किसानों ने हुड्डा को दिखाए काले झंडे, कांग्रेसियों ने तोड़ा कार का शीशा
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रोजका मेव में आईएमटी विकसित करने के लिए हुड्डा सरकार में अधिग्रहित की गई नौ गांवों की 1600 एकड़ जमीन के विवाद को लेकर रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को किसानों ने काले झंडे दिखाए।
दिल्ली-अलवर रोड स्थित पलवल टी-प्वाइंट पर एकत्र हुए इन किसानों को कांग्रेसियों ने विरोध प्रदर्शन करने से रोकने का प्रयास किया। इस विवाद में किसानों की एक गाड़ी का शीशा भी टूट गया।
किसानों के काफिले का नेतृत्व कर रहे हाफिज सिराजुद्दीन, जाहिद पूर्व सरपंच महरौला, दीन मोहम्मद नंबरदार रुपाहेडी, हाजी वली मोहम्मद तन्नी रोजका मेव, साहुन रोजका मेव ने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाने से उन्हें रोका था, लेकिन फिर भी उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तोड़ा कार का शीशा
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी एक गाडी का शीशा तोड़ दिया। किसानों ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार होता है। पहले तो पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा व पूर्व मंत्री आफताब अहमद ने अपनी सरकार में होते हुए उनकी जमीनों के मुआवजे के बदले में उनसे कोर्ट न जाने का हलफनामा लेकर उनकी आवाज को दबाया और रविवार को उन्हें काले झंडे दिखाने से रोका गया तो उन्हें रोकने का प्रयास किया।
कांग्रेस ने अपनी करनी का खामियाजा पिछले चुनावों में भुगता और आगामी चुनावों में भी नौ गांवों के लोग उन्हें सबक सिखा देंगे। बता दें कि वर्ष 2010 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने मेवात के नौ गांवों की 1600 एकड जमीन रोजका मेव में आईएमटी बनाने के लिए अधिग्रहित की थी।
इसके एवज में किसानों को कम मुआवजा दिया गया तो किसानों ने धरना शुरू किया और सरकार ने मुआवजा बढ़ा दिया। बढ़ा हुआ मुआवजा जब किसानों को वितरित किया गया तो उनसे एक हलफनामा लिया गया कि उन्होंने अपनी मर्जी से यह जमीन सरकार को दी है और उसके एवज में पर्याप्त मुआवजा प्राप्त कर लिया है। अब वे इस जमीन को लेकर किसी प्रकार का विवाद खडा नहीं करेंगे और न ही न्यायालय में जाएंगे। किसानों का आरोप हैं कि यह हलफनामा पूर्व मंत्री ने उन्हें बरगलाकर लिया था, जबकि प्रदेश में ऐसा हलफनामा कहीं नहीं लिया गया था। इसी के विरोध में किसानों ने पूर्व मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए।