एमसीडी में प्रचंड जीत के बाद दिल्ली में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है भाजपा
तीनों नगर निगम को केंद्रीय गृहमंत्रालय के अधीन करने की तैयारी
- भाजपा ने नगर निगमों को दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र से मुक्त कराने की तैयारी शुरू की
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भाजपा नेताओं का मानना है कि दिल्ली सरकार के अधीन आने के बाद नगर निगम की स्थिति खराब हुई है। इसका सीधा प्रभाव नगर निगम के कामकाज और उसकी कार्यशैली पर पड़ा है। इसके अलावा दिल्ली सरकार से नगर निगम को मिलने राजस्व के नियमों में भी भाजपा परिवर्तन कराएगी।
दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि तीनों नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने और उसके कामकाज में सुधार लाने के लिए उनका दिल्ली सरकार से मुक्त होना बहुत जरूरी है। क्योंकि दिल्ली सरकार उन्हें न तो राजस्व दे रही है और न ही उन्हें कार्य करने दे रही है।
इस कारण उन्होंने एकीकृत नगर निगम की भांति तीनों नगर निगम को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कराने की तैयारी आरंभ कर दी है। वह जल्दी ही केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात करके वस्तुस्थिति से अवगत कराकर तीनों नगर निगम को मंत्रालय के अधीन लेने का आग्रह करेंगे।
केंद्र सरकार के अधीन होने पर ही लोगों का भला
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार से मिलने वाले ग्लोबल शेयर के नियमों में भी परिवर्तन कराया जाएगा। दरअसल, दिल्ली सरकार ने ग्लोबल शेयर को दो हिस्सों में बांट दिया है। सरकार ने चार प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर देने का प्रावधान कर रखा है, वहीं डेढ़ प्रतिशत हिस्सा रिफॉर्म फंड के तौर पर देने की व्यवस्था कर रखी है।
सरकार उन्हें रिफॉर्म फंड नहीं दे रही है। सरकार के पास कई हजार करोड़ रुपये नगर निगम के फंड के तौर पर जमा हैं। जबकि पहले ऐसा नहीं था। पहले सरकार की ओर से नगर निगम को सीधे साढ़े पांच प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था।
मनोज तिवारी का कहना है कि नगर निगम के केंद्र सरकार के अधीन आने पर ही दिल्ली वासियों का भला हो सकता है। दिल्ली में बहुशासन प्रणाली के कारण विधानसभा और नगर निगम की सत्ता कमोबेश दिल्ली के 96 प्रतिशत इलाकों में समानांतर थी।
इसके चलते दिल्ली सरकार और नगर निगम के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती थी। इससे परेशान होकर करीब 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित ने कई बार नगर निगम को पूरी तरह दिल्ली सरकार के अधीन करने की कोशिश की।
इस मामले में उन्हें दिसंबर 2011 में कामयाबी मिली। उन्होंने नगर निगम को अपने अधीन आते ही उसकी ताकत कम करने के लिए उसे तीन हिस्सों में बांट दिया।