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'महिलाएं अब अपने लिए लड़ने से नहीं डरतीं'

Sat, 20 Dec 2014 02:12 PM IST
Updated Sat, 20 Dec 2014 02:12 PM IST
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Book on rape laws by swarana kanta sharma.

स्वर्णा शर्मा पेशे से जज हैं लेकिन साथ ही एक महिला भी हैं। उनके नाम वैसे तो यह तमगा भी जुड़ा हुआ है कि वह दिल्ली की निचली अदालत में नियुक्त होने वाले युवा जजों में से एक हैं।

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हालांकि उनके कैरियर में सबसे बड़ा मुकाम 2003 में जुड़ा जब बलात्कार से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए बनी पहली महिला अदालत में उन्हें न्यायाधीश की कुर्सी संभालने की जिम्मेदारी दी गई।
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अपने पेशे के प्रति बेहद वफादार इस न्यायाधीश के अंदर एक संजीदा महिला भी थी जो बलात्कार के मामलों को एक न्यायाधीश के अलावा एक संवेनशील महिला की निगाह से भी देखती थी।
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आखिरकार स्वर्णा ने अपने अनुभव को कलमबंद करने का फैसला किया और कानून पर कई फिक्शन और नॉन फिक्शन किताबें लिखने के बाद बलात्कार पीड़ित महिलाओं को ध्यान में रखकर एक किताब लिख डाली। हाल ही में उनकी यह पुस्तक प्रकाशित हुई जिसका नाम है 'तुम्हारी सखी'।

'ज्ञान से होता है सशक्त‌िकरण'

Book on rape laws by swarana kanta sharma.
स्वर्णा के इस पुस्तक की खास बात यह है कि इसके जरिए उन्होंने समाज को बलात्कार और यौन शोषण के मामलों पर बने कानून से अवगत कराने की कोशिश की है।

उनसे बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या महिला कोर्ट की जज होने के कारण उन्हें बलात्कार प‌ीड़िताओं की समस्याओं को समझने में आसानी हुई। तब उन्होंने कहा कि हां, 2003 से 2006 तक महिला अदालत का अनुभव बहुत ही मददगार साबित हुआ।

यह अदालत बलात्कार के मामलों के निपटारे के प्रति पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। इसकी संजीदगी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इस अदालत में स्टाफ के तौर पर महिलाओं को ही रखा गया है।

पीड़िताओं के दर्द ने किया प्रेरित

अदालत में महिलाओं की नियुक्ति के पीछे यह सोच काम करती है कि इससे पीड़िताओं को अपने अनुभव साझा करने में किसी तरह की परेशानी महसूस न हो।

हालांकि एक जज के तौर पर उन्हें पीड़िताओं के दर्द को समझने में बहुत मदद मिली और उनकी राह में आने वाली परेशानियों ने ही उन्हें यह पुस्तक लिखने को प्रेरित किया।

शर्मा बताती हैं कि एक रेप पीड़ित के लिए कानूनी अज्ञानता सबसे बड़ी बाधा है। ज्ञान से सशक्तिकरण होता है और यही वजह है कि शर्मा ने महिलाओं की जानकारी के लिए यह पुस्तक लिखने का फैसला किया।

रेप कोई कलंक नहीं अपराध बन गया है

Book on rape laws by swarana kanta sharma.

'रेप कलंक नहीं अपराध है'
16 दिसंबर के गैंगरेप के बाद आने वाले बदलावों के बारे में बताते हुए शर्मा कहती हैं‌ कि 2013 में कानून में हुए बदलाव ने रेप ‌पीड़िताओं की समस्याओं को बहुत कम कर दिया है। इससे पहले हर कदम पर पीडिताओं को नए दर्द से गुजरना पड़ता था।

निर्भया केस के बाद लोगों के गुस्से ने सरकार को मजबूर कर दिया कि वो बलात्कार के संबंध में कड़े कानून बनाए। शर्मा ने बताया कि इस घटना के बाद महिलाएं पहले से कहीं ज्यादा खुलकर सामने आ रही हैं।

अब महिलाएं इसे लेकर झिझकती नहीं हैं और अपने लिए लड़ना सीख गई हैं। रेप अब कोई कलंक नहीं बल्कि अपराध के रूप में पहचाना जाने लगा है।

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