कार कंपनियों का लुभावना ऑफर, जीरो डाउन पेमेंट पर बेची जा रही कार
कार कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए दे रही ऑफर
-कई कार शोरूम पर जीरो डाउन पैमेंट पर बेची जा रही कार
-कुछ कंपनी 100 रुपये के डाउन पैमेंट पर बेच रहीं वाहन
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1000 और 500 रुपये के नोट बंद होने से आम लोगों की ही नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी कंपनियों की आर्थिक व्यवस्था को तगड़ा झटका लग रहा है। एक तरह जहां बाजार से ग्राहक दूर हो रहे हैं। वहीं, वाहन कंपनियों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह के ऑफर देने शुरू कर दिए हैं।
शादियों का सीजन होने के बावजूद कार कंपनियों में से भी ग्राहक गायब हो गए हैं। आलम ये है कि कंपनियों ने ग्राहकों के लिए एक से बढ़कर एक ऑफर दे रहे हैं। कंपनियों ने नकद नोट की समस्या को भांपते हुए अब जीरो डाउन पेमेंट पर भी चारपहिया वाहनों को बेचना शुरू कर दिया है।
इनमें मारूति सुजुकी, महिंद्रा, फॉक्स वैगन और निसान समेत कई चारपहिया वाहन कंपनियों ने बाजार में इसी लुभाने ऑफरों के साथ ग्राहकों को रिझा रहे हैं। हालांकि इन्हीं लुभावने ऑफरों में कुछ छिपी शर्तें भी हैं जिनका वाहन खरीदने वालों को पालन करना होगा।
मारूति सुजुकी की ओर से एक्स शोरूम कीमत पर जीरो डाउन पेमेंट पर कारों को दिया जा रहा है। इसमें अधिकतर सीएनजी वाहन ही हैं। फॉक्स वैगन कंपनी ने भी दो कारों को जीरो डाउन पैमेंट देकर लोगों को लुभाने का प्रयास किया है। इस कंपनी ने भी एक्स शोरूम पर 100 फीसदी फाइनेंस करने का दावा किया है।
ऑनरोड 100 फीसदी फानेंसस की सुविधा
इसी तरह निसान कंपनी की ओर से भी ग्राहकों के लिए कई ऑफर दिए हैं। निसान की ओर से ऑनरोड 100 फीसदी फानेंसस की सुविधा दी है। कार का इंश्योरेंस भी फ्री और किस्तों पर ब्लाज दर भी कम होने का दावा किया है। महिंद्रा की ओर से बुलेरो समेत कई कामश्िर्यिल वाहनों को मात्र 101 रुपये की डाउन पेमेंट का ऑफर दिया है।
बाजार में 1000 और 500 के नोट बंद कर देने से नई करंसी नहीं है। इसलिए कंपनी की ओर से एक्स शोरूम कीमत पर जीरो डाउन पैमेंट यह व्यवस्था नोट बंदी को देखते हुए की गई है। इससे लोगों को वाहन लेने में आसानी होगी।-सतीश नागर, टीम मैनेजर रोहन ग्रेनो
बाजार में नकद मुद्रा का प्रचलन बंद होने के कारण बाजार से नकदी गायब हो जाती हैे, इसे रिसेसन कहा जाता है। इस दौरान रोजगार, महंगाई की समस्या आती है तो बाजार से ग्राहक गायब हो जाता है।
ऐसे में कंपनियों और प्रोडेक्ट की मांग बनाए रखने और किसी भी हालत में माल बेचने के लिए ऑफर दिए जाते हैं। पुरानी मुद्रा के एवज में जब तक नई मुद्रा बाजार में नहीं आएगी तब तक ऐसा ही चलेगा।--डॉ.नीलम पंवार अर्थशास्त्री (एमबीपीजी कॉलेज दादरी)