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सीएम योगी की सुरक्षा में भारी चूकः पीएसओ की बिगड़ी तबीयत, फ्लीट में नहीं मिले डॉक्टर
Wed, 05 Feb 2020 12:48 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 05 Feb 2020 12:48 PM IST
सार
- जिला अस्पताल से भेजी गई टीम में थे सिर्फ आई सर्जन और पैथालॉजिस्ट
-लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से एम्स ले जाकर कराया गया भर्ती
- लापरवाही सामने आने पर प्रमुख सचिव ने डीएम और सीएमओ से मांगा स्पष्टीकरण
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- फोटो : amarujala
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विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे के दौरान यूपी के स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सोमवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए जनसभा करने गए मुख्यमंत्री योगी के एक पीएसओ की अचानक तबीयत बिगड़ गई।
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इस दौरान उनकी फ्लीट में मौजूद चिकित्सक पीएसओ को इलाज नहीं दे पाए। बाद में पीएसओ को एम्स में भर्ती कराया गया। पता चला कि फ्लीट में चल रही एंबुलेंस में सिर्फ आई सर्जन और पैथालॉजिस्ट ही तैनात थे। जबकि नियमत: फ्लीट के साथ दो फिजीशियन होना अनिवार्य है।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडेय और सीएमओ डा. एनके गुप्ता को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पूछा है कि डॉक्टरों की टीम में कार्डियोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिस्ट क्यों शामिल नहीं थे।
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डॉक्टरों की ये टीम एमएमजी अस्पताल से भेजी गई थी। अब मामले के तूल पकड़ने पर एमएमजी अस्पताल प्रबंधन ने ड्यूटी में गए एक चिकित्सक से ही जवाब तलब किया है कि पूरे मामले की जानकारी प्रबंधन को क्यों नहीं दी गई।
पहले भी बरती थी लापरवाही, नपे थे सीएमएस
दिल्ली में विधानसभा चुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली में हैं। सोमवार को वह चुनावी रैली को संबोधित करने जा रहे थे। इस दौरान उनकी फ्लीट में शामिल पीएसओ की अचानक तबीयत खराब हो गई।
मौके पर मौजूद चिकित्सकों को बुलाया गया तो पता चला कि गाजियाबाद जिला एमएमजी अस्पताल से आई टीम में न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं न ही एनेस्थेटिस्ट। मुख्यमंत्री की फ्लीट में स्वास्थ्य विभाग द्वारा शामिल चिकित्सकों के पैनल में आई सर्जन और पैथालॉजिस्ट की ड्यूटी लगा कर इतिश्री कर ली गई थी।
नियमानुसार वीआईपी ड्यूटी में एक हृदय रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन और एक एनेस्थेटिस्ट सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के साथ जाते हैं।
पीएसओ की तबीयत मामूली रूप से खराब हुई थी, उन्हें तुरंत लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से एम्स में भर्ती कराया गया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। शासन से निर्देश मिले हैं कि फ्लीट के साथ दो फिजीशियन अनिवार्य रूप से भेजे जाएं।- डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
पहले भी बरती थी लापरवाही, नपे थे सीएमएस
करीब डेढ़ वर्ष पहले भी सीएम के दिल्ली आगमन पर कार्यक्रम आने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग ने सीएम की फ्लीट में चिकित्सकों की टीम को नहीं भेजा गया था। अधिकारियों के फोन के बाद टीम को फ्लीट में भेजा गया था। इसके बाद शासन से नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में तत्कालीन सीएमएस डा. जेके त्यागी पर गाज गिरी थी। उनका ट्रांसफर हो गया था। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी में लगने वाली एंबुलेंस की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
मौके पर मौजूद चिकित्सकों को बुलाया गया तो पता चला कि गाजियाबाद जिला एमएमजी अस्पताल से आई टीम में न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं न ही एनेस्थेटिस्ट। मुख्यमंत्री की फ्लीट में स्वास्थ्य विभाग द्वारा शामिल चिकित्सकों के पैनल में आई सर्जन और पैथालॉजिस्ट की ड्यूटी लगा कर इतिश्री कर ली गई थी।
नियमानुसार वीआईपी ड्यूटी में एक हृदय रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन और एक एनेस्थेटिस्ट सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के साथ जाते हैं।
पीएसओ की तबीयत मामूली रूप से खराब हुई थी, उन्हें तुरंत लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से एम्स में भर्ती कराया गया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। शासन से निर्देश मिले हैं कि फ्लीट के साथ दो फिजीशियन अनिवार्य रूप से भेजे जाएं।- डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
पहले भी बरती थी लापरवाही, नपे थे सीएमएस
करीब डेढ़ वर्ष पहले भी सीएम के दिल्ली आगमन पर कार्यक्रम आने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग ने सीएम की फ्लीट में चिकित्सकों की टीम को नहीं भेजा गया था। अधिकारियों के फोन के बाद टीम को फ्लीट में भेजा गया था। इसके बाद शासन से नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में तत्कालीन सीएमएस डा. जेके त्यागी पर गाज गिरी थी। उनका ट्रांसफर हो गया था। इसके अलावा वीआईपी ड्यूटी में लगने वाली एंबुलेंस की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।