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कोरोना के गंभीर मरीजों में वायु के साथ ऑक्सीजन मिश्रण का फायदा
Thu, 29 Oct 2020 01:04 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 29 Oct 2020 01:04 PM IST
सार
- - लोकनायक अस्पताल में 70 संक्रमित मरीजों पर अध्ययन हुआ शुरू
- - एचएफएनसी मशीन के माध्यम से दी जा रही ऑक्सीजन, नाक पर लगाया जाता है कैनुला
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
विस्तार
कोरोना वायरस से ग्रस्त गंभीर मरीजों में वायु के साथ ऑक्सीजन का मिश्रण फायदा दे रहा है। हाई फ्लो नसल कैनुला (एचएफएनसी) के माध्यम से मरीजों को न सिर्फ ऑक्सीजन लेने में सहूलियत हो रही है बल्कि वह आईसीयू केयर में रहते हुए खानपान सहित रोजमर्रा का कार्य भी कर सकता है। इसे लेकर अब दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल लोकनायक (एलएनजेपी) में चिकित्सीय अध्ययन शुरू हो चुका है। जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित 70 मरीजों को अध्ययन में शामिल किया गया है। करीब एक माह तक चलने वाले इस अध्ययन के बाद परिणाम सामने आ सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार अप्रैल से सिंतबर माह के बीच अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीजों को एचएनएफसी तकनीक के जरिए ऑक्सीजन देने से काफी फायदा मिला है। इसे अब तक कोविड संक्रमण के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था। हालांकि यह तकनीक उन्हीं मरीजों को दी जाएगी जिनमें हाइपोक्सिक श्वसन विफलताएं देखने को मिल रही हों। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें मरीज की कोशिकाएं ऑक्सीजन का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। ऐसे में मरीज को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन देना होता है।
कमरे की हवा भी खींचती है मशीनडॉक्टरों के अनुसार एचएनएफसी एक मोबाइल मशीन है जिसे बेड के आसपास कहीं भी ले जाया जा सकता है। इससे निकलने वाले पाइप को मरीज की नाक पर लगे कैनुला से जोड़ा जाता है। नाक पर कैनुला लगने की वजह से मरीज सामान्य की तरह मुंह से खाना ले सकता है। यह मशीन ऑक्सीजन के साथ साथ कमरे में मौजूद हवा को भी खींचती है। दोनों ही गैस का मिश्रण तैयार होने के साथ ही मशीन में मौजूद पानी से मरीज को श्वसन गर्म गैस गर्म उपलब्ध कराता है।
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मौत की आशंका होती है कम
लोकनायक अस्पताल के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों में अब तक के इस्तेमाल से बेहतर परिणाम मिले हैं। इस तकनीक के जरिए मौत की आशंका को कम किया जा सकता है। इसीलिए चिकित्सीय अध्ययन शुरू किया जा रहा है। परिणाम संतोषजनक मिलने पर इसे कोविड उपचार में शामिल किया जा सकता है। एक तरह से देखें तो यह वेंटिलेटर के वैकल्पिक तौर पर जाना जा सकता है।
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डॉक्टरों के अनुसार अप्रैल से सिंतबर माह के बीच अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीजों को एचएनएफसी तकनीक के जरिए ऑक्सीजन देने से काफी फायदा मिला है। इसे अब तक कोविड संक्रमण के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था। हालांकि यह तकनीक उन्हीं मरीजों को दी जाएगी जिनमें हाइपोक्सिक श्वसन विफलताएं देखने को मिल रही हों। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें मरीज की कोशिकाएं ऑक्सीजन का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। ऐसे में मरीज को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन देना होता है।
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कमरे की हवा भी खींचती है मशीनडॉक्टरों के अनुसार एचएनएफसी एक मोबाइल मशीन है जिसे बेड के आसपास कहीं भी ले जाया जा सकता है। इससे निकलने वाले पाइप को मरीज की नाक पर लगे कैनुला से जोड़ा जाता है। नाक पर कैनुला लगने की वजह से मरीज सामान्य की तरह मुंह से खाना ले सकता है। यह मशीन ऑक्सीजन के साथ साथ कमरे में मौजूद हवा को भी खींचती है। दोनों ही गैस का मिश्रण तैयार होने के साथ ही मशीन में मौजूद पानी से मरीज को श्वसन गर्म गैस गर्म उपलब्ध कराता है।
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मौत की आशंका होती है कम
लोकनायक अस्पताल के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों में अब तक के इस्तेमाल से बेहतर परिणाम मिले हैं। इस तकनीक के जरिए मौत की आशंका को कम किया जा सकता है। इसीलिए चिकित्सीय अध्ययन शुरू किया जा रहा है। परिणाम संतोषजनक मिलने पर इसे कोविड उपचार में शामिल किया जा सकता है। एक तरह से देखें तो यह वेंटिलेटर के वैकल्पिक तौर पर जाना जा सकता है।