तो 'मोदी लहर' का असली टेस्ट अभी बाकी है?
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महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणामों ने राजधानी दिल्ली में राजनीतिक संकट दूर होने के आसार बना दिए हैं। दोनों राज्यों में भाजपा के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि पार्टी जल्द ही दिल्ली में चुनाव कराने के लिए राजी हो जाएगी।
राजधानी में चुनाव होने की स्थिति में मुकाबला भाजपा बनाम आप ही माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस लगातार अपना जनाधार खो रही है और दिल्ली में भी उनकी पकड़ पहले से अधिक कमजोर हो चुकी है।
हालांकि लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस इसके बावजूद दिल्ली में चुनाव कराने की मांग कर रही है। आम आदमी पार्टी के बाद अब कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने भी भाजपा को चुनाव कराने का चैलेंज दिया है।
चलेगा केजरी का जादू या फिर मोदी लहर?
मोदी लहर के सहारे लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा को अब दो राज्यों में मिली बड़ी जीत ने और भी मजबूत कर दिया है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह तो बढ़ा ही है साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर भी उनका भरोसा मजबूत हुआ है।
नतीजों को देखते हुए भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने दिल्ली में चुनाव कराने के संकेत दिए हैं। बिधूड़ी ने कहा कि अगर उपराज्यपाल की ओर से अब उन्हें सरकार बनाने का न्योता मिलता भी है तो वे उसे अस्वीकार कर देंगे और दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने की पहल करेंगे। देश में मोदी लहर बरकार है और इसका लाभ दिल्ली के चुनावों में भी मिलेगा।
उधर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पहले ही जोड़तोड़ की सरकार बनाने से मना कर चुका है। क्योंकि इससे मतदाताओं के बीच गलत संदेश जाएगा।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि केजरीवाल का गढ़ मानी जाने वाले दिल्ली में मोदी लहर का असर होगा? अब तक कराए गए तमाम सर्वे में यही बात सामने आई है कि राष्ट्रीय स्तर पर तो लोग मोदी और भाजपा सरकार के दीवाने हैं लेकिन दिल्ली में वे केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं।
इसलिए अगर दिल्ली में चुनाव होते हैं तो मुकाबला केजरीवाल बनाम मोदी लहर हो सकता है।
कांग्रेस और केजरीवाल दोनों ने किया चैलेंज
दिल्ली कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने चुनाव परिणाम आने के बाद कहा कि भाजपा अपने स्वार्थ के चलते दिल्ली के राजनीतिक हालात पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। यदि भाजपा को मोदी लहर पर इतना ही भरोसा है तो उन्हें अब तक दिल्ली विधानसभा भंग कर चुनाव की घोषणा करनी चाहिए। कांग्रेस दिल्ली में चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है।
कांगेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के प्रभारी शकील अहमद ने भी दिल्ली में चुनाव कराने की मांग की है। दोनों राज्यों में पार्टी की हार के बाद उन्होंने कहा कि जनता के फैसले का सम्मान करते हैं और अपनी हार स्वीकार करते हैं लेकिन दिल्ली के चुनावों में इन परिणामों का असर बिल्कुल नहीं पड़ने वाला। भाजपा को जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट करके भाजपा से पूछा है कि क्या अब उनके पास चुनाव में जाने का साहस है? बता दें कि केजरीवाल ने फरवरी 2014 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद तुरंत विधानसभा भंग कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी।
जब सब हैं तैयार तो फिर किसका इंतजार?
दिल्ली में छाए राजनीतिक संकट के लिए तीनों प्रमुख पार्टियां एक दूसरे को दोषी ठहराती रही हैं। आम आदमी पार्टी ने पहले कांग्रेस को कोसते हुए सरकार से इस्तीफा दे दिया तो वहीं बाद में जोड़तोड़ को लेकर भी खूब बवाल मचा।
लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद उम्मीद की जा रही थी कि दिल्ली में भी पार्टी सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बीच भाजपा, आप और कांग्रेस ने भी एक दूसरे पर जोड़तोड़ के आरोप लगाए और करोड़ों रुपए के ऑफर देने की भी बात सामने आई।
अब भाजपा के कई नेता ये स्पष्ट कह चुके हैं कि दिल्ली में चुनाव कराना ही उचित होगा, जोड़तोड़ की सरकार नहीं बनेगी। जीत से उत्साहित भाजपा ने दिल्ली में भी चुनाव कराने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
विधानसभा भंग करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर आम आदमी पार्टी की याचिका पर दिवाली के बाद सुनवाई होनी है। उम्मीद की जा रही है कि भाजपा इस सुनवाई में जवाब दाखिल कर राजधानी में चुनाव कराने की मांग करेगी।