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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Case regarding the sale of non-dairy products as paneer reaches the High Court.

Delhi NCR News: पनीर के नाम पर गैर डेयरी उत्पादों की बिक्री का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 07:09 PM IST
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एफएसएसएआई, केंद्र और दिल्ली सरकार से छह सप्ताह में जवाब तलब, जांच अभियान की मांग पर अंतरिम आदेश नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पनीर के नाम पर बेचे जा रहे डेयरी एनालॉग और गैर-डेयरी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार, एफएसएसएआई और खाद्य सुरक्षा आयुक्त से जवाब तलब किया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को संबंधित अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए ऐसे उत्पादों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए अंतरिम निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इस संबंध में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
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लॉ स्टूडेंट रिधिमा सिंह और अधिवक्ता अवलोकितेश्वर पद्मपाणि सिद्धार्थ की ओर से दायर याचिका में दिल्ली सरकार और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को विनिर्माण इकाइयों, थोक बाजारों, वितरकों, खुदरा दुकानों तथा खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों में नियमित निरीक्षण, नमूने लेने और उत्पादों की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
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याचिका के मुताबिक, पनीर टिक्का, कड़ाही पनीर और पनीर बटर मसाला जैसे व्यंजन ऑर्डर करते समय उपभोक्ता आमतौर पर असली डेयरी पनीर की अपेक्षा करते हैं। लेकिन रेस्तरां और क्लाउड किचन में नॉन-डेयरी विकल्प इस्तेमाल किए जाने पर उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिल पाती।

याचिकाकर्ताओं ने कहा-पर्याप्त जानकारी दिए बिना पनीर के रूप में बेचने या परोसने पर कार्रवाई हो
याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य वैध प्लांट-बेस्ड या डेयरी एनालॉग ( एक सस्ता विकल्प जिसमें दूध की जगह दूसरे पदार्थ इस्तेमाल होते हैं) उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगवाना नहीं है। वे चाहते हैं कि ऐसे उत्पादों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना पनीर के रूप में बेचने या परोसने पर कार्रवाई हो। उन्होंने महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत भी इस तरह का प्रवर्तन संभव है।
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