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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Biogas will be produced from cow dung, helping to curb pollution in the Yamuna.

Delhi NCR News: गोबर से बनेगी बायोगैस, यमुना प्रदूषण पर लगेगी लगाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 07:32 PM IST
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गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से संयंत्र शुरू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया उद्घाटन
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200 टन गोबर का रोजाना होगा प्रसंस्करण, पशुपालकों को भी मिलेगा आर्थिक लाभ

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में डेयरियों से निकलने वाले गोबर के उचित निस्तारण और यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस संयंत्र शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले इस संयंत्र का उद्घाटन किया। यहां गोबर से बायोगैस और प्राकृतिक खाद तैयार की जाएगी।
गोयला डेयरी क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 200 मीट्रिक टन गोबर निकलता है। निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने से इसका बड़ा हिस्सा नालियों के जरिये यमुना तक पहुंचता था, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा था। नए संयंत्र में गोबर का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा। इससे रोजाना लगभग 14 हजार घन मीटर कच्ची बायोगैस और 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) तैयार होने का अनुमान है। उत्पादित गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को की जाएगी। वहीं, प्रसंस्करण के बाद बचने वाली स्लरी का उपयोग प्राकृतिक खाद के रूप में होगा।
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गोबर बेचकर कमाई कर सकेंगे पशुपालक
परियोजना के तहत एजेंसी पशुपालकों से 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदेगी। इससे डेयरी संचालकों को अतिरिक्त आय होगी और गोबर को नालियों में बहाने की समस्या भी कम होगी। मुख्यमंत्री ने पशुपालकों से निर्धारित व्यवस्था के तहत गोबर देने की अपील की। संयंत्र के प्रभावी संचालन के लिए नियमित संग्रहण जरूरी होगा।
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डेढ़ साल में तीन संयंत्र शुरू
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले डेढ़ साल में तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए हैं, जबकि छह अन्य संयंत्रों पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि नंगली सकरावती संयंत्र में एक साल के दौरान 55 हजार टन गोबर का इस्तेमाल हुआ और किसानों को साढ़े तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। डेयरी कॉलोनियों में नालियों और जल निकासी की व्यवस्था सुधारने के लिए 50 करोड़ रुपये का फंड भी उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए प्रदूषण के स्रोतों पर रोक लगाना जरूरी है। कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने भी संयंत्र को पर्यावरण संरक्षण और गोबर के उपयोगी संसाधन में रूपांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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