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मिलिए, ऐसे भाई-बहनों से जिन्होंने मैदान पर गाड़े झंडे
पूजा शर्मा /अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 28 Aug 2015 03:08 PM IST
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‘राखी तो बस एक बहाना है, भाई-बहन का प्यार पुराना है। छोड़कर सारे रिश्ते, बस एक यही रिश्ता तो निभाना है’। अपने इस रिश्ते को की डोर को मजबूत बनाने वाले ऐसे भी भाई बहन हैं जो एक-दूसरे का साथ छोड़े नहीं छोड़ते।
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फिर चाहे वह घर का आंगन हो या फिर खेल का मैदान। राष्ट्रीय खेल दिवस के दिन रक्षाबंधन का त्योहार ऐसे भाई बहनों के लिए दोहरी खुशियां लेकर आया है जो खेल के मैदान पर भी साथ रहते हैं।
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शहर में ऐसे भाई बहन खिलाड़ियों की कई जोड़ियां हैं जो अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। उनके एक साथ खेलने का अंदाज उनके प्यार को बखूबी बयां करता है। बहन की सुरक्षा का वचन भाई खेल मैदान पर बखूबी निभा रहें है।
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भाई की उंगली पकड़ सीखा खेलना
अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी रहे गौरव और एकता कालिया भाई बहन हैं। दोनों की जोड़ी ने मैदान पर एक साथ डबल्स मुकाबले खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किए।
दोनों ने मिलकर कम से कम 50 राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज कराई। एकता बताती हैं कि इस खेल में वह अपने भाई की उंगली पकड़कर आगे आई हैं। भाई रोजाना चार से पांच घंटे प्रशिक्षण देते थे।
भाई ने अपने साथ उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया, यही उनके लिए रक्षा बंधन का सबसे बड़ा तोहफा है। एकता पिछले दस साल से हरियाणा की निर्विविदित चैंपियन रही हैं। वहीं, गौरव अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
बहन की खातिर खिलाड़ी बन गए
अनुपमा और आकाश दोनों मुक्केबाज हैं। दोनों पलवल से फरीदाबाद बॉक्सिंग की कोचिंग ले रहे हैं। अनुपमा बताती है कि उनके भाई की खेलों में कोई रुचि नहीं थी, लेकिन रास्ते में आनेजाने के दौरान उन्हें कोई परेशान न करे इसके लिए भाई ने भी अकादमी ज्वाइन कर ली।
अब दोनों एक साथ मैदान पर पंच लगाते हैं। अनुपमा कहती हैं कि रात के समय हर लड़की को ट्रेन से सफर करने में डर लगता हैं, लेकिन भाई को सुरक्षा कवच की तरह खड़ा देख सारा डर छूमंतर हो जाता है।
रक्षाबंधन पर हर भाई बहन की सुरक्षा का वचन लेता है, लेकिन आकाश हर पल इस फर्ज को निभाते हैं। अनुपमा राज्यस्तर पर स्वर्ण और आकाश स्कूल गेम्स में स्वर्ण पद जीत चुके हैं।
बहन करती है भाई की सुरक्षा
गौरव और सोनाली सिंह दोनों का खेलों में जज्बा देखते ही बनता है। न्यू तिलपत कॉलोनी में रहने वाले इन दोनों भाई बहन ने खेल, गीत-संगीत, चित्रकारी आदि में बहुत से पदक हासिल किए है। 12 वर्षीय सोनाली टेबल-टेनिस में नेशनल स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। वहीं, वह सांस्कृतिक संगीत भी सीख रही है।
उधर, भाई गिटार के शौकीन है। दोनों भाई-बहन प्रशिक्षण केंद्र पर साथ आते जाते है। गौरव बताते है कि रास्ते में उनकी बहन उनका पूरा ख्याल रखती है। वह उन्हें अकेले सड़क क्रास नहीं करने देती।
हर प्रतियोगिता में भाई जाते है साथ
अंर्राष्ट्रीय शूटर श्वेता चौधरी और तौसिंदर दोनों भाई बहन हैं। श्वेता बताती है कि वह दोनों बचपन से एक साथ खेल रहे हैं। उन्होंने 1995 से शूटिंग की शुरुआत की।
दोनो भाई बहन को उनके पापा शूटिंग रेंज लेकर गए। जहां पहली दफा प्रैटिक्स के समय उनके पाव में गोली लग गई, जिसके बाद दोनों ने एक साथ फिर से खेलना शुरू किया।
1998 में दिल्ली में हुई नेशनल चैंपियनशिप में दोनों ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया और दोनों का स्कोर भी एक ही था। यहां से वह इंडियन टीम में चयनित हुए।
उसके बाद हर प्रतियोगिता में जीत हासिल की। श्वेता बताती हैं कि उनके भाई अब एक कोच हैं, लेकिन किसी प्रतियोगिता में जब वह भाग लेने जाती है, तो उनके भाई उनके साथ जाते हैं।