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अब मुनाफे के लिए बिल्डर नहीं बचा पाएंगे फ्लैट
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:24 PM IST
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अब बिल्डर अगर ज्यादा मुनाफे के लिए बाद में बेचने के मकसद से कुछ फ्लैट बचाएंगे तो उ भारी-भरकम आयकर चुकाना पड़ेगा। आयकर विभाग बहुत जल्द इस पर अमल करने जा रहा है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में करीब 30,000 फ्लैट खाली होने का आकलन है।
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आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह नियम बन चुका है। मुख्यालय से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। आदेश मिलते ही इस पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इस आदेश के हवाले से उन्होंने बताया कि बिल्डर बहुत से फ्लैट बचा लेते हैं।
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उनका मकसद इन फ्लैटों को बाद में बेचकर ज्यादा लाभ कमाना होता है। लॉन्चिंग के समय इन फ्लैटों की बुकिंग नहीं की जाती। जब सभी फ्लैट बनकर तैयार हो जाते हैं तब इनकी बुकिंग होती है। उस समय तक फ्लैटों की कीमत काफी बढ़ चुकी होती है।
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आयकर अधिकारी ने बताया कि विभिन्न स्रोतों से अब तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार नोएडा में करीब 30 हजार फ्लैट ऐसे हैं, जिनको बिल्डरों ने जानबूझकर रोक रखा है। इनको बाद में बेचेंगे, जिससे ज्यादा मुनाफा मिल सके। अधिकारी ने बताया कि इसकी पुख्ता जानकारी नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण से ली जाएगी।
बिल्डर नक्शा पास कराने और कंपलीशन सर्टिफिकेट लेने पर प्रोजेक्ट का पूरा ब्योरा नोएडा प्राधिकरण को देते हैं। बिक जाने वाले फ्लैटों की रजिस्ट्री होती है। वहां से भी जानकारी मिल जाएगी। इन विभागों से जानकारी जुटाने के बाद आयकर विभाग की टीम मौके पर जाकर बिल्डर से ब्योरा लेगी।
उन्होंने बताया कि जिस सोसायटी में फ्लैट बचेंगे। वहां आसपास किराए का आकलन लगाकर उतने समय का टैक्स जमा कराया जाएगा। बेशक वह फ्लैट किराए पर उठा हो या नहीं। उदाहरण केतौर पर किसी सोसायटी में दस फ्लैट पांच वर्ष तक खाली रहते हैं।
वहां का किराया 15,000 रुपये मासिक है, तो बिल्डर को 90 लाख रुपये की आमदनी मानते हुए करीब 30 फीसदी टैक्स जमा कराया जाएगा। उनका मानना है, कि इससे आयकर को काफी राजस्व मिल सकता है। बिल्डर फ्लैट रोकने के बजाय उसे बेचने के लिए बाध्य होंगे।
‘बिल्डर कभी भी मुनाफे के लिए फ्लैट नहीं बचाते, बल्कि कोशिश यही रहती है, कि लॉन्चिंग के समय ही जितने फ्लैट बन रहे हैं वे सभी बिक जाएं। आयकर का यह अनुमान लगाना गलत है कि मुनाफे के लिए फ्लैट रोके जाते हैं। आयकर के इस नियम केबारे में हमने भी सुना है।
अगर आयकर से नोटिस मिलता है तो बिल्डर उन बचे हुए फ्लैटों को आयकर विभाग को ही खरीदने के लिए कहेंगे। फ्लैट वही बच जाते हैं जो बिक नहीं पाते। मंदी के चलते फ्लैट न बिक पाने की समस्या है। उस पर आयकर के ये नियम रियल एस्टेट को और पीछे धकेल देंगे। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। आयकर को इस नियम से कोई खास फायदा नहीं होने वाला है। निर्माण शुरू होने से लेकर पूरा तक लगभग पूरा टैक्स आयकर को जा चुका होता है।’