बिसाहडा कांड में चार्जशीट दायर, BJP नेता के बेटे पर गंभीर आरोप
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जारचा पुलिस ने बिसाहड़ा गांव में इकलाख की हत्या के मामले में 19 आरोपियों के खिलाफ बुधवार को न्यायालय में चार्जशीट दायर कर दी। इसमें बीफ का कहीं भी जिक्र नहीं है।
चार्जशीट में कहा गया है कि मंदिर से घोषणा कर लोगों को जमा करके हत्याकांड को अंजाम दिया गया। वहीं, जारचा पुलिस ने बुधवार को मामले में आरोपी भीमा पु़त्र छुट्टन और विनीत पुत्र पप्पू को गांव से ही गिरफ्तार कर लिया।
बाकी दो आरोपी युवकों की गिरफ्तारी अभी नहीं हो पाई है। पुलिस क्षेत्राधिकारी अनुराग सिंह का कहना है कि फरार युवकों की तलाश में पुलिस टीमें लगी हैं।
मांस मिलने की घोषणा मंदिर से विशाल और उसके साथी सौरभ ने की
पुलिस के अनुसार, चार्जशीट में कहा गया है कि 28 सितंबर को जारचा कोतवाली क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में प्रतिबंधित पशु को मारने और इकलाख के घर उसका मांस मिलने की घोषणा मंदिर से विशाल और उसके साथी सौरभ ने की।
लोगों को बड़े ट्रांसफार्मर के पास बुलाया गया। इसके बाद इकलाख के घर के बाहर सैकड़ों की संख्या में भीड़ जमा हो गई। इकलाख की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और दानिश पर भी जानलेवा हमला किया गया।
परिवार के अन्य सदस्यों से भी मारपीट की गई। पुलिस ने दानिश को नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया। घटना में इकलाख के परिजनों ने दस को नामजद और करीब 240 अज्ञात के खिलाफ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है पुलिस
पुलिस ने एक सप्ताह के अंदर दस नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मामले में सभी की भूमिका को स्पष्ट किया। इसके तहत विशाल और सौरभ ने मंदिर से घोषणा कराई थी।
घर पर हमला करने और मारपीट करने में विवेक, सचिन, श्रीओम, हरी ओम, सौरभ, गौरव, शिवम्, रूपेंद समेत 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दो आरोपी अभी फरार हैं। आरोपियों में दो नाबालिग हैं जिन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।
विशाल (बीजेपी नेता का बेटा), विवेक, संदीप, श्रीओम, हरीओम, सौरभ, गौरव, शिवम, रूपेंद्र, एक नाबालिग शामिल है। बयानों के बाद शामिल आरोपी अरुण पुत्र राजपाल, रोबिन पुत्र रणवीर, हरीओम पुत्र रूप सिंह, विनय (होमगार्ड) पुत्र महेश और एक नाबालिग, भीमा पुत्र छुट्टन और विनीत पुत्र पप्पू समेत दो अन्य शामिल हैं।
ग्रामीणों का आरोप कि एकतरफा कार्रवाई हुई
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। मंदिर से घोषणा के बाद उग्र भीड़ ने इकलाख के घर पर हमला किया, लेकिन पुलिस ने केवल 19 लोगों को ही धारा 302 में आरोपी बनाया है जबकि घटना लोगों के उग्र होने से पिटाई के चलते हुए है।
सरकार और पुलिस ने जांच के नाम पर खानापूर्ति करके निर्दोषों को आरोपी बनाया है। जांच गंभीरता से नहीं की गई है। इकलाख के परिवार के अलावा उसके भाई समेत अन्य लोगों को भी सरकार ने सुविधाएं दी हैं।
दूसरी और मामले के दूसरे दिन पुलिस की गोली लगने से घायल हुए राहुल यादव के परिवार को केवल आर्थिक सहायता के नाम पर खानापूर्ति की गई है। अब मामले को लेकर ग्रामीण आगे की रणनीति बनाने के लिए पंचायत करने की तैयारी में है। पंचायत को गोपनीय रूप से की जाएगी।