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फिर से 200 साल पुरानी दिखेगी यमुना

Wed, 20 Aug 2014 09:27 AM IST
संतोष कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
संतोष कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 20 Aug 2014 09:27 AM IST
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Biodiversity park will be built beside yamuna bank

दिल्ली में यमुना के किनारे घना जंगल हो, पक्षियों का कलरव गूंजे, खादर में घूमने वाले जानवर भी दिख जाएं तो हैरान होने की जरूरत नहीं है।

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नदी के किनारे का 200 साल पुराना लुक लौटाने की कवायद शुरू हो गई है। पांच वर्षों में वजीराबाद बैराज से ऊपर का हिस्सा बदला-बदला सा दिखेगा।

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योजना दरअसल यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क से जुड़ी है। इसके तहत यमुनोत्री से इलाहाबाद तक नदी के दोनों किनारों का सर्वे किया गया था। नदी के किनारे अलग-अलग ऊंचाई पर जीवित रह सकने वाले पौधों और जीव-जंतुओं के रिहायश का आंकड़ा भी जुटाया गया।

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वजीराबाद से बुराड़ी के बीच पार्क के पहले फेज का काम पूरा हो गया है। इसमें दो नम भूमि विकसित की गई और करीब 157 एकड़ जमीन को हरा-भरा किया गया। फिलहाल 300 एकड़ जमीन पर पार्क के दूसरे फेज का काम चल रहा है।


वहीं, नदी के किनारे अलग-अलग ऊंचाई पर पौधरोपण का काम बीते 15 अगस्त से शुरू हुआ। इसमें दिल्ली की आबोहवा में पल सकने वाले पौधे लगाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि नदी तल से 205-210 मीटर ऊंचाई को चार हिस्सों में बांटा गया है। पार्क के इंचार्ज डॉ. फैयाज खुदसर बताते हैं कि इसका असर दिख रहा है।


पौधों की प्रजातियां

 घास की अलग-अलग प्रजातियां, खस, पासपेलम, पोलीगोलम, मोधा, नेप्चुनिचया।

 सरकंडा, पीलू, झाऊ, कठजमुनी, निर्गुंडी, देशी खजूर, देशी बबूल, खैर, कठजामुन, अर्जुन, लसोडा, खीरनी

पक्षी और जानवर सारस, हंस, लाल मुनिया समेत पक्षियों की करीब दो सौ प्रजातियां, सांप की सात प्रजाति, मछलियों की 16 प्रजाति, जंगली सूअर, सियार, नील गाय, खरगोश।


प्राकृतिक तरीके से हो सकती है यमुना की सफाई

विशेषज्ञ मानते हैं कि पल्ला से बुराड़ी के बीच यमुना के किनारे को अगर विकसित किया जाए तो काफी हद तक प्राकृतिक तरीके से यमुना की सफाई हो सकती है। इस बीच यमुना की लंबाई करीब तीस किलोमीटर है। ऐसे में करीब चार सौ हेक्टेयर जमीन का वनीकरण हो सकता है। इससे न सिर्फ कटान कम होगा, बल्कि नम भूमि के जरिए पानी की खेती भी हो सकती है।

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