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अमर उजाला घराना और परंपरा: तबला-तरंग, जलतरंग के साथ ड्रम की जुगलबंदी
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:22 PM IST
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नई दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में लिजेंड्स ऑफ इंडिया एवं पं.शंकर घोष तबला फाउंडेशन द्वारा अमर उजाला घराना व परंपरा अंतर्गत आयोजित प्रथम शंकर घोष मेमोरियल कंसर्ट के दौरान प्रस्तुति देते विक्रम घोष।
- फोटो : अमर उजाला
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तबले की थाप, तबला तरंग और उसके साथ ड्रम की जुगलबंदी। भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला घराना और परंपरा, पंडित शंकर घोष तबला फाउंडेशन व लीजेंड्स ऑफ इंडिया संस्था के तत्वावधान में प्रसिद्ध तबलावादक स्वर्गीय पं. शंकर घोष की याद में आयोजित कार्यक्रम में ऐसी ही जुगलबंदी देखने को मिली। पं. शंकर घोष की याद में आयोजित पहले मेमोरियल कॉन्सर्ट में वाद्य यंत्रों व संगीत की धुनों ने कमानी सभागार को गुंजायमान कर दिया।
पं. शंकर घोष के बेटे विक्रम घोष की तबले पर थिरकती अंगुलियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी पहुंचे।
सर्वप्रथम पं. शंकर की घोष की पत्नी संयुक्ता घोष, पं. राजन मिश्रा, पं. रविशंकर की पत्नी सुकन्या शंकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद वृतचित्र के माध्यम से महान तबला वादक पं. शंकर घोष व्यक्तित्व और कृतित्व को दर्शाया गया। तबला वादन के साथ म्यूजिक ऑफ द ड्रम के मनमोहक कार्यक्रम से इस संगीतमय सफर की शुरुआत हुई। जिसमें यंत्रों के अद्भुत मेल को दिखाया गया। इस प्रस्तुति में तबला, तबला तरंग, जलतरंग, तबला व ढोलक के माध्यम से राग चंद्रकोष की प्रस्तुति हुई।
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इसी में दूसरी प्रस्तुति राग कलावती की हुई। मंत्रमुग्ध करने वाली इस प्रस्तुति ने इस शाम को यादगार बना दिया। इसके बाद मशहूर तबला वादक विक्रम घोष ने अपने पिता पं. शंकर घोष को श्रद्धांजलि देते हुए तबले पर नसरुख ताल की थाप छेड़ी। जिसमें हारमोनियम पर उनका साथ सनातन गोस्वामी ने दिया। अंतिम प्रस्तुति के रूप में उस्ताद तन्मय बोस के साथ उस्ताद राशिद खान ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देकर सभी को भाव विभोर कर दिया। यहां पर उस्ताद राशिद के स्वर व पंडित तन्मय के तबले की जुगलबंदी ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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पं. शंकर घोष के बेटे विक्रम घोष की तबले पर थिरकती अंगुलियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी पहुंचे।
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सर्वप्रथम पं. शंकर की घोष की पत्नी संयुक्ता घोष, पं. राजन मिश्रा, पं. रविशंकर की पत्नी सुकन्या शंकर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद वृतचित्र के माध्यम से महान तबला वादक पं. शंकर घोष व्यक्तित्व और कृतित्व को दर्शाया गया। तबला वादन के साथ म्यूजिक ऑफ द ड्रम के मनमोहक कार्यक्रम से इस संगीतमय सफर की शुरुआत हुई। जिसमें यंत्रों के अद्भुत मेल को दिखाया गया। इस प्रस्तुति में तबला, तबला तरंग, जलतरंग, तबला व ढोलक के माध्यम से राग चंद्रकोष की प्रस्तुति हुई।
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इसी में दूसरी प्रस्तुति राग कलावती की हुई। मंत्रमुग्ध करने वाली इस प्रस्तुति ने इस शाम को यादगार बना दिया। इसके बाद मशहूर तबला वादक विक्रम घोष ने अपने पिता पं. शंकर घोष को श्रद्धांजलि देते हुए तबले पर नसरुख ताल की थाप छेड़ी। जिसमें हारमोनियम पर उनका साथ सनातन गोस्वामी ने दिया। अंतिम प्रस्तुति के रूप में उस्ताद तन्मय बोस के साथ उस्ताद राशिद खान ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देकर सभी को भाव विभोर कर दिया। यहां पर उस्ताद राशिद के स्वर व पंडित तन्मय के तबले की जुगलबंदी ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने अमर उजाला को दी बधाई
भारत एक ऐसा देश है जहां सृष्टि के आरंभ से संगीत चला आ रहा है। संगीत की उत्पति नाद से हुई है। जिसे समझने व सहेजने की आवश्यकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने यह बातें इस कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि मैं साहित्य, संगीत व कला विहीन हूं और मेरा संगीत से दर्शक व श्रोता के रूप में संबंध है। कार्यक्रम की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वाद्य यंत्रों का अभी जो खेल देखा वह बेहद ही अद्भुत था। संगीत को जीवंत बनाए रखने के लिए उन्होंने संगीत के शास्त्र में शोध किए जाने की जरूरत पर बल दिया।
आयोजकों को उन्होंने संगीत के ढांचों के बारे में सोचने और संगीत ने कितना विकास हुआ इस और देखने के लिए कहा। संगीत को विदेशी बाजो की नकल से बचाए रखते हुए संगीत को ऐसे ही बनाए रखने की वकालत की। अमर उजाला परिवार को उन्होंने इस विद्या को आगे बढ़ाने का कार्य करने के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि मैं साहित्य, संगीत व कला विहीन हूं और मेरा संगीत से दर्शक व श्रोता के रूप में संबंध है। कार्यक्रम की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वाद्य यंत्रों का अभी जो खेल देखा वह बेहद ही अद्भुत था। संगीत को जीवंत बनाए रखने के लिए उन्होंने संगीत के शास्त्र में शोध किए जाने की जरूरत पर बल दिया।
आयोजकों को उन्होंने संगीत के ढांचों के बारे में सोचने और संगीत ने कितना विकास हुआ इस और देखने के लिए कहा। संगीत को विदेशी बाजो की नकल से बचाए रखते हुए संगीत को ऐसे ही बनाए रखने की वकालत की। अमर उजाला परिवार को उन्होंने इस विद्या को आगे बढ़ाने का कार्य करने के लिए बधाई दी।