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सुनपेड़: राजनीति चमकाने सक्रिय हुए छुटभैये नेता

Fri, 23 Oct 2015 04:25 PM IST
Updated Fri, 23 Oct 2015 04:25 PM IST
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Behind sunped issue small leaders and organisations trying to shine their politics

सुनपेड़ मामला मीडिया में उछलने के बाद देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से छुटभैये नेता और संगठन के लोग आने लगे हैं। ऐसे लोग पीड़ित परिवार की मदद करने की बजाय एक पक्ष के खिलाफ आग उगलने का काम कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को गांव में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

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दोपहर में मुख्यमंत्री के जाने के बाद छुटभैये नेता और संगठन के लोग सक्रिय हो गए। कोई हिसार से आया है तो कोई अंबाला, रोहतक, महेंद्रगढ़ तो कोई यूपी से। खुद को दलितों का सबसे बड़ा मसीहा बनने का दावा करने वाले ये लोग मीडिया समेत अन्य सवर्णों को गाली देने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
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गांव में पीड़ित के घर ऐसे लोगों में फोटो खिंचवाने और टीवी में आने की होड़ मची हुई है। ऐसे लोग भाषण देकर माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। हालांकि परिवार के लोग ऐसे लोगों से जातिवाद के नाम पर ने बोलने की नसीहत भी दे रहे हैं, लेकिन वे बाज नहीं आ रहे।
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पलवल और आसपास के गांवों से आए छुटभैये लोग दलित समाज को अलग से बसाने और अलग राज्य बनाने की भी मांग करने लगे हैं।

माहौल बिगाड़ रही जातिगत सियासत

Behind sunped issue small leaders and organisations trying to shine their politics

सुनपेड़ में जातिगत सियासत माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रही है। मामले में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप के कारण दलित और अन्य जातियों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। हालात कुछ इस तरह पैदा हो गए हैं कि पीड़ित परिवार के घर शोक व्यक्त करने से पहले जाति पूछी जा रही है।

बृहस्पतिवार दोपहर बाद परिवार को सांत्वना देने पहुंचे एक व्यक्ति को दलितों ने शक के आधार पर घेर लिया। हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उसे छोड़ा गया। बाहरी लोगों के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण गांव के ही लोग पीड़ित परिवार के घर शोक प्रकट करने से कन्नी काट रहे हैं।

बृहस्पतिवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। एक अधिवक्ता के भड़काऊ भाषण को सुनकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई, लेकिन अन्य लोगों के समर्थन पर भाषण जारी रहा। अंत में रायपुर कलां के सरपंच नंबरदार धर्मसिंह ने अधिवक्ता को भड़काऊ बात कहने से मना किया। इस पर दोनों में जमकर बहस हुई और बैठक खत्म हो गई।

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