पत्नी और बेटियों के सहारे हैं ये नेता
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जंग का मैदान हो या चुनावी रणक्षेत्र, जब अपनों का साथ मिल जाए तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं। लोकसभा चुनावों का डंका बजते ही जहां उम्मीदवारों की दिनचर्या में बदलाव आ गया है, वहीं उनके मां-पिता, पत्नी, बच्चे भाई और बहनों ने अपने-अपने स्तर पर चुनाव की जिम्मेदारी ले ली है।
दरअसल, दिल्ली में नामांकन के बाद से सक्रिय हुए प्रत्याशियों के परिजनों के सामने समय की डेडलाइन भी है, जिसके भीतर वे बेहतर प्रचार कर अपने संबंधी के सिर जीत का सेहरा बांधना चाहते हैं।
इसी बीच दिल्ली के एक उम्मीदवार के प्रचार की कमान प्रचार की कमान क्रिस्टीना, डेनियल, जोई और तिया ने संभाल ली है। वहीं एक उम्मीदवार की अमेरिका में पढ़ रही बेटी चुनाव प्रचार के लिए वापस लौट आई है।आइए जानते हैं ऐसे परिवारों के बारे में जिन्होंने संभाल ली है प्रचार की कमान।
क्रिस्टीना, डेनियल सोशल मीडिया पर करेंगी प्रचार
नई दिल्ली संसदीय सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आशीष खेतान के घर में घुसते ही बॉर्बी डॉल जैसी दिखने वाली तीन बेटियां- डेनियल, तिया और जोई खेलती-कूदती दिखाई दीं। फिर सामने आती हैं आशीष की पत्नी क्रिस्टीना।
पेशे से पत्रकार रहीं क्रिस्टीना हर मुद्दे पर खुलकर बात करती हैं। क्रिस्टीना कहती हैं कि उन्होंने अभी डोर-टू-डोर अभियान नहीं किया है लेकिन अक्सर मुद्दों पर चर्चा करती हैं।
उन्होंने नर्सरी एडमिशन, प्ले स्कूलों का जेब काटने वाला धंधा, महिलाओं की सुरक्षा और यमुना की दुर्दशा को सुधारने की शपथ पहले ही आशीष से ले ली है। उन्होंने बताया कि दो दिन बाद ही आशीष के बड़े भाई मनीष और मां बाराबंकी से आ रहे हैं और अब वे संसदीय क्षेत्र में जाकर लोगों से मिलेंगी।
विदेश से आ गई बेटी, पत्नी भी मुस्तैदी से जुटी
कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन की दूसरे नंबर की बेटी आहना अमेरिका में पढ़ती हैं, लेकिन चुनाव में पिता का सहयोग करने के लिए भारत आ गई हैं।
वहीं बड़ी बेटी आयुषी पूरे जोर-शोर से चुनाव प्रचार में लगी हैं। माकन की पत्नी राधिका सुबह से प्रचार करने के लिए पैदल निकल जाती है व रात को ही घर लौटती हैं।
वहीं उत्तर पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी जेपी अग्रवाल के चुनाव प्रचार में पत्नी सरिता पूरा साथ दे रही हैं। वह जहांगीरपुर इलाके में पहुंचीं।
लोगों से बातचीत के दौरान सरिता के मुंह पर बार-बार यही शब्द थे ‘एक और मौका दीजिए, इससे भी ज्यादा विकास होगा।’ उन्होंने कहा कि जो समस्याएं किसी कारणवश रह गई हैं, अब उन्हें निपटाया जाएगा।
नूपुर ने घर छोड़ चुनाव क्षेत्र में बसाया डेरा
चांदनी चौक से भाजपा उम्मीदवार हर्षवर्धन की पत्नी नूपुर सोमवार सुबह दस बजे घर से निकलीं। उन्होंने शालीमार बाग में तीन वार्डों में महिलाओं की बैठक ली। अभी एक वार्ड के निकली हैं।
इन्हें चुनाव क्षेत्र में पहुंचने में महज कुछ मिनटों का ही वक्त लगता है, क्योंकि नूपुर ने कृष्ष्णानगर का अपना घर चुनाव तक छोड़ दिया है। वे पीतमपुरा में रह रही हैं, ताकि अपने पति के क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता सकें।
नूपुर की योजना पहले से तय है, अब इनका अगला पड़ाव वजीरपुर है। वे बताती हैं कि सुबह नौ से दस बजे घर से निकल जाती हैं और रात को आठ से नौ बजे के बीच में घर में घुसती हैं।
सादगी और जुनून की मिसाल हैं ऊषा
राष्ट्रपिता के पोते और पूर्वी दिल्ली से ‘आप’ के उम्मीदवार राजमोहन गांधी की पत्नी ऊषा गांधी का जुनून देखने लायक है। सादा लिबास में होठों पर हल्की मुस्कुराहट और आवाज में खनक।
उम्र को पीछे छोड़कर पति के साथ कदम से कदम मिलकार चलतीं ऊषा जागरूकता की मिसाल हैं। राजमोहन गांधी जैसे ही कहते हैं कि ये अपने पति के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखती हैं तो वे मुस्कुराते हुए इनकार करती हैं।
फिर खुद ही कहती हैं ‘मैं इनके स्वास्थ्य का ख्याल रखती हूं, साथ ही इनके साथ चुनाव प्रचार में साथ रहती हूं। मैं खासतौर पर महिलाओं से मिलती हूं। सुबह से रात तक घूमना होता है। दिनचर्या जटिल हो गई है लेकिन लोगों से मिलकर बहुत खुशी भी होती है।’
स्वाती को मिली है कई विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मदारी
भाजपा प्रत्याशी परवेश वर्मा के लिए चुनाव प्रचार में जुटीं उनकी पत्नी स्वाती बताती हैं कि परवेश की पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट की दस विधानसभाओं के लिए परिवार के अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दे दी गई है।
हमने तीन ग्रुप बनाए हैं। पहले ग्रुप में परवेश की मां और छोटी बहन मनीषा हैं। ये नजफगढ़, मटियाला आदि संभाल रही हैं। दूसरे ग्रुप में परवेश की बड़ी बहन रचना हैं, जिन पर राजौरी गार्डन, मादीपुर आदि जगहों की जिम्मेदारी है।
तीसरा ग्रुप मेरा है, जिसमें महिलाओं को साथ लेकर मैं प्रचार करती हूं। हम लोग सुबह नौ बजे ही कार्यालय पहुंच जाते हैं और फिर कब रात हो जाती है, पता ही नहीं चलता।
सावेरी संभालेंगी सोशल मीडिया पर प्रचार कमान
उदित राज उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी हैं। उदित का साथ उनके बच्चे दे रहे हैं। इंजीनियर बेटे अभिराज ने प्रचार की कमान संभाल ली है, वहीं बेटी सावेरी को 26 मार्च का इंतजार है।
जब बोर्ड परीक्षाओं से उन्हें कुछ राहत मिलेगी। इसके बाद वह चुनाव प्रचार में पापा के साथ कदम से कदम मिलाएंगी। सावेरी ने बताया कि भाई क्षेत्र में जाकर लोगों से मिल रहे हैं। वह सोशल मीडिया संभालेंगी।
अभी परीक्षाओं के दौरान भी वे दोस्तों से इस संबंध में चर्चा करती रहती हैं। उदित की सरकारी कर्मचारी पत्नी सीमा को प्रचार में शामिल न होने का थोड़ा अफसोस है, लेकिन मुस्कुराते हुए कहती हैं कि वे घर और बच्चों को संभाल रही हैं, यह भी तो जरूरी है।