22 मार्च से बजट सत्र शुरू, दिल्ली सरकार नहीं लगाएगी कोई नया कर
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जनता के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार अगले बजट में राहत की सौगात लेकर आने वाली है। राजस्व वसूली और योजना मद राशि खर्च में पिछड़ी सरकार अब तक का सबसे बड़ा 45 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश करने की तैयारी में है।
वहीं, खजाने में करीब पांच हजार करोड़ रुपये की बचत को देखते हुए कोई नया कर नहीं लगाने का संकेत सरकार ने दिया है। पुराने बजट की योजनाओं पर प्रावधान के साथ ही वैट में कुछ जगह राहत भी मिल सकती है। 22 मार्च को बजट सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें 28 मार्च को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बजट पेश करेंगे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक कार्यक्रम में ये संकेत दिए हैं कि दिल्ली सरकार कुछ मदों के वैट में कटौती कर सकती है। उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी ने शुरुआत में कहा था कि पांच साल में दिल्ली में वैट दर सबसे कम होगी, लेकिन अब लगता है कि दो सालों में ही वैट दर कई मदों में कम होगी।
सूत्रों के अनुसार अन्य राजनीतिक दल बजट साइज या योजना मद बजट कम करने से आलोचना शुरू ना कर दें, इसलिए सरकार बड़ा बजट (45 हजार करोड़) पेश करने की तैयारी में है।
आम आदमी कैंटीन और बसों की खरीद के लिए बजट में प्रावधान होगा
सरकार नए बजट में विज्ञापन का बजट आधे से भी कम (200 करोड़) करने जा रही है। तर्क है कि खुले हाथ से खर्च के बावजूद 526 करोड़ रुपये का बजट आधा भी खर्च नहीं हो सका है। सूत्र बताते हैं कि बजट की 75 फीसदी राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन के लिए रखी जाएगी। पानी पाइपलाइन और लैब नेटवर्क, 3000 मोहल्ला क्लीनिक, सीसीटीवी कैमरे, आम आदमी वाईफाई, डिजिटल दिल्ली, आम आदमी कैंटीन और बसों की खरीद के लिए बजट में प्रावधान होगा।
दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2015-16 के बजट में 19 हजार करोड़ रुपये योजना मद समेत 41 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इसमें कर प्रावधानों से 34661 करोड़ रुपये जुटाने का प्रावधान था, लेकिन सरकार फरवरी तक 27 हजार करोड़ रुपये ही जुटा सकी हैं।
हालांकि योजना मद में 19 हजार करोड़ रुपये में सिर्फ 53 फीसदी ही खर्च हुआ है। इसकी वजह से खजाने में 5500 करोड़ रुपये बचत के तौर पर पड़े हैं। हालांकि गैर योजना मद में खर्च प्रस्ताव से अधिक हो रहा है।