विशेष बातचीत: भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से, हरियाणा जैसा हश्र होगा आप का
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कितनी तैयारी है?
हमारी तैयारी मुकम्मल है। भाजपा के पास नरेंद्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री, अमित शाह जैसे रणनीतिकार और जेपी नड्डा जैसे कार्यकारी अध्यक्ष हैं। इस बार का चुनाव केजरीवाल बनाम दिल्ली की जनता के बीच होगा। भाजपा ही नहीं दिल्ली की जनता भी केजरीवाल को हटाना चाह रही है। हम तो जनता के साथ हैं।
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पड़ोसी राज्य हरियाणा में भाजपा को एकतरफा जीत की उम्मीद थी। परिणाम वैसा नहीं आया, क्या इसका असर दिल्ली में नहीं पड़ेगा?
आपकी ही बात मान लेते हैं कि हरियाणा का असर दिल्ली में पड़ेगा। हरियाणा में हुआ क्या, हम नंबर एक रहे और आप के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
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दिल्ली में आप किससे मुकाबला देखते हैं?
दिल्ली में हमारा मुकाबला कांग्रेस से है। हरियाणा में जैसे आम आदमी पार्टी के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई, वैसे ही दिल्ली में भी होगी।
क्या मनोज तिवारी दिल्ली में भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार होंगे?
यह फैसला पार्टी लीडरशिप को लेना है। मैं दिल्ली में पार्टी का लीडर हूं। प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है पार्टी ने मुझे। प्रदेश अध्यक्ष किसी भी राज्य में पार्टी का चेहरा ही होता है।
अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में फ्री बिजली, पानी और बसों में महिलाओं के लिए सफर निशुल्क कर दिया। यह भाजपा के लिए चुनौती है इस चुनाव में?
यह चुनौती कहां है। यह तो चुनावी स्टंट है। जनता को पता नहीं है क्या कि चुनाव से पांच महीने पहले यह सब क्यों किया जा रहा है। साढ़े चार साल क्या करते रहे केजरीवाल जी। देख रहे हैं, दिल्ली का प्रदूषण कितना खतरनाक हो गया है। केजरीवाल पराली की राजनीति करने में लगे है।
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि प्रदूषण के लिए पराली अहम कारण है। जो हरियाणा में भी जलाई जा रही है।
गजब बात करते हैं केजरीवाल जी। हमारी सरकार ने तो वहां किसानों से पराली खरीदकर उसका भुगतान किया। अब केजरीवाल जी बताएं कि दिल्ली में क्या किया प्रदूषण रोकने के लिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का बुरा हाल है। घंटों बस नहीं मिलती। जितनी बसों की जरूरत है उतनी लाए नहीं। ऊपर से लोगों को परेशान करने के लिए सम-विषम लागू कर दिया। बच्चे मास्क लगाकर स्कूल जा रहे हैं। क्या ऐसी तस्वीर किसी देश की राजधानी की हो सकती है। केजरीवाल सिर्फ वोट की राजनीति करते हैं।
केंद्र सरकार ने भी तो दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने पर मुहर लगा दी। यह भी वोट की राजनीति है।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में कहा था कि सत्ता में आने पर सभी अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वालों को उनका मालिकाना हक देंगे। हमारी सरकार आई। एक साल के भीतर कर दिया। बल्कि यह जरूर है कि दिल्ली सरकार इसमें रोड़ा अटका रही थी। कह रही थी कि अभी मत करो, पहले हम 2021 में मैपिंग करेंगे।
दिल्ली नगर निगम में तो भाजपा का ही बोलबाला है। ये इलाके भी तो दिल्ली के ही हैं। स्थिति बहुत बदतर है। वहां कुछ क्यों नहीं किया।
दिल्ली सरकार ने हमारे तीनों नगर निगमों के 18 हजार करोड़ रुपये रोक रखी है। यही वजह है कि सड़कें नहीं बन पा रहीं हैं। सफाई कर्मियों का एरियर नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों का और शिक्षकों को प्लान हेड नहीं मिला। दिल्ली सरकार हर स्तर पर नगर निगमों के बजट में अड़चनें डाल रही हैं।
दिल्ली में पूर्वांचल के लोग बहुत तादाद में हैं। बड़े वोट बैंक के तौर पर देखा जाता है। सभी पार्टियां पूर्वांचली की लामबंदी में जुटी हैं। आप क्या मानते हैं।
पूर्वांचली को दिल्ली में वोट बैंक ही समझा गया पहले। कभी लीड करने का मौका ही नहीं दिया गया। लेकिन भाजपा ने मौका दिया। मुझे नेता और दिल्ली भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। अब आप ही देखिए आप के नेता अरविंद केजरीवाल हैं। दिल्ली कांग्रेस के नेता सुभाष चोपड़ा बनाए गए हैं। पूर्वांचली से तो सबने किनारे किया है।
आप में संजय सिंह हैं। गोपाल राय हैं। कांग्रेस में कीर्ति आजाद को अहम जिम्मेदारी मिली है। ऐसा नहीं है कि पूर्वांचली को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली।
आप में पूर्वांचली को जिम्मेदारी मिलती तो मुख्यमंत्री केजरीवाल नहीं होते। दिल्ली कांग्रेस में तो कीर्ति आजाद को इसलिए जोड़ा गया कि कोई यह न कहे कि इनके साथ पूर्वांचल का कौन है।