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भाजपा पर केजरीवाल के वही 49 दिन भारी पड़ेंगे?

Thu, 05 Feb 2015 03:18 PM IST
Updated Thu, 05 Feb 2015 03:18 PM IST
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Bhagora? 49-day term proves to be an asset, not a liability for AAP

दिल्ली चुनाव प्रचार अपने आखिरी चरण में पहुंच गए हैं। करीब-करीब सभी ओपिनियन पोलों के नतीजे भी सामने आ चुके हैं। लेकिन असलियत में दिल्ली के मतदाता के दिमाग में चल रहा है? अंग्रेजी अखबार दि टाइम्स ऑफ इंडिया ने बुधवार को दिनभर दिल्ली की गलियों की खाक छानकर कई चौकाने वाली जानकारियां सामने लाईं।

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अखबार ने पश्चिमी और दक्षिण दिल्ली के नौ निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंच कर वहां के वोटरों से उनकी राय पूछी। इस दौरान जो सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई, वो ये कि अबकी चुनाव में अरविंद केजरीवाल और आम आमदी पार्टी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और किरण बेदी की तुलना में अधिक प्रभावी हैं।
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दरअसल, आम आदमी पार्टी ने पिछले चुनाव की तरह ही इस बार भी अपना मुद्दा पानी, बिजली, मलिन बस्तियों, नौकरियों और भ्रष्टाचार को बनाया। जबकि भाजपा और कांग्रेस दोनों लोकतंत्र बचाने का नारा लगाते रहे। हालांकि काफी बाद में भाजपा ने आप के ही पदचिन्हों पर चलते हुए आप से बेहतर सुविधाएं देने की घोषणा की।

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यहां आकर उलट गई राजनीति, भाजपा खा गई मात

Bhagora? 49-day term proves to be an asset, not a liability for AAP

दूसरी बात, भाजपा ने इस बार केजरीवाल की पिछली 49 दिनों की सरकार को निशाने पर रखा। पार्टी लगातार केजरीवाल को भगोड़ा बताने में लगी रही, जो अपनी जिम्मेदारियों से भाग जाता है। लेकिन जमीनी स्तर की सच्चाई कुछ और ही है। दिल्ली के गरीब तबके लोग केजरीवाल के उन्हीं 49 दिनों के शासन को रामराज बता रहे हैं।

वे उन 49 दिनों में मिलने वाली बिजली और पानी की चर्चा कर रहे हैं। जबकि बड़े, मझोले और छोटे सभी तरह के दुकानदारों का कहना है कि बस उन्हीं दिनों में रिश्वतखोरी बंद हुई थी। चाहे पुलिस हो या फिर एमसीडी की समितियां और एसीडी कार्यालय हों, इन्होंने बस आप सरकार के वक्त ही परेशान कराना बंद किया था। इन्हें बस आप सरकार ही सुधार सकती है।

उन 49 दिनों में हुए थे नाटकीय बदलाव

Bhagora? 49-day term proves to be an asset, not a liability for AAP

दिल्ली के लोगों को मानना है कि उन 49 दिनों में भ्रष्टचार में नाटकीय ढंग से कटौती हुई थी। उसी वक्त एमसीडी और पुलिस अधिकारियों के व्यवहार में नर्मी आई थी। इसी दौरान हौज रानी में एक संगठन चालाने वाले एक शख्स ने बड़ा रोमाचंक किस्सा सुनाया। उसने बताया कि केजरीवाल सरकार के शुरुआती दिनों में बीट के कॉन्सटेबल हफ्ता वसूलने आए।

तभी उस शख्स ने उनकी अपने सेलफोन पर एक तस्वीर खींच ली। इसके बाद वह पुलिस वाला एकदम गु्स्से में आ गया और मारपीट करने लगा। इससे वहां भगदड़ भी मच गई। लेकिन इसका असर ये हुआ कि आगे से कोई पुलिसवाला वहां नहीं आया। इसके अलावा उन 49 दिनों में डीएल बनवाने के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ती थी। ट्रैफिक पुलिस ने वसूली बंद कर दी थी। रेहड़ी वालों से हफ्ता वसूली बंद हो गई थी।

इस तरह से आप ने अपनी छोटी अवधि की सरकार में ही वसूली और छोटे स्तर पर ही सही पर भ्रष्टाचार पर भी रोक लगा दी थी। इसी वजह से आज भाजपा के सामने काफी मजबूत नजर आ रही है।

इसके अलावा कुछ और बाते भीं हैं, जो आज मतदाताओं के दिमाग में बैठी हुई हैं। उनमें प्रमुख रुप से लोकसभा चुनावों के बाद आप विधायकों, कार्याकर्ताओं का दिल्ली के गरीब इलाकों, मलीन बस्तियों के बीच जाकर काम करना है। ऐसा ही नहीं है, मलीन बस्तियों और गरीब इलाकों में ही आप का बोलबाला है। अमीर इलाकों में आप को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।

'बेदी अच्छी औरत हैं, लेकिन हम उन्हें उतना नहीं जानते'

Bhagora? 49-day term proves to be an asset, not a liability for AAP

उदारहरण के तौर पर ग्रेटर कैलाश सीट को ले लीजिए। यहां से भाजपा के राकेश गुलेरिया उम्मीदवार हैं। वे इलाके के पार्षद को अपना चाचा बता रहे हैं। इलके अलावा उनका इलाके से जुड़ाव के नाम पर कुछ नहीं है।

जबकि आप उम्मीदवार सौरभ भारद्वाज इलाके के गांवों में पानी की पाइप लाइनें बिछाने के लिए विधायक निधि से चार करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं। खुद उनके चाचा का कहना है कि अगर उनका भतीजे उनसे वोट मांगने आता है, तो ठीक वरना वे आप को वोट करेंगे। खुद उनके गांव के 75 फीसदी लोग आप के समर्थन में हैं।

कुछ इसी तरह की कहानियां हरि नगर, मायापुरी, दिल्ली कैंट और मालवीय नगर के प्रत्याशियों को लेकर भी सामने आईं। दिनभर चले इस सर्वेक्षण में करीब 45 लोगों का कहना था कि इस बार मोदी के भाषण उतने प्रभारी नहीं लगे। उन्होंने खुद ही बड़े नहीं छुए। लोगों में किरण बेदी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

यही नहीं, बेदी के नाम पर तो कई लोगों में घबराहट भी है। मालवीय नगर में एक डेयरी चलाने वाले वेदपाल चौधरी ने बताया कि उन्हें डर है कि अगर बेदी सत्ता में आती हैं, तो उनका नुकसना हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बेदी उन्हें उनकी दुकानों के बाहर सामन नहीं रखने देंगी। कुछ लोगों के कहना है कि बेदी अच्छी औरत हैं, लेकिन वे उनके बारे में उतना नहीं जानते।

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