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सांप्रदायिकता की आग में दिल्ली को झोंकने की पांच कोशिशें!

Tue, 11 Nov 2014 05:08 PM IST
Updated Tue, 11 Nov 2014 05:08 PM IST
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Before election delhi gone through communal tension.

पिछले साल चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी के 49 दिन के शासन के बाद से दिल्ली में लगभग एक साल से राष्ट्रपति शासन लागू है। 1993 में दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) बनने के बाद पहली बार यहां राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

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इस एक साल में दिल्ली में भले ही कुछ और न हुआ हो लेकिन पिछले एक महीने में जब से यह तय हुआ है कि अब यहां चुनाव होने ही वाले हैं शहर का सांप्रदायिक माहौल तेजी से बिगड़ा है।
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यह बात अहम इसलिए है क्योंकि कुछ ऐसी ही स्थिती उत्तर प्रदेश में आम चुनावों के ठीक पहले बनाने की कोशिश की गई थी। पिछले एक महीने में दिल्ली में पांच ऐसी वारदातें हुई हैं जिनमें दो समुदाओं को भड़काने और उन्हें आपस में भिड़ाने की पूरी कोशिश की गई है।
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सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के पांच मामले

Before election delhi gone through communal tension.

इसकी शुरुआत 23 अक्टूबर की रात से हुई। पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में एक मस्जिद से चंद कदमों की दूरी पर माता की चौकी पर गंदगी फैलाने पर मामला इतना बिगड़ा कि पुलिस को कर्फ्यु लगाना पड़ा।

तनाव फैलने के तुरंत बाद ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया। त्रिलोकपुरी से आप विधायक राजू धींगन ने इस पूरे प्रकरण के लिए भाजप को जिम्मेदार ठहराया। जबकि भाजपा ने पूर्व विधायक सुनिल कुमार को इस तनाव के लिए जिम्मेदार बताया। हालांकि पुलिस अभी भी दोषियों को तलाश रही है।

त्रिलोकपुरी में तनाव के दस दिन बाद ही बवाना में भी इसी तरह का तनाव पैदा हो जाता है। उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जाट बाहुल्य इलाके में 51 हिंदु परिवार महापंचायत करते हैं और फैसला लिया जाता है कि मुहर्रम का जुलूस उनके इलाके से निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मुहर्रम के जुलूस पर आमने-सामने आए लोग

Before election delhi gone through communal tension.

इतना ही नहीं यहां के स्‍थानीय विधायक गगन सिंह ने भी लोगों का साथ दिया और दूसरे समुदाय पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने घर में जो चाहें करें लेकिन उन्हें दूसरों को परेशान करने का कोई ‌अधिकार नहीं है।

हालांकि इससे पहले कि माहौल बिगड़ता इलाके के मुसलमानों ने तय किया कि वह मुहर्रम के जुलूस का रास्‍ता बदल देंगे। पांच दिन ही बाद दिल्ली के ओखला में मदनपुर खादर इलाके की एक मस्जिद के बाहर विवादास्पद सामग्री फेंक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।

हालांकि यहां पर पुलिस ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और मामला बिगड़ने से पहले ही उसे संभाल लिया। इस इलाके के आप नेता इरफान उल्ला ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि यह सब वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। इलाके के विधायक और कांग्रेस नेता आसिफ मोहम्मद का कहना है कि बीजेपी हर चुनाव के पहले गुज्जर और दलित वोटों के ध्रुवीकरण के लिए ऐसा करती रही है।

मस्जिद को बनाया गया निशाना

Before election delhi gone through communal tension.

इससे पहले कि त्रिलोकपुरी, बवाना और त्रिलोकपुरी का मामला शांत होत 11 अक्टूबर को करबला इलाके में भी तनाव फैल गया। बीके कॉलोनी में रहने वाले एक समुदाय विशेष के लोगों ने करबला क्षेत्र में सफाई के दौरान उनकी आस्‍था से जुड़े एक पेड़ को काटने का आरोप लगाया। देखते ही देखते मामला गंभीर हो गया और दोनों की समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए।

हालांकि इससे पहले कि बात बिगड़ती पुलिस ने मामले को संभाल लिया। इन सबके बीच दिल्ली के बाबरपुर इलाके में रविवार को हिंदू आस्‍था से जुड़े एक जानवर का मांस सड़क पर फेंका गया जिसके बाद वहां भी तनाव की स्थिती पैदा हो गई।

त्रिलोकपुरी और ओखला में माता की चौकी से लेकर बवाना और बाबरपुर में जानवर के मांस की वजह से तनाव पैदा करने की कोशिश की गई। दिल्ली में अभी न तो चुनाव की घोषणा हुई है और न ही चुनाव प्रचार ही शुरु हुआ है लेकिन उससे पहले ही वोटों के ध्रवीकरण की कोशिशें शायद शुरु हो चुकी हैं।

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