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‘कैब कंपनियां कम किराये में बेहतर सुविधा देती हैं तो कैसे रोके’
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:03 AM IST
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एप आधारित कैब कंपनियां यदि यात्रियों को कम किराये पर बेहतर सुविधा प्रदान कर रही हैं तो उन्हें कैसे रोका जा सकता है। हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यावसायिक दौड़ में उपभोक्ता किंग की भूमिका में है और वही तय करता है कि उसे क्या पसंद है क्या नहीं।
फिलहाल अदालत ने दिल्ली सरकार को रेडियो टैक्सी के लिए तय न्यूनतम प्राइस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ करने का निर्देश दिया है। दरअसल, अदालत मैजिक सेवा टैक्सी सर्विस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक आधारित ओला-उबर इत्यादि कैब कंपनियां सरकार द्वारा तय दरों संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लंघन कर रही हैं। यह कंपनियां न्यूनतम दरों से काफी कम दरों पर किराया ले रही हैं तो कभी तय दरों से अधिक।
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फिलहाल अदालत ने दिल्ली सरकार को रेडियो टैक्सी के लिए तय न्यूनतम प्राइस मुद्दे पर अपना पक्ष साफ करने का निर्देश दिया है। दरअसल, अदालत मैजिक सेवा टैक्सी सर्विस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक आधारित ओला-उबर इत्यादि कैब कंपनियां सरकार द्वारा तय दरों संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लंघन कर रही हैं। यह कंपनियां न्यूनतम दरों से काफी कम दरों पर किराया ले रही हैं तो कभी तय दरों से अधिक।
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'यात्री स्वयं तय करने में सक्षम है कि उसे किस प्रकार की सेवा चाहिए'
अदालत ने कहा कि अधिकतम दरों से ज्यादा किराया तो यात्रियों से नहीं वसूला जा सकता, लेकिन यदि कैब कंपनी कम किराया लेकर बेहतर सुविधा देती है तो कैसे रोका जा सकता है।
उपभोक्ता यानि यात्री स्वयं तय करने में सक्षम है कि उसे किस प्रकार की सेवा चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि यह कंपनियां वेबसाइट पर मिलने वाले हिट्स के हिसाब से काम कर रही हैं।
ये एप आधारित कंपनी है जो अलग सिद्धांत पर काम कर रही है। कोर्ट ने कहा कि वह सरकार का पक्ष जानने के बाद ही कोई निर्णय करेगी। दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 11 नंबवर तय कर दी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओला व उबर जैसी कंपनियां 6 रुपये किलोमीटर तक किराया वसूल रही है। इसके अलावा फ्री राइड से लेकर तमाम ऑफर्स देकर बाकी टैक्सी सर्विस और ऑटो को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
उपभोक्ता यानि यात्री स्वयं तय करने में सक्षम है कि उसे किस प्रकार की सेवा चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि यह कंपनियां वेबसाइट पर मिलने वाले हिट्स के हिसाब से काम कर रही हैं।
ये एप आधारित कंपनी है जो अलग सिद्धांत पर काम कर रही है। कोर्ट ने कहा कि वह सरकार का पक्ष जानने के बाद ही कोई निर्णय करेगी। दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 11 नंबवर तय कर दी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओला व उबर जैसी कंपनियां 6 रुपये किलोमीटर तक किराया वसूल रही है। इसके अलावा फ्री राइड से लेकर तमाम ऑफर्स देकर बाकी टैक्सी सर्विस और ऑटो को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।