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हार्ट, किडनी और लीवर दान कर बचा ली चार जिंदगी, मौत के बाद कर गए जीवनदान
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 05 Nov 2016 12:12 AM IST
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एक ब्रेन डेड पूर्व सरकारी कर्मी ने बृहस्पतिवार को अपने अंगों को दान कर चार लोगों की जिंदगी बचा ली। उसके चार अंगों को चार अन्य मरीजों को ट्रांसप्लांट किया गया।
सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल होकर फोर्टिस अस्पताल नोएडा में भर्ती एक पूर्व सरकारी कर्मी को टेस्ट के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजनों ने उसके अंगों को दान करने की इच्छा जताई। इसके बाद मरीज का हर्ट, किडनी और लीवर को दूसरे मरीजों को ट्रांसप्लांट करने का काम डॉक्टरों ने किया।
मरीज का हर्ट ओखला दिल्ली स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट हर्ट इंस्टीट्यूट पहुंचाया गया। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर का सहारा लिया गया। इसके अलावा एक किडनी साकेत के मैक्स सुपर स्पेशयिलिटी हॉस्पिटल ले जाई गई और वहां ट्रांसप्लांट किया गया।
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सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल होकर फोर्टिस अस्पताल नोएडा में भर्ती एक पूर्व सरकारी कर्मी को टेस्ट के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजनों ने उसके अंगों को दान करने की इच्छा जताई। इसके बाद मरीज का हर्ट, किडनी और लीवर को दूसरे मरीजों को ट्रांसप्लांट करने का काम डॉक्टरों ने किया।
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मरीज का हर्ट ओखला दिल्ली स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट हर्ट इंस्टीट्यूट पहुंचाया गया। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर का सहारा लिया गया। इसके अलावा एक किडनी साकेत के मैक्स सुपर स्पेशयिलिटी हॉस्पिटल ले जाई गई और वहां ट्रांसप्लांट किया गया।
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30 साल के व्यक्ति की बदली किडनी
किडनी प्रत्यारोपण
- फोटो : demo pic
वहीं, फोर्टिस अस्पताल में दो मरीजों में अंगों का ट्रांसप्लांट किया गया। फोर्टिस नोएडा में भर्ती 50 वर्षीय मरीज पिछले दो साल से लीवर की बीमारी से ग्रस्त था। वहीं, 30 वर्षीय एक मरीज पिछले दो साल से किडनी की बीमारी से ग्रस्त था और डायलिसिस पर चल रहा था।
इस काम में फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों की एक टीम लगी थी, जिसमें एडिशनल डायरेक्टर यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट डॉ. दुष्यंत नादर, डायरेक्टर लीवर ट्रांसप्लांट डॉ. विवेक विज सहित कई अन्य शामिल रहे।
इस काम में फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों की एक टीम लगी थी, जिसमें एडिशनल डायरेक्टर यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट डॉ. दुष्यंत नादर, डायरेक्टर लीवर ट्रांसप्लांट डॉ. विवेक विज सहित कई अन्य शामिल रहे।
करीब 16 मिनट में 22 किलोमीटर तय कर पहुंचाया हार्ट
फोर्टिस अस्पताल नोएडा से फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट ओखला तक 22 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ट्रैफिक पुलिस ने ऑपरेशन के बाद निकाले गए हार्ट को 16.20 मिनट में दूसरे मरीज तक पहुंचा दिया। इसमें नोएडा के अलावा गाजियाबाद और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का सहयोग रहा।
डॉक्टरों की मानें तो ऑपरेशन के बाद निकाला गया हार्ट केवल चार घंटे तक ही जिंदा रहता है। लिहाजा इसके जल्द से जल्द दूसरे मरीज तक पहुंचा कर ऑपरेशन के माध्यम से ट्रांसप्लांट करना जरूरी होता है।
एसपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि उनसे फोर्टिस अस्पताल नोएडा से ओखला तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने की अपील की गई। यहां एक ब्रेन डेड मरीज का हर्ट दूसरे अस्पताल तक पहुंचाना था। इसके लिए दो समय तय किए गए थे।
डॉक्टरों की मानें तो ऑपरेशन के बाद निकाला गया हार्ट केवल चार घंटे तक ही जिंदा रहता है। लिहाजा इसके जल्द से जल्द दूसरे मरीज तक पहुंचा कर ऑपरेशन के माध्यम से ट्रांसप्लांट करना जरूरी होता है।
एसपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि उनसे फोर्टिस अस्पताल नोएडा से ओखला तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने की अपील की गई। यहां एक ब्रेन डेड मरीज का हर्ट दूसरे अस्पताल तक पहुंचाना था। इसके लिए दो समय तय किए गए थे।
टीएसआई और दो एचसीपी ने मुस्तैदी से मोर्चा संभाला
ट्रांसप्लांट
- फोटो : अमर उजाला
पहले आठ बजे शाम के पीक आवर का समय तय किया गया था। लेकिन उसका उपयोग न करते हुए रात के समय ग्रीन कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया गया। इसके लिए नोएडा से 20 पुलिसकर्मी, दो टीएसआई और दो एचसीपी ने मुस्तैदी से मोर्चा संभाला।
एक एंबुलेंस में हार्ट लेकर रात के 11.50 मिनट पर सेक्टर-62 स्थित नोएडा फोर्टिस से डॉक्टर चले। यहां से सेक्टर-62 के डी पार्क होते हुए अंदर के रास्ते एनआईबी कट तक एंबुलेंस पहुंची। वहां से गाजियाबाद पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया और एंबुलेंस को यूपी गेट तक पहुंचाया गया।
यूपी गेट से दिल्ली पुलिस ने एंबुलेंस को एनएच-24 के रास्ते सराय काले खां होते हुए ओखला स्थित अस्पताल तक 12.06.20 बजेपहुंचाया गया। इसमें नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली की पुलिस ने अहम रोल अदा किया। नोएडा ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई विपिन राघव ने नोएडा में लीड किया।
एक एंबुलेंस में हार्ट लेकर रात के 11.50 मिनट पर सेक्टर-62 स्थित नोएडा फोर्टिस से डॉक्टर चले। यहां से सेक्टर-62 के डी पार्क होते हुए अंदर के रास्ते एनआईबी कट तक एंबुलेंस पहुंची। वहां से गाजियाबाद पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया और एंबुलेंस को यूपी गेट तक पहुंचाया गया।
यूपी गेट से दिल्ली पुलिस ने एंबुलेंस को एनएच-24 के रास्ते सराय काले खां होते हुए ओखला स्थित अस्पताल तक 12.06.20 बजेपहुंचाया गया। इसमें नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली की पुलिस ने अहम रोल अदा किया। नोएडा ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई विपिन राघव ने नोएडा में लीड किया।