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सीबीआई ने उत्तर प्रदेश में अवैध माइनिंग मामले को लेकर 21 जगहों पर छापेमारी की

Wed, 12 Jun 2019 07:03 PM IST
Vikas Kumar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 12 Jun 2019 07:03 PM IST
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CBI raid 21 place in Uttar Pradesh on illegal mining case
सीबीआई (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में अवैध माइनिंग करने वालों पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। सीबीआई ने गुरुवार को इस मामले में 21 जगहों पर छापे मारे हैं। इनमें दिल्ली, गाजियाबाद, अमेठी, लखनऊ और हमीरपुर के आसपास के इलाके शामिल हैं। जांच एजेंसी ने छापों के दौरान केस से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। 

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गत जनवरी में भी इस मामले को लेकर सीबीआई ने 12 जगहों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जांच एजेंसी ने यह खुलासा किया था कि हमीरपुर में शासन-प्रशासन के नुमाइंदों ने अपने ड्राइवरों तक को अवैध माइनिंग में वसूली करने की छूट दे रखी थी। यहां तक कि वाहन मालिकों और लीज होल्डरों से भी वसूली की गई। उस वक्त जांच एजेंसी ने इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी पूछताछ करने की बात कही थी। हालांकि अभी तक यादव से पूछताछ नहीं हुई है। हो सकता है अब उन्हें जांच में शामिल होने के लिए सम्मन भेजा जाए।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, 2012-2016 के बीच हमीरपुर माइनिंग साइट पर सभी तरह के नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। नियमों के खिलाफ माइनिंग का टेंडर जारी कर दिया गया। एनजीटी ने उक्त अवधि के दौरान कुछ समय के लिए यहां किसी भी तरह की माइनिंग पर रोक लगा दी थी। हैरान करने वाली बात ये रही कि तत्कालीन जिला मैजिस्ट, बी.चंद्रकला (2008 बैच की आईएएस) और उस वक्त माइनिंग महकमे की मंत्री रही गायत्री प्रजापति व दूसरे ओहदे पर बैठे लोगों ने एनजीटी के आदेशों को खूंटी पर टांग दिया। रोक की अवधि के दौरान अवैध तरीके से माइनिंग का टेंडर जारी किया गया। न केवल नए टेंडर, बल्कि पुराने टेंडर का भी नवीनीकरण कर दिया गया। बड़े ओहदे पर बैठे लोगों के ड्राइवरों को लीज होल्डरों से फिरौती मांगने की छूट दे दी गई। जो नहीं देता, उनकी गाड़ियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। ड्राइवरों ने जमकर उत्पात मचाया। रात के समय ये ड्राइवर अपने लोगों को किसी भी माइनिंग साइट पर भेज देते थे। वहां वे डंपर और ट्रैक्टर-ट्राली लगाकर उससे भरने लगते। नियमानुसार, यह हक केवल उसी का होता है, जिसने साइट को लीज पर लिया है। यहां सब कुछ उल्टा था। ड्राइवरों के सामने कोई बोल नहीं सकता था।
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जांच एजेंसी का कहना है कि चार साल के दौरान हमीरपुर माइनिंग क्षेत्र में जमकर लूट की गई। सरकारी और प्राइवेट वाहन चलाने वाले ड्राइवरों को जब इतनी छूट मिली तो उन्होंने दिन-रात लग कर हमीरपुर की माइनिंग साइट से लूट और फिरौती के जरिए करोड़ों रुपये कमा लिए। सीबीआई ने इस मामले में आईपीसी की धारा 120बी, 379, 384, 420 और 511 के तहत केस दर्ज किया था। पांच जनवरी को हमीरपुर, जालौन, नोएडा, कानपुर और लखनऊ में छापे मारे थे। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सोना और नकदी बरामद की गई।


जिला मजिस्ट्रेट ने बिना ई-टेंडरिंग किए ही साइट अलॉट कर दी थी
सीबीआई के मुताबिक, सरकारी नियमानुसार, माइनिंग का टेंडर केवल ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत अलॉट किया जाना था। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस नियम की कोई परवाह नहीं की। मैनुअली तरीके से प्रक्रिया अपनाकर माइनिंग का टेंडर दे दिया गया। माइनिंग क्लर्क राम आसरे प्रजापति के हमीरपुर स्थित आवास पर भी सीबीआई रेड हुई है। इनके पास से कई ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिससे कई बड़े लोगों पर आंच आ सकती है। इसी विभाग से रिटायर्ड क्लर्क राम अवतार सिंह के जालोन स्थित मकान पर छापा पड़ा है। जांच एजेंसी का कहना है कि ये क्लर्क 2016 में रिटायर हुए थे। ये पांच वर्ष तक सस्पेंड भी रहे हैं। इनके यहां से सीबीआई ने दो करोड़ रुपये नकद और दो किलो सोना बरामद किया है। बता दें कि 2012 से लेकर 2016 तक माइनिंग विभाग दो लोगों के पास रहा है। एक गायत्री प्रजापति और दूसरे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। गायत्री के मंत्री पद से हटने के बाद माइनिंग मंत्रालय करीब एक-डेढ़ साल तक सीएम के पास रहा था।

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