AAP की लड़ाई से धीमी हुई सरकार की रफ्तार
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दिल्ली में विकास की रफ्तार राष्ट्रपति शासन में धीमी रही, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी रफ्तार नहीं बढ़ी है। पार्टी के अंदर की लड़ाई में विकास योजनाएं पिछड़ गईं।
आपसी रार के कारण कामकाज में तेजी नहीं आ रही है। कैबिनेट की बैठकें फटाफट हो रही हैं न ही पांच हजार करोड़ के राजस्व घाटे को पूरा करने का कोई बड़ा रोड मैप सामने आया है।
आप के अपने ही रायता फैला रहे हैं तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री गोपाल राय उसे समेटने में शक्ति लगा रहे हैं।
ये यहां लगे हैं तो दिल्ली में कैसे होगा काम
दिल्ली डायलॉग कमीशन के उपाध्यक्ष आशीष खेतान के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है तो विधायक सौरभ भारद्वाज पार्टी प्रवक्ता हैं।
योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण को नेशनल काउंसिल से बाहर निकलवाने में जल बोर्ड के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा अगुवाई कर रहे थे।
इन्होंने ही पार्टी के दोनों संस्थापक सदस्यों को बाहर निकालने का प्रस्ताव लाने के लिए संयोजक अरविंद केजरीवाल को 58 विधायकों के हस्ताक्षर करवाकर एक पत्र सौंपा था।
बाकी विधायक भी पार्टी की गतिविधियों को अधिक महत्व दे रहे हैं। दिल्ली सरकार को कुर्सी संभाले 43 दिन हो गए हैं। बिजली-पानी सब्सिडी और कुछ अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने के फैसले को छोड़कर विकास के किसी प्रोजेक्ट पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।