दोष सिद्ध होने पर मिल सकता है ‘मृत्युदंड’, डीपीएस में मासूम से दुष्कर्म केस में बढ़ाई धारा
डीपीएस में मासूम बच्ची से दुष्कर्म मामले में पुलिस ने 376 ए और बी धारा बढ़ा दी है। 12 साल से कम आयु की बच्ची से दुष्कर्म के केस में इस धारा को लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत अदालत दोष सिद्ध होने पर कम से कम 12 वर्ष कठोर कारावास से लेकर फांसी तक की सजा भी सुना सकती है। वहीं, डीपीएस प्रबंधन पर भी कानून का शिकंजा कड़ा होता जा रहा है।
12 जुलाई को डीपीएस स्कूल में साढ़े तीन वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म की वारदात सामने आई थी। दिल्ली में लीगल मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। आरोप था कि स्कूल में लाइफ गार्ड चंडीदास ने स्वीमिंग पूल में तैराकी सिखाने के दौरान बच्ची से दरिंदगी की थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं, इस मामले में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर हुई थी। जिसको लेकर अभिभावकों का आक्रोश फूटा था।
जिलाधिकारी ने समिति का गठन कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। वहीं, पुलिस जांच में भी प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही है। जांच अधिकारी बोबेश धीमान ने बताया कि इस केस में 376 ए और बी की धारा भी बढ़ा दी गई है। चार्जशीट दाखिल करने के लिए जांच पूरी की जा रही है।
12 वर्ष कठोर कारावास से लेकर फांसी तक की सजा
अधिवक्ता मुकेश सिसौदिया ने बताया कि नए कानून के अनुसार 376 ए और बी धारा 12 साल से कम आयु की बच्ची से दुष्कर्म के केस में लगाई जाती है। इसके अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर कम से कम 12 वर्ष कठोर कारावास से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है।
दूसरे स्कूल में लिया पीड़िता और बहन ने प्रवेश
वारदात के बाद से ही पीड़िता व उसकी बड़ी बहन ने डीपीएस में जाना बंद कर दिया था। अब जानकारी मिली है कि दोनों बच्चियों ने शहर के एक अन्य स्कूल में प्रवेश ले लिया है। दोनों बच्चियों ने अब स्कूल जाना शुरू कर दिया है।