CAG रिपोर्ट लीक मामला : सिसोदिया ने विजेंद्र के खिलाफ मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा
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आम आदमी पार्टी सरकार की तरफ से विज्ञापन पर किए गए खर्च को लेकर तैयार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की लीक रिपोर्ट पर शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक हुई।
सत्तापक्ष के विधायक की तरफ से उपमुख्यमंत्री से विज्ञापन खर्च को लेकर फैल रही भ्रामक स्थिति को स्पष्ट करने की मांग रखी गई।
इस पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रिपोर्ट लीक करने के लिए नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को घेरा और सदन की अवमानना के लिए कार्रवाई या विशेषाधिकार समिति को मामला सौंपने की मांग रख दी।
इससे पहले विजेंद्र गुप्ता ने उपमुख्यमंत्री के खिलाफ अवमानना का नोटिस दिया था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर नहीं किया। कैग रिपोर्ट को लेकर करीब एक घंटा तू-तू, मैं-मैं चलती रही।
किसने किया सदन से वॉकआउट?
मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपने के पहले भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता और जगदीश प्रधान ने उपमुख्यमंत्री के बयान से असंतुष्टि जाहिर करके सदन से वॉकआउट किया। इससे पूर्व विस अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष पर कई बार टिप्पणी भी की।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने उपमुख्यमंत्री का जवाब सुनने और सीएजी रिपोर्ट विस के सदन में पेश किए जाने से पूर्व लीक करने का हवाला देकर विजेंद्र गुप्ता से पूछा कि आपने सीएजी पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की है या नहीं? इस पर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मुझे पूरी बात कहने दी जाए।
इस बीच विस अध्यक्ष ने कहा कि विजेंद्र गुप्ता ने बार-बार पूछने के बाद भी हां या ना में जवाब नहीं दिया। इसलिए मामला सदन की अवमानना का बनता है। ये मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा जाता है। इस दौरान मीडिया में रिपोर्ट प्रकाशित होने पर भी चिंता जाहिर की गई।
नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग
बता दें कि विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ इससे पहले राज्यसभा को लेकर दिए गए एक बयान का मामला भी विशेषाधिकार समिति में चल रहा है। समिति के अध्यक्ष सोमनाथ भारती हैं। सत्तापक्ष गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई का इशारा पहले भी कर चुका है।
अध्यक्ष ने तमाम नियमों का हवाला देकर बताया कि सीएजी की रिपोर्ट उपराज्यपाल के पास आती है। वहां से सदन में पेश करने के लिए भेजी जाती है। इससे पहले रिपोर्ट लीक होना गंभीर मामला है।
इसे उपराज्यपाल की अवमानना भी माना जा सकता है। फिर सत्तापक्ष के विधायक राजेंद्र गौतम की तरफ से आए प्रस्ताव पर सिसोदिया ने जवाब दिया और नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 24 अगस्त की शाम 5:30 बजे बंद लिफाफे में रिपोर्ट मिली। उससे पहले नेता प्रतिपक्ष ने कैग रिपोर्ट की बात उठाई। प्रेस विज्ञप्ति जारी की। रिपोर्ट कैग के पास होती है, जो उपराज्यपाल और वित्त सचिव के पास गई।
वित्त सचिव पर सरकार को भरोसा है। अब नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि रिपोर्ट कैग से लीक हुई या फिर उपराज्यपाल से मिली। सदन का अपमान है, मामला विशेषाधिकार समिति को दिया जाए।
कैग रिपोर्ट मेरे लिए धर्म
सिसोदिया ने कहा कि कैग रिपोर्ट सरकार के पास है। आपके लिए राजनीतिक एजेंडा है, लेकिन हमारे लिए यह रिपोर्ट धर्म है। मैं विजेंद्र गुप्ता को चेतावनी देता हूं कि रिपोर्ट सदन में पेश करेंगे।
अध्यक्ष की अनुमति पर चर्चा कराएंगे, लेकिन भाग मत जाना, ये रिपोर्ट उलटी पड़ने वाली है। विज्ञापन विभाग में कोई घोटाला नहीं मिला है।
526 करोड़ रुपये के विज्ञापन घोटाले का जुमला बोलकर गुमराह करने वालों को देश से माफी मांगनी चाहिए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अमित शाह जैसे तमाम नेताओं को शर्म करते हुए चुल्लूभर पानी में डूब जाना चाहिए।
विज्ञापन पर सिर्फ 101 करोड़ ही खर्च : सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री ने विस में कहा कि हमारे लिए विज्ञापन सिर्फ प्रचार का तरीका नहीं, जनता से संवाद करने का जरिया है। हमें कम्यूनिकेशन आता है, विपक्षी दलों को नहीं आता, तो उनकी गलती है।
ये कहते हैं कि दिल्ली के बाहर विज्ञापन पर खर्च किया, जबकि झारखंड, हरियाणा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, यूपी सरकार के विज्ञापन दिल्ली के अखबारों में छप रहे हैं। तो हमने क्या गलत किया? सिर्फ 101 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जिसमें 20 करोड़ रुपये पिछले साल के हैं।
6 करोड़ सरकारी एजेंसी शब्दार्थ से बचा लिए, तो फिर खर्च 74 करोड़ ही तो किए। सिसोदिया ने कहा कि 23 साल के इतिहास में पहली बार किसी एक विभाग के प्रदर्शन का विशेष ऑडिट किया गया है।
सीएजी से स्वास्थ्य और शिक्षा का भी ऑडिट करने की मांग रखी थी। फिर विज्ञापन का तुलनात्मक अध्ययन के लिए पांच राज्यों व केंद्र सरकार के विज्ञापन खर्च का ऑडिट करने की भी मांग रखी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
मेरी सदस्यता रद्द करने की रची जा रही साजिश : गुप्ता
विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि सत्तापक्ष विपक्ष की आवाज को दबाना चाहता है। मेरी सदन की सदस्यता रद्द करने की साजिश रची जा रही है। मुझे बोलने का मौका नहीं दिया गया। प्रेस विज्ञप्ति को आधार बना रहे हैं, जबकि मीडिया में रिपोर्ट पहले से चल रही थी।
किसी को फांसी देने से पहले हां या ना में सफाई ली जाती है क्या? अवमानना का नोटिस उपमुख्यमंत्री के खिलाफ दिया था, जिसे स्वीकार करने के बजाय मेरे खिलाफ जांच सौंपी गई।