बीजेपी के लिए इज्जत का सवाल है यह सीट
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दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में अब जाट व गुर्जर जाति का बोलबाला हो गया है। परिसीमन से पहले इस क्षेत्र में पंजाबी व सिख समुदाय का दबदबा था।
वर्ष 1967 में अस्तित्व में आए इस लोकसभा क्षेत्र में परिसीमन से पहले तक अधिकतर चुनाव में भाजपा का कब्जा रहा। यहां से हर बार पंजाबी समुदाय के नेता ने बाजी मारी।
इस क्षेत्र के 12 लोकसभा चुनाव में अभी तक कांग्रेस केवल चार बार ही जीत हासिल कर सकी है, जबकि वर्ष 1989 से लेकर 2004 तक लगातार छह बार भाजपा ने जीत हासिल की।
2004 में बचाई थी बीजेपी की लाज
वर्ष 1967 में हुए पहले चुनाव में भारतीय जनसंघ (अब भाजपा) जीती थी। इसके 10 वर्ष बाद 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में भारतीय लोकदल ने जीत हासिल की थी।
2004 में भाजपा केवल इसी सीट पर जीती थी, उसके अन्य छह सीटों पर उम्मीदवार हार गए थे। 2009 के चुनाव के साथ ही इस क्षेत्र से समस्त दलों ने पंजाबी समुदाय के बजाय जाट एवं गुर्जर जाति को आगे कर दिया। इस चुनाव में जाट नेता ने जीत हासिल की।
करीब तीन माह पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में सीटों के मामले में भाजपा काफी आगे रही, लेकिन वोट प्राप्त करने में उसमें और आम आदमी पार्टी के बीच मात्र 50 हजार मतों का अंतर है।
कांग्रेस-आप भी नहीं खोल पाईं खाता
इस सीट पर कांग्रेस सांसद होने के बावजूद उसका खाता नहीं खुल सका था। विधानसभा चुनाव में उसने ग्रामीण इलाकों में बाजी मारी थी, जबकि आप का इन क्षेत्रों में असफल रही।
दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में भी राजधानी के अन्य क्षेत्रों की भांति पेयजल की सबसे बड़ी समस्या है। यहां के अधिकतर गांवों व कॉलोनियों में दिल्ली जल बोर्ड नियमित तौर पर पेयजल आपूर्ति नहीं कर सका है।
फिलहाल साफ-सफाई, सड़कें और जाम इस सीट की प्रमुख चुनावी समस्याएं और मुद्दे हैं।