पीएफआई एक धर्मनिरपेक्ष संगठन, जानबूझकर बनाया जा रहा बलि का बकरा: अनीस अहमद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ यूपी, असम सहित देश के दूसरे राज्यों में हुई हिंसा के मामले में कट्टरपंथी संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने खुद को पाक साफ बताया है। पीएफआई के राष्ट्रीय सचिव अनीस अहमद का दावा है कि पीएफआई का हिंसा से कोई लेना देना नहीं है।
संगठन को जानबूझकर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। साथ ही चेतावनी भी दी कि केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार पीएफआई पर पाबंदी नहीं लगा सकती। ऐसा होने की सूरत में उन्होंने अदालत में जाने की बात कही है।
शनिवार को नई दिल्ली के प्रेस क्लब में मीडिया से बात करते हुए अनीस अहमद ने आरोप लगाया कि सीएए को लेकर केवल भाजपा शासित राज्यों में ही हिंसा हुई है। पीएफआई पहले से आएसएस और भाजपा के निशाने पर है। इसलिए जानबूझकर उनके संगठन को निशाना बनाया जा रहा है।
हिंसा के मामले में यदि पीएफआई के खिलाफ कोई सबूत है तो उसे देश के सामने लाया जाए। पीएफआई एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष संगठन है, केंद्र या राज्य सरकार को उस पर प्रतिबंध लगाने का कोई हक नही है। यदि ऐसा किया जाता है तो उन्हें अपने देश की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।
अनीस अहमद के मुताबिक, सीएए और एनआरसी पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। इसके विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। इसमें सभी धर्म के लोग हिस्सा ले रहे हैं। सरकार पीएफए पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है कि विरोध की आड़ में सुनियोजित तरीके से सरकार के खिलाफ माहौल बनाया गया।
जहां तक सीएए का सवाल है, जिन राज्यों में भाजपा का शासन हैं वहां जबरन धारा-144 लगाकर सरकारों ने प्रदर्शनकारियों पर ज्यादती कीं। यूपी में खुद पुलिसकर्मियों ने घरों व धार्मिक स्थलों में घुसकर तोडफ़ोड़ की।
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अनीस ने आरोप लगाया कि यूपी में लड़कों के साथ यौनाचार भी किया गया। इसके बाद यूपी पुलिस ने अलग-अलग संगठन व राजनैतिक पार्टियों 750 लोगों को गिरफ्तार किया। ऐसे में कैसे पीएफआई पर हिंसा फैलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
पीएफआई के लोगों को जानबूझकर गिरफ्तार किया गया है। पीएफआई ने आईएसआई और अलकायदा से संबंध जोड़े जाने का भी खंडन किया। अनीस अहमद ने कहा कि संगठन 1993 से भारत में काम कर रहा है। पीएफआई कट्टरपंथी संगठन नही है। आरएसएस हमेशा कहता है कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना है जबकि पीएफआई ने कभी नही कहा कि भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना है।
टेरर फंडिंग के बारे में पूछने पर पीएफआई की ओर से कहा गया कि जहां तक पीएफआई के फंड की बात है तो पूरे साल संगठन के सदस्य खुद इसमेंं अपना पैसा देते हैं, इसके अलावा साल में एक बार देश के ही लोगों से फंड मांगा जाता है, जिसका पूरा हिसाब-किताब आयकर विभाग को दिया जाता है।
विदेशों से कोई फंड नहीं लिया जाता है। एसडीपीआई के बारे में अनीस अहमद ने कहा कि वह उनका राजनैतिक संगठन नहीं है, हम बस एसडीपीआई का समर्थन करते हैं। सीएए से संबंधित सामग्री प्रिंट करवाकर बटवाने और हिंसा में उसके इस्तेमाल पर भी पीएफआई ने साफ इंकार किया।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में उनका कार्यक्रम रद्द करने को लेकर अनीस ने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनसे कार्यक्रम फिलहाल न करने गुजारिश की थी। आगे उसकी तारीख रखी जा रही है। प्रेसवार्ता में पीएफए के वाइस चेयरमैन ओ.एम.ए सलाम, नॉर्थ जोन के अध्यक्ष ए.एस सलाम और दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष परवेज अहमद मौजूद रहे।