औद्योगिक नगरी फरीदाबाद से जुड़ेगा बीएमडब्ल्यू का नाम
रॉल्स रायस, मर्सडीज, जगुआर, फरारी, बेंटले जैसी विश्वस्तरीय कारों के बाद अब औद्योगिक शहर का नाम जर्मनी की बीएमडब्ल्यू कार कंपनी से भी जुड़ने वाला है।
अभी तक पूर्णतया विदेशी उपकरण से तैयार होने वाली इस कार के पचास फीसदी कलपुर्जे अब भारत में ही बनाए जाएंगे। कंपनी प्रबंधन ने बीते बृहस्पतिवार को इस संबंध में घोषणा की है।
इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया मुहिम से जोड़ कर देख रहे उद्योगपतियों को रोजगार और कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीज का हब कहा जाने वाला फरीदाबाद देश और विदेश में बनने वाली अधिकतर कारों को ऑटो पार्ट्स सप्लाई करता है।
इंटिग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ माइक्रो-स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज ऑफ इंडिया (आईए-एमएसएमई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव चावला ने बताया कि सात मई को बीएमडब्ल्यू ने घोषणा की है कि भारतीय प्लांट में बनने वाली कारों में पचास फीसदी पार्ट्स देश में ही बनाए जाएंगे।
लोकलाइजेशन से मिली तकनीकी मजबूती
इस कंपनी का चेन्नई में भी प्लांट है। अभी तक यहां पूर्णतया आयातित ऑटो पार्ट्स का इस्तेमाल कर कार तैयार की जा रही थी। उन्होंने बताया कि देश की सभी और फ्रांस, जमर्नी, जापान, कोरिया, अमेरिका, इंग्लैंड आदि देशों की नामचीन कारों का सामान इसी शहर में बनता है।
बीएमडब्ल्यू जैसी कार कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑट्रो पार्ट्स उपलब्ध कराने वाली शहर में पांच सौ से अधिक कंपनियां हैं। फिलहाल यह कंपनियां, रॉल्स रायस, जगुआर, बेंटले, मर्सडीज, फरारी आदि अंतरराष्ट्रीय कार कंपनियों को फैब्रिकेशन, शीट मेटल, प्लास्टिक, रबर, फोर्जिंग, डाईकास्टिंग आदि पार्ट्स आपूर्ति कर रही हैं।
राजीव चावला का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों का लोकलाइजेशन होने से उद्योग तकनीकी रूप से और उन्नत होंगे।
मेक इन इंडिया का है असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जर्मनी यात्रा में एआई-एमएसएमई के अध्यक्ष राजीव चावला भी उनके साथ थे। वह विदेश यात्राओं में उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि हैनोवर के मेले में फरीदाबाद के ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने स्टॉल लगाए थे। मेले में ही बीएमडब्ल्यू ने इन स्टॉलों में प्रदर्शित कंपोनेंट में रुचि दिखाई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया मुहिम का ही नतीजा है कि बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियां देशीयकरण का रुख कर रही हैं।
नौ हजार करोड़ का है ऑटोमोबाइल पार्ट्स कारोबार- राजीव चावला ने बताया कि ऑटोमोबाइल पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना कारोबार नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। बताया कि शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की पांच सौ से अधिक टीयर वन (वह कंपनियां जो पार्ट्स बनाकर सीधे ही कंपनी को देती हैं) और टीयर टू (वह कंपनियां जो पार्ट्स बनवाती हैं और कंपनियों को आपूर्ति करती हैं) कंपनियां हैं।
इनके अलावा जॉब वर्क करने वाले छोटी और मझौली कंपनियों की संख्या कई हजार है। बीएमब्ल्यू के निर्णय से टर्नओवर तो बढ़ेगा ही विदेश में फरीदाबाद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की साख भी बढ़ेगी।