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लक्खी हत्याकांड: 25 साल बाद भी नहीं दाखिल हुई चार्जशीट, कोर्ट ने लिया एक्शन; तीन पुलिस वालों के खिलाफ केस दर्ज

Wed, 21 May 2025 06:07 PM IST
श्याम जी. संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर
संवाद न्यूज एजेंसी, बुलंदशहर Published by: श्याम जी. Updated Wed, 21 May 2025 06:07 PM IST
सार

बुलंदशहर में 1999 के लक्खी सिंह हत्याकांड में 25 साल बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। न्यायालय ने सख्त एक्शन लिया। इसके बाद जांच में तीन पुलिसकर्मी दोषी पाए गए, जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

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Case filed against three policemen for not filing chargesheet in Bulandshahr murder case
crime demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुलंदशहर नगर कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 1999 में वृद्ध लक्खी सिंह की हत्या के मामले में 25 साल बाद भी कोर्ट में न चार्जशीट दाखिल हुई और न ही केस डायरी पहुंची। न्यायालय ने सख्त एक्शन लिया तो पुलिस हरकत में आई और एसएसपी के निर्देश पर सीओ मधुप ने जांच की तो तत्कालीन तीन पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं, जिनमें से दो उपनिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और एक उपनिरीक्षक के पद पर अरनिया में तैनात हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद तीनों संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
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नगर कोतवाली में एएसपी नगर के कार्यालय में तैनात हेड कांस्टेबल हरेंद्र सिंह ने तहरीर देकर बताया कि वर्ष 1999 में नगर कोतवाली में मुकदमा अपराध संख्या 363/1999 के तहत धारा 302 आईपीसी बनाम कैलाश पुत्र नेपाल निवासी लोधी वाली गली, देवीपुरा द्वितीय थाना कोतवाली नगर के तहत दर्ज कराया गया था। 
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बार-बार पत्राचार किया गया
पुलिस ने विवेचना के बाद 29 मार्च 2000 को आरोप पत्र संख्या 102/2000 सीओ पेशी कार्यालय में प्रेषित कर दिया, लेकिन अभियोग की केस डायरी न्यायालय में दाखिल न होने के कारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा बार-बार पत्राचार किया गया। सीओ कार्यालय और न्यायालय में उक्त अभियोग की केस डायरी की जानकारी न होने के संबंध में तत्कालीन एसएसपी बुलंदशहर ने 17 जनवरी 2025 को जांच के आदेश किए, जिसकी जांच पुलिस उपाधीक्षक मधुप कुमार सिंह ने की।
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मुकदमे की दैनिकी और आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित नहीं किए
उन्होंने गत 14 मई को जांच पूरी कर एसएसपी को रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसमें सामने आया कि सेवानिवृत उपनिरीक्षक रामधन सिंह नागर निवासी गौतमबुद्धनगर, सेवानिवृत उपनिरीक्षक कृष्णवीर सिंह निवासी गाजियाबाद ने आठ अप्रैल 2000 से 9 मई 2001 तक सीओ नगर कार्यालय में हेड पेशी के पद पर काम किया था। वर्तमान में उपनिरीक्षक अशोक कुमार थाना अरनिया उस वक्त सीओ नगर पेशी कार्यालय में कांस्टेबल क्लर्क के पद पर तैनात थे, इन्होंने उक्त मुकदमे की दैनिकी और आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित नहीं किए। 

लापरवाही के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया 
एसआर पत्रावली और वर्ष 1999 का रजिस्टर सुरक्षित न रखने के संबंध में लापरवाही, उदासीनता आदि के तीनों दोषी पाए गए हैं। न्यायालय में आरोप पत्र समय से प्रेषित न होने के कारण मुकदमा उपरोक्त के आरोपी कैलाश के खिलाफ अभियोजन पक्ष के द्वारा प्रभावी पैरवी नहीं की जा सकी है। ऐसे में तीनों पुलिसकर्मियों (दो सेवानिवृत) के खिलाफ लापरवाही के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया है। संबंधित समाचार अमर उजाला ने 14 फरवरी के अंक में 25 साल बीते चार्जशीट नहीं हो सकी दाखिल... के शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। न्यायालय में भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं हासिल हो सकी थी।

ये होती है फर्द चालान
जब कोर्ट में केस डायरी व अन्य कागज पहुंचाए जाते हैं, तब अदालत से रसीद संबंधित को दी जाती है। इसे ही फर्द चालान कहा जाता है। पेरोकार उसे संबंधित सीओ कार्यालय में दाखिल करता है। यदि फर्द चालान संबंधित पेरोकार ने लिया होता तो वह सीओ कार्यालय में जमा कराया गया होगा।

 
मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद नगर कोतवाली में संबंधित के खिलाफ तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। दो पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि एक पुलिसकर्मी वर्तमान में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं। - दिनेश कुमार सिंह, एसएसपी
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