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Delhi: आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर हैं दिल्ली के बड़े अस्पताल, कम शुल्क और देर से भुगतान बड़ी वजह

Thu, 05 Jun 2025 10:11 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Thu, 05 Jun 2025 10:11 PM IST
सार

दिल्ली के निजी अस्पताल का कहना है कि दूसरे राज्यों का अनुभव है कि जिन अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज किया। उन्हें एक साल से इलाज का भुगतान नहीं हुआ। 

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Big hospitals of Delhi out of ambit of Ayushman Yojana low fees and late payment major reasons
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लागू हुए दो माह का समय पूरा हो गया। लेकिन अभी तक इस योजना के दायरे में दिल्ली के बड़े अस्पताल शामिल नहीं हुए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 60 अस्पताल इस योजना के तहत सुविधा दे रहे हैं। इनमें ज्यादातर छोटे व मध्यम स्तर के अस्पताल या नर्सिंग होम शामिल हैं।

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न समय पर भुगतान, न पर्याप्त खर्च मिलना योजना के लिए बड़ी समस्या
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में एक हजार से अधिक निजी अस्पताल व नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर अस्पताल व नर्सिंग होम योजना में शामिल होने से बच रहे हैं। निजी अस्पतालों का दावा है कि योजना के तहत इलाज के बदले किए जा रहे भुगतान का शुल्क काफी कम है। इसके अलावा शुल्क का भुगतान लंबे समय तक नहीं हो पा रहा। समय पर भुगतान न होना और पर्याप्त खर्च न देना इस योजना के लिए बड़ी समस्या बन रहा है। इस योजना के तहत सर्जरी सहित अन्य के लिए जो शुल्क तय किया गया है। उससे मध्यम स्तर के अस्पताल का खर्च नहीं निकल पाता। ऐसे में कोई भी अस्पताल नुकसान के साथ योजना में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।

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निजी अस्पतालों से आठ हजार बिस्तर घटा दिए गए
हालांकि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह का दावा है कि इस योजना के तहत दिल्ली के फाइव स्टार अस्पतालों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी। नेशनल मेडिकल फोरम और दिल्ली अस्पताल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि यह योजना काफी अच्छी है, लेकिन इसके शुल्क और भुगतान को लेकर सरकार को विचार करना चाहिए। निजी अस्पताल इस योजना में शामिल होने के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार को निजी अस्पताल का सहयोग करना चाहिए। नियमों में सुधार करना चाहिए। उनका दावा है कि सरकारी तंत्र ने नियमों का बंधन लगाकर दिल्ली के निजी अस्पतालों से आठ हजार बिस्तर घटा दिए गए हैं। जबकि योजना को प्रभावी बनाने के लिए बिस्तर बढ़ाने की जरूरत है। दिल्ली की जनसंख्या को देखते हुए निजी और सरकारी अस्पतालों में एक लाख बिस्तर की जरूरत है।

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ओपीडी की सुविधा नहीं आयुष्मान योजना में 
आयुष्मान योजना में ओपीडी व बीमारी से पहले के इलाज की सुविधा नहीं है। इस योजना में शामिल होने से पहले मरीज को बीमारी की पहचान करना जरूरी है। पहचान होने के बाद निजी अस्पताल को आयुष्मान के पोर्टल पर आवेदन करना होगा, यदि उक्त बीमारी योजना में कवर होगी, तो मरीज को अस्पताल में इलाज की सुविधा मिल पाएगी। निजी अस्पतालों का कहना है कि अक्सर मरीज आयुष्मान कार्ड लेकर ओपीडी में आ जाते हैं। ओपीडी में चलने वाले इलाज के दौरान कार्ड से जांच करने की मांग करते हैं, जबकि योजना में भर्ती होने के बाद ही सुविधा दी जा सकती है। भर्ती से पहले बीमारी की पहचान करना ही जटिल काम है। कैंसर सहित दूसरी गंभीर मरीज की पहचान के लिए मरीज को निजी अस्पतालों में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। वहीं सरकारी अस्पतालों के भरोसे रहने वाले मरीजों की जांच में ही महीनों गुजर जाते हैं।

एक साल से नहीं मिला पैसा
दिल्ली के निजी अस्पताल का कहना है कि दूसरे राज्यों का अनुभव है कि जिन अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज किया। उन्हें एक साल से इलाज का भुगतान नहीं हुआ। अस्पतालों का कहना है कि इस योजना के तहत निजी अस्पतालों को काफी कम भुगतान होता है। इस पर विचार किया जाना चाहिए। निजी अस्पतालों का दावा है कि मौजूदा समय में दिल्ली के कुछ अस्पताल ही इस योजना के तहत सुविधा दे रहे हैं। इनमें कुछ आंखों के अस्पताल जबकि कुछ डायलिसिस सेंटर व अन्य हैं।

सरकार का दावा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक दिल्ली के 83 अस्पताल में योजना का लाभ मिल रहा है। इसमें 59 निजी और 24 सरकारी अस्पताल हैं। इसके अलावा देशभर के पंजीकृत अस्पताल में भी मरीज इलाज करवा सकता है। दिल्ली में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 330369 लाभार्थियों का जबकि वय वंदना योजना के तहत 154116 वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा गया है। योजना के तहत दिल्ली में अभी तक 729 लोग लाभ उठा चुके हैं।

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