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दिल्ली पुलिस के भरोसे मत रहिए, ठंड बढ़ते ही खुल्ला घूम रहे गाड़ी, बैट्री के चोर
Mon, 24 Dec 2018 10:47 PM IST
राजेश सैनी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Mon, 24 Dec 2018 10:47 PM IST
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thief
दिल्ली के यू.पी से लगे इलाके को छोडि़ए, रोहिणी और पीतमपुरा में भी यही हाल है। गाड़ी की बैट्री के चोर खुल्ला घूम रहे हैं। आनंद विहार बस अड्डे से सटे मंडावली क्षेत्र में भी गाड़ी बैट्री के चोरों की पौ बारह है और पुलिस के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। मधू विहार थाने के हेडकांस्टेबल देवेन्द्र बताते हैं कि वह जांच-पड़ताल करके चोरों को पकड़ते हैं। चोर जेल में बंद हो जाता है और फिर कुछ दिन बाद बाहर आता है। चोरी का सारा खेल बदस्तूर चलता रहता है।
एक बैट्री विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसकी दुकान से 500 मीटर के दायरे में तीन-चार कार बैट्री के बड़े चोर रहते हैं। यह धड़ल्ले से कार की बैट्री चुराते हैं। यहां तक कि महिलाओं की चेन आदि झपटने में माहिर हैं, लेकिन वह पकड़े नहीं जाते। बताते हैं सारा मामला सेटिंग का है। दो दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने शहजाद, जुबैर और गुल मोहम्मद को गिरफ्तार किया। इनके पास से 55 कार बैट्री भी बरामद हुई और पुलिस का अनुमान है कि पिछले 15 महीने में इन चोरों ने पांच हजार से अधिक बैट्री चुराई है।
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एक बैट्री विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसकी दुकान से 500 मीटर के दायरे में तीन-चार कार बैट्री के बड़े चोर रहते हैं। यह धड़ल्ले से कार की बैट्री चुराते हैं। यहां तक कि महिलाओं की चेन आदि झपटने में माहिर हैं, लेकिन वह पकड़े नहीं जाते। बताते हैं सारा मामला सेटिंग का है। दो दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने शहजाद, जुबैर और गुल मोहम्मद को गिरफ्तार किया। इनके पास से 55 कार बैट्री भी बरामद हुई और पुलिस का अनुमान है कि पिछले 15 महीने में इन चोरों ने पांच हजार से अधिक बैट्री चुराई है।
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कड़ाके की सर्दी आते ही बढ़ती है चोरी
इस बारे में छानबीन करने पर पता चला कि दिल्ली में खजूरी, लोनी, गोकुलपुरी के पास गाडिय़ों से चुराई गई बैट्री आसानी से बिक जाती है। इसे आम तौर पर चोर पांच सौ रूपये तक में बेंच देते हैं। इसके बाद आगे इसके बैट्री की स्थिति के हिसाब से 800-1500 रूपये तक आराम से मिल जाते हैं। बताते हैं कि दिल्ली में कड़ाके की ठंडी पड़ते ही कार की बैट्री चोरी का धंधा तेज हो जाता है। एक थाने में तैनात पुलिस कांस्टेबल ने बताया कि ठंड बढऩे पर देर रात में सड़कों पर यातायात कम हो जाता है। इसके अलावा कोहरा, कुहासा में सड़कों पर नजदीक की चीज भी धुंधली दिखाई देती है। चोर इसका फायदा उठा लेते हैं।
लक्ष्मी नगर के पास स्थित एक बैट्री विक्रेता की माने तो उसके पास हर तरह की कार की चोरी हुई बैट्री के ग्राहक आते हैं। चोरों ने कार निर्माता कंपनियों के हर दांव का तोड़ निकाल लिया है। यहां तक कि कार में लगने वाले गेयर लॉक को भी वह पलक झपकते ही तोड़ देते हैं। गाड़ी को बनाने के मि ी अबरार का कहना है कि चोर के लिए ताले नहीं होते। यह तो बस शरीफों को बहकाने के साधन हैं।
इस बारे में छानबीन करने पर पता चला कि दिल्ली में खजूरी, लोनी, गोकुलपुरी के पास गाडिय़ों से चुराई गई बैट्री आसानी से बिक जाती है। इसे आम तौर पर चोर पांच सौ रूपये तक में बेंच देते हैं। इसके बाद आगे इसके बैट्री की स्थिति के हिसाब से 800-1500 रूपये तक आराम से मिल जाते हैं। बताते हैं कि दिल्ली में कड़ाके की ठंडी पड़ते ही कार की बैट्री चोरी का धंधा तेज हो जाता है। एक थाने में तैनात पुलिस कांस्टेबल ने बताया कि ठंड बढऩे पर देर रात में सड़कों पर यातायात कम हो जाता है। इसके अलावा कोहरा, कुहासा में सड़कों पर नजदीक की चीज भी धुंधली दिखाई देती है। चोर इसका फायदा उठा लेते हैं।
लक्ष्मी नगर के पास स्थित एक बैट्री विक्रेता की माने तो उसके पास हर तरह की कार की चोरी हुई बैट्री के ग्राहक आते हैं। चोरों ने कार निर्माता कंपनियों के हर दांव का तोड़ निकाल लिया है। यहां तक कि कार में लगने वाले गेयर लॉक को भी वह पलक झपकते ही तोड़ देते हैं। गाड़ी को बनाने के मि ी अबरार का कहना है कि चोर के लिए ताले नहीं होते। यह तो बस शरीफों को बहकाने के साधन हैं।
चोरी का सीधा फंडा
करीब दो साल पहले कार का पहिया चुराते पकडऩे वाले गार्ड प्रमोद ने चोर की कहानी बताई। दिल्ली के क्नॉट प्लेस में किसी दुकान पर नौकरी कर रहे प्रमोद ने इसके बाद गार्ड का काम छोड़ दिया, क्योंकि चोरों के हमले में वह घायल भी हो गए थे। प्रमोद इसको लेकर किसी विवाद में नहीं पडऩा चाहते। इसलिए वह अपना नाम बताने से कतराते रहे। प्रमोद का कहना है कि चोर अकेले नहीं होता। दो या तीन लोग होते हैं। इसमें एक चोर चोरी करने में लगा होता है, जबकि दूसरा और तीसरा आदमी निगरानी और लोगों पर नजर रखने में। प्रमोद का कहना है कि जो चोरी कर रहा होता है, वह मि ी की तरह बड़ी फुर्ती से अपने काम को अंजाम देते हैं।
करीब दो साल पहले कार का पहिया चुराते पकडऩे वाले गार्ड प्रमोद ने चोर की कहानी बताई। दिल्ली के क्नॉट प्लेस में किसी दुकान पर नौकरी कर रहे प्रमोद ने इसके बाद गार्ड का काम छोड़ दिया, क्योंकि चोरों के हमले में वह घायल भी हो गए थे। प्रमोद इसको लेकर किसी विवाद में नहीं पडऩा चाहते। इसलिए वह अपना नाम बताने से कतराते रहे। प्रमोद का कहना है कि चोर अकेले नहीं होता। दो या तीन लोग होते हैं। इसमें एक चोर चोरी करने में लगा होता है, जबकि दूसरा और तीसरा आदमी निगरानी और लोगों पर नजर रखने में। प्रमोद का कहना है कि जो चोरी कर रहा होता है, वह मि ी की तरह बड़ी फुर्ती से अपने काम को अंजाम देते हैं।
ज्यादातर गंजेड़ी, स्मैकिए देते हैं अंजाम
कृष्णपाल की तीन साल में तीसरी बैट्री चोरी हुई है। उनके पास एक स्विफ्ट डिजायर, एक मारूति इरटिगा और और एक हुंडई एसेंट है। वह टैक्सी ड्राइवर हैं और अन्य ड्राइवरों की मदद से गाड़ी चलाते-चलवाते हैं। कृष्णपाल का कहना है कि ज्यादातर इस काम को गंजेड़ी और स्मैकिए अंजाम देते हैं। यह आस-पास के पार्क में देर रात तक शराब, गांजा, स्मैक आदि पीते हैं और इसके बाद अपनी अगली खुराक के लिए चोरी को अंजाम देते हैं। कृष्णपाल के अनुसार चोरी होने के बाद आपके पास दो ही रास्ते हैं। पहला तो यह कि नई बैट्री ले आइए और दूसरा पुलिस में रिपोर्ट लिखवाकर भूल जाइए। इसके बाद भी यह तय नहीं है कि गाड़ी के बैट्री चोरों से छुट्टी मिल जाएगी।
कृष्णपाल की तीन साल में तीसरी बैट्री चोरी हुई है। उनके पास एक स्विफ्ट डिजायर, एक मारूति इरटिगा और और एक हुंडई एसेंट है। वह टैक्सी ड्राइवर हैं और अन्य ड्राइवरों की मदद से गाड़ी चलाते-चलवाते हैं। कृष्णपाल का कहना है कि ज्यादातर इस काम को गंजेड़ी और स्मैकिए अंजाम देते हैं। यह आस-पास के पार्क में देर रात तक शराब, गांजा, स्मैक आदि पीते हैं और इसके बाद अपनी अगली खुराक के लिए चोरी को अंजाम देते हैं। कृष्णपाल के अनुसार चोरी होने के बाद आपके पास दो ही रास्ते हैं। पहला तो यह कि नई बैट्री ले आइए और दूसरा पुलिस में रिपोर्ट लिखवाकर भूल जाइए। इसके बाद भी यह तय नहीं है कि गाड़ी के बैट्री चोरों से छुट्टी मिल जाएगी।