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सीएम दावेदार घोषित करने के मूड में नहीं भाजपा, आप ने पूछा केजरीवाल के मुकाबले कौन?
Tue, 10 Sep 2019 07:18 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 10 Sep 2019 07:18 PM IST
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arvind kejriwal
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विधानसभा चुनाव की जंग शुरू होने में भले कुछ देर है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के दावेदार पर आप व भाजपा में शह और मात का खेल शुरू हो गया है। पिछले दो विधानसभा चुनावों की तर्ज पर आप भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार का नाम लगातार पूछ रही है, जबकि अनुभवों से सबक लेते हुए पार्टी इस मामले में ‘आप’ को अंधेरे में रखना चाहती है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने साफ कहा कि पार्टी कई राज्यों में सीएम के चेहरे के बिना चुनाव लड़कर कामयाबी हासिल कर चुकी है।
पांच साल तक सत्ता में रहने के बाद आप फिर सरकार में आने के लिए जोर-आजमाइश कर रही है। सिर्फ दिल्ली में सिमटी आप इस चुनाव को अपने लिए अहम मान रही है। गुणा-भाग करने के बाद आप को विपक्ष की सबसे कमजोर कड़ी उनके मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में नजर आ रही है। उसके रणनीतिकारों का मानना है कि विपक्षी दलों, खासतौर से दिल्ली भाजपा के पास फिलहाल ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जो कद की लड़ाई में अरविंद केजरीवाल का मुकाबला कर सके।
पार्टी का मानना है कि बीते दो विधानसभा चुनाव के दौरान आप को विपक्षी दल के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के कारण बढ़त मिली थी। 2013 में केजरीवाल के सामने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं, जबकि 2015 में भाजपा ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया था। इसका फायदा आप को मिला था।
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इसी रणनीति के तहत आप सांसद संजय सिंह भाजपा सांसद विजय गोयल, प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी और नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता में से मुख्यमंत्री पद के दावेदार का नाम लगातार पूछ रहे हैं।
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पांच साल तक सत्ता में रहने के बाद आप फिर सरकार में आने के लिए जोर-आजमाइश कर रही है। सिर्फ दिल्ली में सिमटी आप इस चुनाव को अपने लिए अहम मान रही है। गुणा-भाग करने के बाद आप को विपक्ष की सबसे कमजोर कड़ी उनके मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में नजर आ रही है। उसके रणनीतिकारों का मानना है कि विपक्षी दलों, खासतौर से दिल्ली भाजपा के पास फिलहाल ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जो कद की लड़ाई में अरविंद केजरीवाल का मुकाबला कर सके।
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पार्टी का मानना है कि बीते दो विधानसभा चुनाव के दौरान आप को विपक्षी दल के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के कारण बढ़त मिली थी। 2013 में केजरीवाल के सामने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं, जबकि 2015 में भाजपा ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया था। इसका फायदा आप को मिला था।
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इसी रणनीति के तहत आप सांसद संजय सिंह भाजपा सांसद विजय गोयल, प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी और नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता में से मुख्यमंत्री पद के दावेदार का नाम लगातार पूछ रहे हैं।
आप विधायकों को इलाके में ही घेरने की रणनीति
मुख्यमंत्री के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बजाय भाजपा आप विधायकों को उनके ही इलाके में घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने मंगलवार को कहा कि भाजपा बगैर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के चुनाव लड़कर कामयाब रही है। उन्होंने कहा कि बीते पांच साल से सत्ता पर काबिज आप के पास उपलब्धि के नाम पर बताने को कुछ नहीं है।
ऐसे में उसके नेता सामने वाली पार्टी के भीतर अंतर्कलह कराने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के मुख्यमंत्री दावेदार का नाम पूछने की जगह आप को अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड बताना चाहिए।
संजय सिंह ने दूसरे राज्यों को लेकर घेरा
मनोज तिवारी की दलील पर संजय सिंह का कहना है कि इसका मतलब हुआ कि भाजपा के पास अरविंद केजरीवाल के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा नहीं है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट कार्ड की बात करने वाले मनोज तिवारी को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड व महाराष्ट्र की सरकारों का भी रिपोर्ट कार्ड पूछना चाहिए, जहां प्रदेश से लेकर निगम तक में भाजपा की सरकार है।
ऐसे में उसके नेता सामने वाली पार्टी के भीतर अंतर्कलह कराने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के मुख्यमंत्री दावेदार का नाम पूछने की जगह आप को अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड बताना चाहिए।
संजय सिंह ने दूसरे राज्यों को लेकर घेरा
मनोज तिवारी की दलील पर संजय सिंह का कहना है कि इसका मतलब हुआ कि भाजपा के पास अरविंद केजरीवाल के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा नहीं है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट कार्ड की बात करने वाले मनोज तिवारी को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड व महाराष्ट्र की सरकारों का भी रिपोर्ट कार्ड पूछना चाहिए, जहां प्रदेश से लेकर निगम तक में भाजपा की सरकार है।