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दिल्ली के इस गांव में घर से बाहर नहीं जाती बहू-बेटियां

Wed, 22 Oct 2014 04:25 PM IST
Updated Wed, 22 Oct 2014 04:25 PM IST
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bhatti village will be modern village according to addarsh gram yojana

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई सांसद आदर्श ग्राम योजना का असर सांसदों पर दिखाना शुरू हो गया है। इस योजना के तहत सभी सांसद देश के किसी एक गांव को गोद लेंगे और उसका विकास करेंगे।

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दिल्ली में इस योजना के तहत भट्टी गांव को चुना गया है। इस संबंध में आवश्यक नोटिस दिल्ली सरकार को जारी कर दी गई है। यह इलाका सांसद रमेश बिधूड़ी के संसदीय क्षेत्र में आता है। दिल्ली में भट्टी गांव इस योजना के तहत पहला मॉडल गांव बनाया जाएगा।
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सांसद आदर्श ग्राम चुने जाने के बाद दिल्ली के मुख्य सचिव डीएम सुपोलिया ने संबंधित जिलाधिकारी को गांव का समाजिक आर्थिक सर्वेक्षण करने को कहा है। सुपोलिया ने बताया कि हम चाहते है कि महात्मा गांधी के सपनों की तरह भट्टी भी एक विकसित और आत्मनिर्भर गांव बने।
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बिधूड़ी ने बताया कि उन्होंने भट्टी गांव को इसलिए चुना है क्योंकि यह दिल्ली के 54 गांवों में से सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ है। न तो यह इलाका यातायात के साधनों से जुड़ा हुआ है और न ही यहां ढंग को कोई स्कूल है। इस कठिनाई के चलते यहां के बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते।

पीने वाले पानी की भी नहीं है सुविधा

bhatti village will be modern village according to addarsh gram yojana

टीओआई के मुताबिक, इस गांव में सिर्फ एक प्राइमरी स्कूल है। इतना ही नहीं, यहां पीने के पानी के लिए अब तक पाइप लाइन भी नहीं पहुंची है। बिधूड़ी ने कहा कि भट्टी गांव के विकास के बाद वह घिटोरनी और बाहर तल गांव का भी विकास करेंगे।

दिल्ली जैसे शहर में होने के बावजूद भट्टी गांव की अधिकांश लड़कियां कभी स्कूल नहीं गई हैं। छेड़छाड़ की छोटी मोटी घटनाओं के बाद 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद मां-बाप ने लड़कियों को घर से निकलना ही बंद कर दिया। भट्टी गांव दक्षिण दिल्ली के छतरपुर के मेन रोड के अंत में हरियाणा की सीमा से लगा हुआ है। इसके दहिने ओर आसोला और बाईं ओर फतेहपुर बेरी और डेरी मंडी गांव है।

1996 में इस गांव की 11,100 बीघा जमीन को जंगली क्षेत्र घोषित कर दिया गया जिसके बाद यह पूरा इलाका वन विभाग के नियंत्रण में चला गया। भट्टी गांव तीन भाग में बंटा हुआ है भट्टी कलान, भट्टी खुर्द और संजय कॉलोनी। गांव में ज्यादतर परिवार गुर्जर हैं। ग्रामीण इलाका होने के बावजूद ज्यादातर लोगों के पास खेती के लिए कोई जमीन नहीं है। इनकी आमदनी का मुख्य जरिया मवे‌शी और दूध का व्यापार ही है।

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