वैश्विक महामारी में ऋण मिलने में देरी से मेट्रो परियोजना पर लगा ब्रेक, हो चुकी है दो साल की देरी
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दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की मेट्रो फेज-4 परियोजना के जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम कॉरिडोर के अंडरग्रांउड सेक्शन पर बेशक काम शुरू कर दिया है, लेकिन कोविड-19 की वजह से इस फेज के मंजूर दो अन्य कॉरिडोर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दोनों कॉरिडोर पर काम शुरू करने के लिए डीएमआरसी को जापान की जिका (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) से ऋण का इंतजार है। दूसरी तरफ केंद्र की ओर से फेस-4 के छह में से तीन अन्य कॉरिडोर पर अभी मंजूरी नहीं मिली है।
मेट्रो-फेस 4 परियोजना के तहत दिल्ली में कुल 104 किलोमीटर के दायरे में नेटवर्क का विस्तार किया जाना है। इनमें से एयरोसिटी-तुगलकाबाद और मुंकुदपुर-मौजपुर कॉरिडोर पर काम आगे बढ़ाने के लिए जिका से लोन मिलने का इंतजार है। फेज-4 परियोजना पर करीब 50 हजार करोड़ की लागत का अनुमान है। पहले भी डीएमआरसी परियोजनाओं में जिका से आर्थिक सहयोग मिलता रहा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान मेट्रो सेवाएं बंद होने से डीएमआरसी को अरबों का नुकसान होने के बाद महामारी से प्रभावित जापान की एजेंसी भी सभी पहलुओं पर मंथन के बाद ही आर्थिक सहयोग के लिए पहल कर सकती है। फिलहाल, तीन कॉरिडोर पर 61.67 किलोमीटर के दायरे में अंडरग्राउंड और एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना में दो साल की हो चुकी है देरी
डीएमआरसी की ओर से फेस-4 पर 2017 में काम शुरू होना था। परियोजना को पांच वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था ताकि दिल्ली के हर कोने तक मेट्रो की सुविधा यात्रियों को मिल सके। फेस-4 पर दिसंबर-2019 में निर्माण कार्यों की शुरुआत हुई। महज तीन महीने में लॉकडाउन लागू होने के बाद एक कॉरिडोर को छोड़ बाकी दोनों परियोजना पर फिलहाल काम शुरू होने के लिए कुछ समय लग सकता है।
जिका देती रही है लागत का 50 फीसदी हिस्सा
पहले फेस से जापान की एजेंसी जिका डीएमआरसी को परियोजनाओं पर लागत का करीब 50 फीसदी राशि का ऋण देती रही है। पहले फेस में 60, दूसरे में 54.4 जबकि तीसरे फेस में 48 फीसदी से अधिक राशि बतौर ऋण डीएमआरसी को जारी किया गया।
फेस-3 परियोजना की अनुमानित लागत 41 हजार करोड़ रुपये के करीब थी। रियायती दर पर 30 वर्षों में ऋण की अदायगी की सुविधा होने की वजह से डीएमआरसी ने जिका से मिलने वाली ऋण सुविधा का लाभ लिया। कुल लागत की शेष राशि में केंद्र और दिल्ली सरकार की 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी रही है।
फेस-4 में स्वीकृत तीन कॉरिडोर
एरोसिटी से तुगलकाबाद 20.20 15
आरके आश्रम से जनकपुरी वेस्ट 28.92 22
मौजपुर से मजलिस पार्क 12.55 08
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61.6़7 45
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फेज-4 के तीन कॉरिडोर(मंजूरी का इंतजार)
कारीडोर लंबाई
रिठाला-बवाना-नरेला - 21.73 किमी
इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ- 12.58 किमी
लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक - 7.96 किमी
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फ्लैट निर्माण के लिए डीडीए ने मेट्रो एलाइनमेंट बदलने का दिया सुझाव
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की नरेला क्षेत्र में 60 हजार फ्लैट बनाने की योजना है। डीडीए के मुताबिक मेट्रो कॉरिडोर, बवाना औद्योगिक क्षेत्र के कुछ हिस्से को छूता है, ऐसे में मेट्रो की पहुंच पूरे बवाना क्षेत्र में नहीं हो सकेगी। मेट्रो का रूट, डीडीए की लैंड पूलिंग के तहत विकसित होने वाले सेक्टरों से होकर गुजर रही है, जहां फ्लैटों का निर्माण किया जाना है। इस वजह से भविष्य में उस जमीन पर किसी तरह निर्माण संभव नहीं होगा।
इस संबंध में डीडीए ने डीएमआरसी को पत्र लिखकर मेट्रो के रूट में एलाइनमेंट करने के लिए कहा है ताकि बदलाव के साथ रिठाला- नरेला रूट को अमलीजामा पहनाया जा सके। इस रूट के लिए डीडीए की ओर से मेट्रो को एक हजार करोड़ रुपये भी किश्तों में देने की सिफारिश की गई है।
रिठाला-नरेला कॉरिडोर के लिए डीडीए सहित सभी हितधारकों से विमर्श के बाद अलाइनमेंट की गई थी। इस संबंध में डीडीए की मांग और सुझाव की समीक्षा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- अनुज दयाल, कार्यकारी निदेशक (जनसंपर्क), डीएमआरसी