फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   builders buyers dispute is rising in gurgaon

बिल्डर से पैसे वापस पाकर भी घाटे में रहेंगे निवेशक

Sat, 23 Apr 2016 09:18 AM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 23 Apr 2016 09:18 AM IST
सार

  • गुड़गांव में बढ़ता जा रहा है बिल्डर्स-बायर्स विवाद
  • परेशान निवेशक कई बार पैसे वापस लेने की करते हैं मांग
  • जानकारों ने कहा पैसा वापसी के बाद भी बिल्डर रहेगा फायदे में 

विज्ञापन
builders buyers dispute is rising in gurgaon

विस्तार

साइबर सिटी बिल्डर-बायर्स विवाद का गढ़ बनता जा रहा है। अब तो इसकी गूंज प्रदेश के मुख्यमंत्री तक पहुंचने लगी है। हजारों ऐसे खरीददार हैं, जिन्हें बिल्डरों से धोखा मिला है। लगातार डिले होते प्रोजेक्ट से निवेशकों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है। घर का किराया देने के साथ बैंक की ईएमआई उनकी कमर तोड़ रही है।

विज्ञापन


बिल्डरों की इस कारगुजारी से आजिज काफी निवेशक अपना पैसा वापस मांगने लगे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि बिल्डर उन्हें उनका फ्लैट दें। जानकारों का कहना है कि बिल्डर से पैसा वापस लेना भी बायर्स के लिए घाटे का मामला होगा, क्योंकि वह सिर्फ मूलधन ही लौटाने को तैयार हैं।
विज्ञापन


गुड़गांव में बड़े से बड़े नाम वाला बिल्डर खरीददारों को धोखा दे रहा है। तीन साल में फ्लैट देने का वादा करने वाले बिल्डर छह-छह साल से खरीददारों को इधर-उधर भटका रहे हैं। यहां यूनिटेक, एम्मार-एमजीएफ, रहेजा, एएन बिल्डवेल, वाटिका, बीपीटीपी, रामप्रस्थ और ईरा जैसे बिल्डरों के सबसे अधिक विवाद हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन्हीं की हाउसिंग परियोजनाओं में सबसे अधिक लोग फंसे पड़े हैं। इनके खिलाफ आए दिन प्रदर्शन होता है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष भी यूनिटके बिल्डर का मामला उठा था। इस मामले में सीएम ने सख्त रुख दिखाया और निर्देश दिया कि बिल्डर की संपत्तियों और जिम्मेदारी का लेखाजोखा तैयार किया जाए।

एम्मार-एमजीएफ के सेक्टर-65 परियोजना में निवेश करने वाले रोहित सहाय का कहना है कि बिल्डर उन्हें धोखा दे रहा है। उसे पजेशन 2012 में देना था। मगर अभी यहां काम पूरी तरह से बंद है। कई बार मन में आता है कि बिल्डर उनका पैसा लैटा दे।

मगर पैसा वापस लेना भी घाटे का सौदा होगा यह बात समझ में आने के बाद फ्लैट के लिए इंतजार करना सबसे बेहतर लगता है। निवेशक कर्नल मनोज अस्थाना का कहना है कि अपना घर पाने के लिए लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। 

मैंने ईरा लैंडमार्क के सेक्टर-103 स्थित कॉस्मोसिटी परियोजना में फ्लैट बुक किया था। जिसकी पजेशन दिसंबर, 2015 में मिलनी थी। मगर साइट पर काम बिल्कुल बंद है। आखिर कब तक प्रोजेक्ट पूरा होगा यह जानकारी लेने के लिए बिल्डर के नोएडा स्थिति कार्यालय पर गई। पर वहां कोई मिलने को तैयार नहीं है।

से ब्याज और जुर्माना सहित वापस देने को भी बिल्डर तैयार नहीं है। अब तक बिल्डर को 40 लाख रुपये दे चुकी हूं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। न तो फ्लैट मिलता दिखाई दे रहा है और न ही पैसा। अब तो सरकार का ही भरोसा है कि वह बिल्डर पर दबाव बनाए। नहीं तो सैकड़ों लोगों के पसीने की कमाई डूब जाएगी। ...राजबाला, निवेशक, ईरा लैंडमॉर्क कॉस्मोसिटी सेक्टर-103

क्या कहना है कानून के जानकारों का...
अगर कोई बिल्डर खरीददारों को अपने वादे के मुताबिक निर्धारित समय में फ्लैट का कब्जा नहीं दे पाता और बाद में पैसे वापसी का विकल्प देता है। ऐसे में खरीददार को सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि बिल्डर सिर्फ मूलधन वापसी की बात करता है। ब्याज और जुर्माने के बारे में कुछ नहीं कहता। ऐसे में बिल्डर से ब्याज और जुर्माना दोनों की मांग करनी चाहिए। जहां तक हो सके तो उससे फ्लैट ही लेना चाहिए। 
...उदय प्रकाश, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट 

यहां बिल्डरों से हजारों खरीददार परेशान हैं। अगर बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाता तो उससे सिर्फ मूलधन नहीं बल्कि जुर्माना सहित ब्याज लेना चाहिए। अगर बिल्डर ऐसा नहीं करता है कि उसके खिलाफ निवेशक को कोर्ट की भी शरण लेनी चाहिए। ...संतोख सिंह, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन गुड़गांव

अगर कोई बिल्डर अपना प्रोजेक्ट तय समय में पूरा नहीं कर पाता है तो यह उसकी गलती होती है। अगर वह पैसा वापस करना चाहता है तो उसे ठीक उसी शर्तों का पालन करना चाहिए जैसा वह खरीददारों पर लगाता है। अगर निवेशक किश्त देने में देरी करता है तो बिल्डर उससे 18 से 24 प्रतिशत की दर से ब्याज लेता है। बिल्कुल इसी दर पर उसे भी निवेशकों को जुर्माने सहित ब्याज देना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो यह कानूनी रूप से गलत है। खरीददार को हक बनता है कि वह उसके खिलाफ अदालत में जाए।  ...कुलभूषण भारद्वाज, पूर्व अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन गुड़गांव


बिल्डर के प्रोजेक्ट में निवेश से पहले यह रखें ध्यान...
-बिल्डर के कहां-कहां हैं प्रोजेक्ट, उनकी स्थति क्या है। क्या उसने अपने वादे के अनुसार खरीदारों को पजेशन दिया है। 
-जिस भूमि पर वह परियोजना ला रहा है उसका आवंटन किसके नाम पर है। रजिस्ट्री किसके नाम पर है। यह भूमि कहीं किसी विवाद में तो नहीं है। 
-बिल्डर के उन छिपे चार्ज के बारे में भी जानकारी लेना जरूरी है, जिसका जिक्र वह खरीददारों से नहीं करता। 
-विभिन्न एरिया का भी हिसाब लेना चाहिए। मसलन सुपर व कॉमन एरिया का रेशो कितना है। कारपेट एरिया कितना मिलेगा। 
-अपनी परियोजना के अंतर्गत बिल्डर खरीददारों को किन-किन चीजों की सुविधा दे रहा है। सड़क की स्थिति क्या होगी। प्ले ग्राउंड, स्वीमिंग पूल और पार्क को लेकर बिल्डर क्या करना चाहता है।
-पेमेंट प्लान क्या है, कितना पैसा कब-कब दिया जाना है। 
-बिल्डर से यह भी पता कर लें कि अगर उसके प्रोजेक्ट में देरी होती है तो उसकी लागत किस हिसाब से बढ़ेगी। 
-निवेशक फ्लैट बुक कराने से पहले यह देख लें कि बिल्डर ने किन बैंकों को लोन की अनुमति दी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed