैं। सीबीआई ने 2013-14 में हुई इस बोर्ड बैठक में कौन-कौन शामिल हुए थे, उनका ब्योरा मांगा है।
मथुरा में जमीन खरीदने के लिए बनी मूल फाइल भी मांगी है, ताकि पता चल सके कि मास्टर प्लान से बाहर जमीन खरीदने की मूल फाइल पर किस-किसके हस्ताक्षर हैं। जानकार मानते हैं कि सीबीआई जांच से उस समय की बोर्ड बैठक में शामिल इन तमाम अधिकारियों की मुश्किल बढ़ सकती है। हालांकि, पुलिस जांच कर अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार जेल भेज चुकी है, जिसमें यीडा के सीईओ रहे पीसी गुप्ता व एसीईओ सतीश कुमार भी शामिल हैं।
यीडा ने बनाया नोडल अफसर
सीबीआई की जांच शुरू होने के साथ ही यीडा ने भी कोआर्डिनेशन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि यीडा में तैनात ओएसडी नवनीत सहगल को नोडल अफसर बनाया गया है। सीबीआई से होने वाले पत्राचार के मुताबिक सभी कागजात उपलब्ध कराएंगे।
जमीन खरीदने की कमेटी में प्लेसमेंट कर्मी
जिस समय ये जमीन खरीदने का निर्णय हुआ और कमेटी का गठन किया गया। उस समय के सभी विभागाध्यक्षों को बतौर सदस्य शामिल किया जाना था, लेकिन कुछ विभागाध्यक्षों ने खुद की जगह अपने विभाग में प्लेसमेंट पर तैनात कर्मियों को कमेटी में शामिल कर दिए।
जानकार मानते हैं कि इसके पीछे मकसद यही था कि भविष्य में अगर कोई जांच हो तो व न फंसें, क्योंकि उन्हें अनुमान था कि जिस तरह से मास्टर प्लान से बाहर जमीन खरीदी जा रही है ऐसे में इसकी जांच हो सकती है।
3180 करोड़ रुपये की खरीदी गई थी जमीन
सीबीआई ने मथुरा जमीन घोटाले की जांच शुरू की है, जिसकी कीमत करीब 126 करोड़ रुपये है, जबकि उस समय करीब 3180 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी गई थी। 2014 में मथुरा के सात गांवों मादौर, सेउपट्टी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुरा बांगर व नौहझील बांगर में 57.15 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई, जिस पर 126 करोड़ रुपये खर्च हुए।
जहांगीरपुर में 765 केवी सबस्टेशन बनाने के लिए जमीन खरीदी गई। 2009 से 2013 के बीच यमुना प्राधिकरण के 15 गांवों में करीब 700 एकड़ जमीन खरीदी गई। इनमें बैराना, अलीपुर, भट्टा, अमरपुर पलाका, जहांगीरपुर, दयानतपुर, करौली बांगर, मेहंदीपुर बांगर, अनवरगढ़ बांगर, सुल्तानपुर, तकीपुर बांगर, मोहम्मदाबाद खेड़ा, भाईपुर ब्रह्मनान, नेवला गोपाल गढ़ और लतीफपुर बांगर शामिल हैं।
इन गांवों की जमीन पर कोई प्लान नहीं बना था, फिर भी प्राधिकरण ने खरीद ली। किसानों को इसका मुआवजा बांट दिया गया। हाथरस के मुढ़ावली गांव के किसानों से करीब 42 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। जमीन देने वाले किसानों को विकसित एरिया में सात फीसदी भूखंड देना था। इसकी आड़ लेकर 2013 में हाथरस में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। यह जमीन भी मास्टर प्लान से बाहर की है। सीबीआई इन सभी प्रकरणों की जांच कर सकती है।