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स्तन कैंसर के बाद भी जीवन संभव हैः एन जिलिअॅन
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 08 Oct 2015 11:10 AM IST
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स्तन केंसर अब भारतीय महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर बन चुका है और देश भर की कुल महिला कैंसर रोगियों में से 25 से 30 प्रतिशत स्तन कैंसर से ग्रस्त होती हैं। भारत में हर वर्ष लगभग 80,000 महिलाओं की मौत केंसर से होती है और यह संख्या पूरे विश्व में अधिकतम है। कैंसर समाज पर एक भारी भावनात्म क तथा आर्थिक बोझ का कारण है।
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भारत में स्त न केंसर के खतरे पर हाल ही में किये गये एक अध्यियन में ज्ञात हुआ कि, हर 28 में से एक महिला को अपने जीवनकाल में स्त न केंसर होता ही है। शहरी क्षेत्रों में यह प्रतिशत थोड़ा अधिक (हर 22 में से एक) है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम कुछ कम (हर 60 में से एक) है।
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स्तन कैंसर का पता यदि आरंभिक चरण में लग जाए, तो उपचार के उपरांत जीवन की संभावना अच्छी रहती है। स्तन कैंसर के आंकड़ों के मामले में भारत पश्चिमी देशों से कैसे भिन्न है। यहां यह रोग अपेक्षाकृत युवा महिलाओं (30 से 40 वर्ष के बीच) में भी पाया जाता है, जबकि पश्चिम में यह 50 वर्ष से अधिक आयु वाली महिलाओं का रोग है और भारत के मामले में जागरूकता तथा जांच के अभाव में रोग का पता लगने तक पहले ही काफ़ी देर हो चुकी होती है।
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गत दो दशकों के दौरान इस रोग की चपेट में आने की अनुमानित आयु में और भी गिरावट आ चुकी है और लगभग 48 प्रतिशत स्त न केंसर रोगी 50 वर्ष से कम आयु की होती हैं। रोगियों की काफ़ी अधिक संख्या 25 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में है और यह निश्चित रूप से बेहद निराशाजनक है। लगभग 60 प्रतिशत रोगी जी नहीं पाते क्योंकि रोग का पता ही तीसरी या सा चौथी स्टेकज में जाकर लगता है। युवा महिलाओं में रोग अधिक आक्रामक रूप में होता है और आमतौर पर यह कीमोथेरॅपी के प्रति संवेदनशील नहीं होता, क्योंकि वे ईआर/पीआर/एचईआर 2 नेगेटिव होती हैं।
स्तन कैंसर के प्रति सजगता कार्यक्रमों को, पोलियो की ही तरह, राष्ट्रीय कार्यक्रमों के रूप में लिया जाना चाहिये, जिससे रोग का पता आरंभिक चरण में ही लगाया जा सके, जब रोग का कोई भी लक्षण प्रकट रूप से सामने न आया हो, क्योंकि रोग अभी पहले चरण में ही होता है और पॉंच वर्ष की उपचार उपरांत उत्तगरजीविता की संभावना अधिक रहती है। हम स्तरन केंसर को होने से रोक तो नहीं सकते, परन्तु आरंभिक चरण में इसका पता लगा सकते हैं और रोगी कैंसर के बाद भी जिन्दग़ी जी सकता है।
लगभग 6 से 8 प्रतिशत मामलों में स्त न केंसर आनुवंशिक होते हैं और परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते हैं। जॅनॅटिक मैटीरियल (जिसे जर्म-लाइन म्यूआटेशन के नाम से जाना जाता है) में एक प्रकार के बदलाव के कारण, आपके जीन आपमें कैंसर विकसित होने के जोखिम को निर्धारित करते हैं।
यदि परिवार में पहले कई सदस्योंप को कोई न कोई केंसर हुआ हो, तो यह इस बात का संकेत है, कि केंसर की आनुवंशिक प्रवृत्ति है और अन्य सदस्य केंसर विकसित होने की उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं। BRACA जीन एक इस प्रकार का जीन होता है, जिसमें अंडाशय, स्तयन तथा मलाशय-गुदा संबंधी केंसर विकसित होने की संभावनायें काफ़ी अधिक रहती हैं।
स्तन केंसर का जल्दव पता लगाने का प्रमुख तरीका है, स्तन सजगता कार्यक्रम, जिसमें शिक्षा, परीक्षण और मैमोग्राफ़ी तथा ब्रेस्टल अल्ट्रा साउंड जैसे जॉंच उपकरण शामिल हैं। इन सबके साथ-साथ जीवनशैली में सुधार भी एक महत्वेपूर्ण भूमिका निभाता है।
इनसे बचें
- स्तन-पान से स्तन कैंसर विकसित होने का जोखिम कम हो जाता है
- अपने आहार में विषाक्तम रसायनों, जैसे, प्लास्टिक के बर्तनों में माइक्रोवेव किया हुआ भोजन, उच्च तापमान पर बार्बेक्यूर, ग्रिल और फ्राई किया हुआ मांस, लेने से बचें
- एस्ट्रोाजॅन-युक्तय गोलियों का लम्बेऔ समय तक सेवन न करें
- लम्बेर (एक दशक से भी अधिक समय तक) समय तक कॉलेस्ट्रॉ ल घटाने वाली दवाओं का सेवन न करें
- एक्टिव रहें और मोटापा घटाएं
स्तन केंसर की पड़ताल हेतु निम्नक सात बिन्दुओं पर ध्यान दें:
- स्तटन में कोई गांठ न हो – यद्यपि सभी गांठें कैंसर नहीं बनती, लेकिन इनकी जांच की आवश्यकता होती है
- स्तन के आकार में बदलाव
- निप्पवलों का अंदर की ओर धंसना
- त्वचा का सिकुड़ना
- निप्पवलों से रक्तस्राव
- त्वचा की रंगत में बदलाव
- बग़लों में सूजन
यू. एस. प्रिवेन्टिव सर्विसिस टास्क् फोर्स ने नवंबर, 2009 में स्तन केंसर के लिये निम्नर दिशा-निर्देश जारी किए
40 से 49 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं में रुटीन स्क्री निंग मैमोग्राफ़ी के विरुद्ध सिफ़ारिश की गई है। 50 वर्ष की उम्र से पहले द्वैवार्षिक (हर दो वर्ष में एक बार) स्क्रीनिंग मैमोग्राफ़ी केवल व्यक्तिगत आधार पर होनी चाहिये और इसमें रोगी के संदर्भ को भी ध्याकन में रखना चाहिये, जिसमें इस क्रिया के विशिष्ट लाभ तथा हानियों के विषय में रोगी की मान्यतायें शामिल हैं।
50 से 74 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं के लिये हर दो वर्ष में एक बार स्क्री निंग मैमोग्राफ़ी का सुझाव दिया गया है।
निष्कार्ष निकाला गया है, कि वर्तमान प्रमाण 75 वर्ष या इससे अधिक आयु की महिलाओं में स्क्रीषनिंग मैमोग्राफ़ी के अतिरिक्त फ़ायदे तथा नुकसानों का मूल्यांकन करने हेतु पर्याप्त नहीं हैं। स्तनों का स्वर-परीक्षण सिखाने के विरुद्ध सिफ़ारिश की गई है।
निष्कार्ष निकाला गया है, कि वर्तमान प्रमाण 40 वर्ष या इससे अधिक आयु की महिलाओं में स्क्रीषनिंग मैमोग्राफ़ी से परे-क्ली निकल स्तन परीक्षण के अतिरिक्ता फ़ायदे तथा नुकसानों का मूल्यॉंकन करने हेतु पर्याप्त नहीं हैं।
निष्कार्ष निकाला गया है कि वर्तमान प्रमाण स्ततन कैंसर की जॉंच के साधनों के रूप में फिल्म मैमोग्राफी की बजाय डिजिटल मैमोग्राफ़ी या एमआरआई के अतिरिक्त फ़ायदे तथा नुकसानों का मूल्यांकन करने हेतु पर्याप्त नहीं हैं।
सौजन्य सेः डॉ रागिनी अग्रवाल, डब्लू हॉस्पिटल प्रतीक्षा