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भागीरथ प्लेस संपत्ति विवाद: उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। चांदनी चौक के भागीरथ प्लेस स्थित एक संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे के मामले में उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले में अंतरिम राहत पर विचार करने के लिए अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की है। यह याचिका बिशंबर नाथ रस्तोगी मेमोरियल इंडस्ट्रियल स्कूल ट्रस्ट सोसाइटी द्वारा दायर की गई है।
ट्रस्ट का आरोप है कि दिल्ली के शिक्षा विभाग ने उसकी संपत्ति पर अनधिकृत और अवैध कब्जा कर रखा है। याचिका में कहा गया है कि इस परिसर से संचालित सहायता प्राप्त विद्यालय 1 अगस्त 2017 को बंद हो चुका है, इसके बावजूद विभाग ने कब्जा नहीं छोड़ा। ट्रस्ट का दावा है कि संबंधित संपत्ति पर उसका पूर्ण स्वामित्व है और विद्यालय बंद होने के बाद भी शिक्षा विभाग का वहां बने रहना कानूनन गलत है। याचिका में इसे अवैध कब्जा और अनुचित हिरासत के समान बताया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ट्रस्ट ने अदालत से मांग की है कि प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाए कि वे तुरंत संपत्ति खाली करें।
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नई दिल्ली। चांदनी चौक के भागीरथ प्लेस स्थित एक संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे के मामले में उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले में अंतरिम राहत पर विचार करने के लिए अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की है। यह याचिका बिशंबर नाथ रस्तोगी मेमोरियल इंडस्ट्रियल स्कूल ट्रस्ट सोसाइटी द्वारा दायर की गई है।
ट्रस्ट का आरोप है कि दिल्ली के शिक्षा विभाग ने उसकी संपत्ति पर अनधिकृत और अवैध कब्जा कर रखा है। याचिका में कहा गया है कि इस परिसर से संचालित सहायता प्राप्त विद्यालय 1 अगस्त 2017 को बंद हो चुका है, इसके बावजूद विभाग ने कब्जा नहीं छोड़ा। ट्रस्ट का दावा है कि संबंधित संपत्ति पर उसका पूर्ण स्वामित्व है और विद्यालय बंद होने के बाद भी शिक्षा विभाग का वहां बने रहना कानूनन गलत है। याचिका में इसे अवैध कब्जा और अनुचित हिरासत के समान बताया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ट्रस्ट ने अदालत से मांग की है कि प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाए कि वे तुरंत संपत्ति खाली करें।
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