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Delhi: पत्नी को परजीवी कहना महिलाओं का अपमान, भरण-पोषण के आदेश को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार

Tue, 24 Sep 2024 09:01 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 24 Sep 2024 09:01 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी को परजीवी कहना महिलाओं का अपमान है। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि महिलाएं परिवार की देखभाल व बच्चों की जरूरतों के लिए नौकरी छोड़ देती हैं। 

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Calling wife a parasite is an insult to women said High Court
दिल्ली हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्नी के जीविकोपार्जन में सक्षम होने का मतलब यह नहीं है कि पति उसे भरण-पोषण देने से मुक्त है, बल्कि उसे परजीवी कहना पूरी महिला जाति का अपमान है।
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अदालत ने निचली अदालत द्वारा पत्नी को भरण-पोषण देने के निर्देश को चुनौती देने वाली पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं परिवार की देखभाल,बच्चों की जरूरतों को पूरा करने करने के लिए नौकरी तक छोड़ देती हैं।
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याचिकाकर्ता पति जिसके बारे में कहा गया था कि उसने अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया है और दूसरी महिला के साथ रह रहा है, को निचली अदालत ने अपनी पत्नी को भरण-पोषण के रूप में 30,000 रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया, साथ ही मानसिक यातना, अवसाद और भावनात्मक संकट सहित उसे हुई 'चोटों' के लिए पांच लाख रुपये देने का आदेश दिया।
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ट्रायल कोर्ट ने उसे अपनी पत्नी को मुआवज़े के तौर पर 3 लाख रुपये देने का भी निर्देश दिया था, जिसमें मुकदमेबाज़ी की लागत के तौर पर 30,000 रुपये शामिल हैं। आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दलील दी कि उसकी पत्नी एक सक्षम महिला है जो एक बुटीक में काम करती है और इसलिए उसे कानून का दुरुपयोग करके परजीवी बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।


न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका को खारिज करते हुए कहा यह तर्क कि प्रतिवादी केवल एक परजीवी है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है, न केवल प्रतिवादी बल्कि पूरी महिला जाति का अपमान है। अदालत ने आदेश में यह भी कहा कि पत्नी घरेलू हिंसा की शिकार थी।
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