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व्यापार खुले तो रखना पड़ेगा अतिरिक्त स्टाफ, व्यापारियों की चिंता बढ़ी

Tue, 12 May 2020 07:13 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 12 May 2020 07:13 PM IST
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Business will have to be kept open, additional staff, traders worry
Chandni Chowk - फोटो : file
केंद्र और कुछ राज्यों के रुख से अनुमान लगाया जा रहा है कि लॉकडाउन 3.0 खत्म होने के बाद ग्रीन जोन में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। स्वयं केंद्र सरकार ने भी अपने कई बड़े ढांचागत प्रोजेक्ट्स पर काम आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
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इसी बीच व्यापारियों को व्यापार की नई परिस्थिति को लेकर चिंता सताने लगी है। व्यापारियों का अनुमान है कि बाजार खुलने के बाद भी दुकानों-बाजारों में बहुत कम ग्राहक आएंगे।

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आय में कमी की संभावना के बीच सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने, सामानों और दुकानों तक आने वालों के हाथ सैनिटाइज करने जैसी अनेक गतिविधियों के लिए दुकानों पर अतिरिक्त कार्यबल लगाना पड़ सकता है। इससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
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आम आदमी पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ के प्रमुख ब्रजेश गोयल ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने सरकार को बाजार खोलने हेतु सुझाव दिए हैं। सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए बाजारों में ऑड-ईवन योजना लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है।

आने वाले समय में जल्द ही दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियों की शुरुआत की जा सकती है। बाजार खोलने को लेकर सरकार का रुख काफी सकारात्मक है।

सिसोदिया से की मुलाकात

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के कई व्यापारियों ने मंगलवार को उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री मनीष सिसोदिया से मुलाकात कर दिल्ली में व्यापार को खोलने की इजाजत देने की मांग की है।

व्यापारियों ने वित्त मंत्री से बाजार खोलने, लगातार बढ़े आर्थिक भार को कम करने के लिए कुछ उपाय करने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने पर अपनी चिंता साझा की हैं।

खबर है कि व्यापारियों ने सरकार से टैक्स अदायगी के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की भी मांग की है।

लेकिन कई व्यापारियों का मानना है कि व्यापार की नई व्यवस्था अपनाने पर व्यापारियों पर आर्थिक भार बढ़ सकता है। दुकानों की तरह गोदामों और ट्रकों पर सामान चढ़ाने-उतारने के दौरान भी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।

इससे पहले ही दबाव में चल रहे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। यहां ज्यादातर अशिक्षित या बहुत कम शिक्षित कामगारों के साथ काम करना होता है। ऐसे में इन जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में भी मुश्किलें आएंगी।

कैसे बनाए रखेंगे सोशल डिस्टेंसिंग

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके जैन ने कहा कि देश में खुदरा व्यापार में सबसे ज्यादा संख्या ऐसे दुकानदारों की है, जो स्वयं अपने या अपने परिवार के लोगों के सहयोग से दुकानें चलाते हैं।



इन लोगों को थोड़ी सी ट्रेनिंग देने पर इन दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में परेशानी नहीं आएगी। लेकिन जहां बड़ी दुकानें हैं, वहां कुछ परेशानी सामने आ सकती है।

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