कांग्रेस के वोट बैंक पर भारी पड़े बीजेपी के अच्छे दिन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली में कांग्रेस के वोट बैंक पर भाजपा के अच्छे दिन भारी पड़े। पिछड़ों के अलावा अल्पसंख्यकों ने कांग्रेस का हाथ छोड़ा तो पार्टी सत्तर विधानसभा सीटों पर तीसरे नंबर पर पहुंच गई।
कांग्रेस के जिन दिग्गजों ने विस चुनाव में किला बचाया था, उसमें भी मोदी की लहर और झाड़ू ने सफाई कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह बड़े अंतर से जीते थे, लेकिन इस बार भाजपा के मुकाबले आधे से भी कम महज 24 हजार वोट कांग्रेस प्रत्याशी संदीप दीक्षित को मिले।
इतना ही नहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता समेत सभी आठ विधायक बुरी तरह धराशायी हो गए।
वोट AAP को मिले, जीत गई बीजेपी
बिजवासन, संगम विहार और तुगलकाबाद में कांग्रेस दस हजार वोट का आंकड़ा भी नहीं छू सकी।
जबकि बल्ली मारान, मटिया महल, सदर बाजार, करावल नगर, बाबरपुर, सीलमपुर, सीमापुरी, तिमारपुर, मुस्तफाबाद, ओखला, गांधी नगर, बादली, विकासपुरी, उत्तम नगर, मटियाला, करोल बाग, पटेल नगर और राजेंद्र नगर को छोड़कर बाकी किसी भी विधानसभा में 20 हजार वोट का आंकड़ा पार्टी पार नहीं कर सकी।
कांग्रेस के वोट बैंक में आम आदमी पार्टी ने सेंध लगाई तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला। 'आप' के वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई और पुनर्वास कॉलोनी, अनधिकृत कॉलोनी व निम्न तबके के अलावा अल्पसंख्यकों ने झाड़ू का बटन दबाया।
'आम आदमी ने छोड़ दिया AAP का साथ'
सुल्तानपुर माजरा जैसी सीट पर 'आप' प्रत्याशी को कांग्रेस के मुकाबले साढ़े चार गुना और भाजपा को दोगुना वोट मिले। विस चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी जयकिशन ने जीत दर्ज की थी।
आप नेता प्रो. आनंद कुमार कहते हैं कि 'आप' से मध्यम व उच्च तबके के मतदाताओं का मोहभंग हुआ जिससे कोई सीट नहीं मिली। हालांकि, प्रदर्शन अच्छा रहा है। हम सात सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे। इतना ही नहीं हमें अल्पसंख्यकों के वोट मिले।
लोस चुनाव परिणाम में भाजपा को किराड़ी विधानसभा में करारी हार मिली जबकि विस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनिल झा रिकार्ड मतों से जीते थे। यहां आप को सबसे अधिक वोट मिले हैं।
मुस्लिमों के गढ़ में भी खिला कमल
दिल्ली के मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के साथ नहीं जाने से जुड़ी धारणा को गलत साबित कर दिया है। लोकसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न के मुताबिक दिल्ली के सबसे अधिक मुस्लिम मतदाताओं वाली दो विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कमल खिल गया है।
बल्लीमरान और मुस्तफाबाद सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं। विधानसभा की इन दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है।
मालूम हो कि दिल्ली की सात संसदीय सीटों में पांच विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिसमें 50 से लेकर 90 फीसदी तक मुस्लिम मतदाता हैं।
काम कर गई मोदी लहर
सीलमपुर, मुस्तफाबाद, ओखला, बल्लीमरान और मटियामहल विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है। इसमें मटियामहल पर निर्दलीय और बाकी चार पर कांग्रेस के विधायक हैं।
लोकसभा में हुई वोटिंग को पैमाना मानें तो पर इन पांचों सीटों पर सिर्फ मटियामहल को छोड़ दें तो कांग्रेस तीसरे नंबर पर चली गई है।
भाजपा जो इन सीटों पर वोट के मामले में हमेशा तीसरे और चौथे नंबर पर रही है वह बढ़त लेते हुए दो सीटों पर सबसे आगे रही। जबकि दो सीटों पर दूसरे नंबर पर रही।