बड़ा सवाल: पुलिस की मौजूदगी में कैसे हुआ 'शूटआउट एट कोर्ट'
कड़कड़डूमा कोर्ट में जिस तरह वारदात को अंजाम दिया गया, इससे सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि घटना को अंजाम देने वाले पेशेवर नहीं बल्कि नाबालिग हैं।
दो हथियार लेकर कोर्ट बिल्डिंग में घुसने के बाद भी ये कहीं पकड़े नहीं गए, यह पुलिस के लिए सबसे बड़ी चूक है। कोर्ट में फायरिंग के लिए नाबालिग आरोपियों ने रिवॉल्वर व एक कट्टे का इस्तेमाल किया।
कोर्ट में सुरक्षा के तमाम तामझाम होने के बाद भी हथियार कोर्ट में पहुंचे और हमलावर इन्हें लेकर पांचवीं मंजिल पर बने कोर्ट रूम में पहुंच गए। पुलिस की मौजूदगी में यह कैसे हुआ, इसके जवाब दिल्ली पुलिस को ढूंढने होंगे।
कड़कड़डूमा कोर्ट की सुरक्षा अस्थायी चौकी के भरोसे
कड़कड़डूमा कोर्ट की सुरक्षा यहां स्थित अस्थायी चौकी के भरोसे है। यहां पर एक इंस्पेक्टर व चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर की तैनाती है। चौकी में पुलिस के 88 जवान तैनात हैं।
इनमें से चार पुलिसकर्मी ड्यूटी पर नहीं थे। जिला अदालत में 80 कोर्ट हैं, जिनमें फौजदारी, दीवानी, लेबर, ट्रैफिक व अन्य मामलों की सुनवाई होती है।
वकीलों के मुताबिक यहां पर 80 जज और करीब 500 से ज्यादा स्टाफ हैं। यहां पर रोजाना करीब आठ से दस हजार मामलों की सुनवाई होती है, जिसके लिए यहां पर रोजाना करीब बीस हजार लोग आते हैं।
कोर्ट में प्रवेश के लिए छह गेट हैं
कोर्ट में प्रवेश के लिए छह गेट हैं। इनमें से कई गेट से आम लोगों व वकीलों का प्रवेश कोर्ट परिसर में होता है। कोर्ट बिल्डिंग में आम लोगों व वकीलों के जाने के लिए केवल दो रास्ते हैं।
इन पर स्कैनर व मेटल डिटेक्टर लगे हैं। कोर्ट के प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर काफी समय से खराब हैं या इन्हें ज्यादातर समय बंद रखा जाता है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की निगरानी है।
इसके बाद भी आए दिन यहां पर चोरी व वकीलों से मारपीट जैसे अपराध हो जाते हैं। कोर्ट परिसर में प्रवेश के लिए दो प्रवेश द्वार पर हाईकोर्ट की तर्ज पर सिक्योरिटी चेक रूम बनाए गए हैं, लेकिन यह शुरू नहीं हो पाया। इनमें लाखों रुपये के सुरक्षा उपकरण धूल फांक रहे हैं।
इससे पहले कोर्ट में हुईं ये घटनाएं
इस संबंध में बार पदाधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक कोर्ट की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए हैं। बार अध्यक्ष महेश शर्मा के मुताबिक जिला अदालत में हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर स्थायी चौकी बनाने की फाइल 1993 से केंद्र सरकार के पास लंबित है।
इससे पहले की घटनाएं
कड़कड़डूमा अदालत में कुछ साल पहले एक शख्स से अपनी पत्नी की गर्दन पर हंसिये से हमला कर दिया था।
सिख दंगा मामले की सुनवाई के दौरान एक युवक ने कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार पर हमले की कोशिश की थी।
रोहिणी जिला अदालत में पुलिस की मौजूदगी में एक शख्स ने चलाई थी गोली।
ओमप्रकाश चौटाला को सजा सुनाए जाने के समय समर्थकों ने किया था जमकर हंगामा, पेट्रोल बम फेंके जाने की बात आई थी सामने।
तीस हजारी कोर्ट परिसर में हो चुकी है कई बार गोलीबारी
पटियाला हाउस कोर्ट में भी हो चुकी है गोलीबारी
हाईकोर्ट के बाहर सितंबर 2011 में धमाके में गई थी कई लोगों की जान