दर्दनाक हादसे में मासूम समेत तीन की मौत
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दिल्ली से धनोल्टी घूमने जा रहे दिल्ली के पर्यटकों की कार गाजियाबाद के मसूरी से करीब छह किलोमीटर दूर किमोई खाले के पास 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में पांच माह के मासूम बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई और दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। लंढौर कम्यूनिटी अस्पताल में उनकी हालत नाजुक है।
मरने वाले दोनों पुरुष महिलाओं के पति थे। सभी लोग दिल्ली में विजय वासन कालोनी के रहने वाले थे। बृहस्पतिवार दोपहर डेढ़ बजे मसूरी के पास बाटाघाट टोल चौकी के पास पर्यटकों की कार बेकाबू होकर खाई में जा गिरी। हादसे में कार के परखच्चे उड़ गए। इसमें सवार पांच माह के अर्जुन और उसके पिता रिंकू मलिक की मौके पर ही मौत हो गई।
जगबीर ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। रिंकू की पत्नी नीलम और जगबीर की पत्नी सोनिका गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। कार गिरने की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण दौड़कर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश में जुट गए। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
ड्राइविंग सीख रहे बुजुर्ग कार समेत हिंडन में गिरे
गाजियाबाद के वसुंधरा में ड्राइविंग सीख रहे अर्थला निवासी हरि सिंह(65) बृहस्पतिवार सुबह कार समेत हिंडन में जा गिरे। कार में उनके साथ चालक भी मौजूद था। उनकी चीखें सुनकर पुलिस ने क्रेन की मदद से कार और उन्हें बाहर निकाला। गनीमत रही कि नहर में पानी कम था। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
अर्थला निवासी हरि सिंह सरकारी विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे वह अपने ड्राइवर अमन के साथ कार चलाना सीख रहे थे। हरि सिंह कार चलाते हुए हिंडन बैराज के रास्ते हिंडन नहर रोड से गुजरने लगे। बैराज की पुलिया पार करने के बाद अचानक कार अनियंत्रित हो गई और हिंडन की पक्की नहर पर लगी रेलिंग तोड़ते हुए सीधे नहर में जा गिरी।
नहर में पानी कम होने के चलते कार धीरे-धीरे नहर की मिट्टी में धंसने लगी। इस दौरान हरि सिंह और अमन चिल्लाकर मदद मांगने लगे। लोगों ने चिल्लाने की आवाज सुनकर दोनों को बाहर निकाला। शोर सुनकर पास ही खड़ी पीसीआर मौके पर पहुंची और क्रेन मंगवाकर करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला गया।
हरि सिंह को पास के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। एसओ ने बताया कि बुजुर्ग और चालक दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
पानी होता तो जा सकती थी जान
गनीमत रही कि बैराज पर हिंडन का पानी रोक दिया गया है, जिससे हिंडन नदी में पानी नहीं था। पानी को बांटने के लिए बनाई गई पक्की नहर भी इस दौरान खाली थी, जिसके चलते दोनों को डूबने से पहले ही निकाल लिया गया।