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मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट ने तोड़ी प्राधिकरण की कमर, मांगी योगी सरकार से मदद

Tue, 06 Jun 2017 03:29 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो/ अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Tue, 06 Jun 2017 03:29 PM IST
सार


राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, जीबीयू और दो कॉलेजों के हस्तांतरण के लिए प्राधिकरण शीघ्र भेजेगा पत्र
मायावती के चारों ड्रीम प्रोजेक्ट थे, करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे
 अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।

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gautam budhha university and four institution will be given to up government by noida authority

विस्तार

प्राधिकरण चार बड़े प्रोजेक्ट गौतमबुद् यूनिवर्सिटी, कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज और सावित्रीबाई फूले बालिका विद्यालय को शासन के हवाले करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए शीघ्र ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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दरअसल, बसपा शासनकाल 2007-2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल इन चारों परियोजनाओं को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपने खर्च से बनवाया था। इन परियोजनाओं पर करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे।
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इनके रखरखाव का खर्च भी अब तक प्राधिकरण ही वहन कर रहा है। कुछ समय से प्राधिकरण खुद कर्ज में डूबा है और इन परियोजनाओं के खर्च उठाने में असमर्थ हो रहा है। शासन से कोई वित्तीय मदद भी नहीं मिल पा रही है।
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इसके अलावा इन्हें चलाने के लिए प्राधिकरण के पास तकनीकी दक्षता न होने के कारण रखरखाव व संचालन में भी दिक्कत हो रही है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान को मेडिकल कॉलेज बनाने की भी योजना पर काम चल रहा है।

ऐसे में प्राधिकरण इसे नहीं चला सकेगा। सीईओ देबाशीष पांडा ने बताया कि बोर्ड के समक्ष इन परियोजनाओं को शासन के हवाले करने पर चर्चा की गई, जिसमें सहमति बनी कि पत्र भेजकर शासन को ये चारों प्रोजेक्ट हस्तांतरित कर दिए जाएं।

सरकार के साथ बदलती रही मंशा
बसपा ने अपने कार्यकाल में करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च करके गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी का निर्माण कराया था। इसी के साथ भीमराव अंबेडकर मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में भी करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए थे। करीब पांच सौ करोड़ रुपये नोएडा और ग्रेनो स्थित चार इंटर कॉलेजों को बनाने में खर्च किया था।

कॉलेजों के संचालन के लिए एक समिति काम कर रही है। जैसे ही 2012 में सपा की सरकार बनी तो बसपा की परियोजनाओं पर ग्रहण लग गया। किसी तरह जीबीयू व कॉलेज चलते रहे। भीमराव अंबेडकर मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल का नाम बदलकर मेडिकल यूनिवर्सिटी कर दिया गया लेकिन उसे अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंचाया गया।


भारी भरकम खर्च वाले प्रोजेक्टों पर अब प्राधिकरण खर्च उठाने से हाथ खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि चारों प्रोजेक्ट प्रदेश सरकार के हवाले होने से लोगों को मेडिकल सुविधा व अच्छी शिक्षा मिल सकेगी। क्षेत्र के लोग भी चाहते हैं कि प्रोजेक्टों पर प्राधिकरण का ही पैसा खर्च हुआ है तो उसका लाभ भी मिलना चाहिए।

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