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शहीद-ए-आजम के वंशजों को ‘नमो’ से आस

Wed, 21 May 2014 06:33 PM IST
Updated Wed, 21 May 2014 06:33 PM IST
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Bhagat singh grand children looking to narendra modi

महान क्रांतिकारी भगत सिंह को सरकारी दस्तावेजों में शहीद घोषित करवाने को लेकर शहीद-ए-आजम के वंशजों में अब उम्मीद जग गई है। आंदोलन के बावजूद कांग्रेस पार्टी की सरकार ने भगत सिंह को शहीद घोषित नहीं किया।

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शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र सिंह संधू ने इस मुद्दे को लेकर 4 सितंबर 2013 को नरेंद्र मोदी से गांधीनगर (गुजरात) स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की थी। संधू के मुताबिक मोदी ने आश्वासन दिया था कि देश के शहीदों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
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वे इस लड़ाई में शहीदों के परिवार के साथ हैं। इसके बाद इस साल 23 मार्च को बाबा रामदेव की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित शहीदी दिवस कार्यक्रम में भी संधू ने मोदी के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। बाबा रामदेव ने भी इसकी पैरवी की। तब मोदी ने संधू को सम्मानित किया।

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कागज में भी मिले शहीद का दर्जा

Bhagat singh grand children looking to narendra modi

ऐसे में अब संधू को उम्मीद है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी यह मांग प्रधानमंत्री कार्यालय पूरी कर देगा। संधू का कहना है कि वह जल्द ही इस बाबत बाबा रामदेव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। उनका कहना है कि आजादी की लड़ाई के दौरान शहीद हुए सभी क्रांतिकारियों को आधिकारिक रूप से सरकार शहीद घोषित करे क्याेंकि कागज ही है जो इतिहास चलाता है।

सिंह ने कहा कि दरअसल हमारी सरकार आज भी उसी रिकार्ड के सहारे चल रही है जो अंग्रेजों के दिए हुए हैं। आज से सौ-दो सौ साल बाद जब हमारी नई पीढ़ी शहीदों के इतिहास के बार में जानकारी लेना चाहेगी तो उन्हें सरकारी रिकार्ड में कुछ नहीं मिलेगा।

इसलिए कागजों में शहीद घोषित होना जरूरी है। इस मुद्दे को लेकर संधू बाबा रामदेव के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिल चुके हैं।

‘अमर उजाला’ ने जुलाई 2013 में ही उठाया था मुद्दा

Bhagat singh grand children looking to narendra modi

अप्रैल 2013 में ‘अमर उजाला’ द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय में डाली गई एक आरटीआई के जवाब के माध्यम से पता चला था कि अब तक भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को दस्तावेजों में शहीद घोषित नहीं किया गया है।

इसके बाद हमने जुलाई में खबर प्रकाशित की तो बवाल मच गया। अगस्त में यह मुद्दा राज्यसभा में उठा था। इसके बाद से भगत सिंह के वंशज लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं।

हमारी कोशिश है कि लोगों के दिलों पर राज करने वाले इस महान क्रांतिकारी को दस्तावेजों में भी शहीद-ए-आजम का दर्जा मिले।

भगत सिंह की किताब में 'अमर उजाला' का जिक्र

Bhagat singh grand children looking to narendra modi

भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को पाकिस्तान के लायलपुर (वर्तमान में फैसलाबाद) में हुआ था। अंग्रेजों ने उन्हें कैद करके लाहौर सेंट्रल जेल में रखा। वहीं पर 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई।

फरीदाबाद में यादवेंद्र सिंह संधू के पास शहीद भगत सिंह की वह अनमोल डायरी है, जिसे उन्होंने लाहौर जेल में लिखा था। यह डायरी अब किताब की शक्ल में लोगों के बीच है। भगत सिंह से जुड़े मुद्दे उठाने के कारण इसकी प्रस्तावना में ‘अमर उजाला’ का जिक्र किया गया है।

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