यहां कार कंपनियों को होगा 300 करोड़ का नुकसान!
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नोएडा में 2000 सीसी से ज्यादा की नई डीजल कारों और एसयूवी के रजिस्ट्रेशन पर 1 जनवरी से 31 मार्च 2016 तक रोक लगने से करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान शुरुआती तीन महीने की बिक्री प्रभावित होने से होगा।
वित्तीय वर्ष 2014-15 में यहां के लोगों ने वाहनों की खरीद पर करीब 680 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इनमें से अधिकांश वाहन डीजल के थे। दरअसल, शहर में महंगी कारों का रजिस्ट्रेशन पिछले पांच वर्षों से लगातार बढ़ रहा है।
2010-11 में इससे होने वाले टैक्स राजस्व आय जहां करीब 10 करोड़ था। वहीं 2014-15 में यह बढ़कर 68 करोड़ हो गया। इसके वर्तमान वर्ष में करीब 10 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। इस आंकड़े पर गौर करें तो वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 75 करोड़ से अधिक होने की संभावना है।
बिक्री की रकम 750 करोड़ या इससे अधिक की होगी
यह कुल कीमत का 10 फीसदी टैक्स राशि है। लिहाजा लोगों की ओर से खर्च किए जाने वाली रकम या बिक्री की रकम 750 करोड़ या इससे अधिक की होगी। वर्तमान वर्ष के आंकड़े के मुताबिक जनवरी से दिसंबर 2015 तक करीब दस हजार डीजल वाहन पंजीकृत हुए हैं।
इसमें से अधिकांश गाड़ियां महंगी और 2000 सीसी से ज्यादा की हैं। इस बारे में एआरटीओ (प्रवर्तन) राजेश सिंह ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक इनमें से करीब करीब सात हजार गाड़ियां डीजल की हैं। रजिस्टर्ड होने वाली गाड़ियों में फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो, सफारी, पजेरो, बीएमडब्लूए, मर्सिडिज, एक्सयूवी सहित कई अन्य गाड़ियां हैं।
अगले वित्तीय वर्ष के अनुमान के मुताबिक अगर 10 प्रतिशत भी राजस्व का अनुपात बढ़ता है तो महंगी कारों की बिक्री के पुराने रुझान के मुताबिक वर्ष 2016 के शुरुआती माह में करीब तीन सौ करोड़ का बिजनेस प्रभावित होने की आशंका है।