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लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर : दीवार के ‘इस पार विरोध’ तो ‘उस पार समर्थन’
Wed, 15 Jan 2020 01:43 AM IST
Abhishek Singh
शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली
Published by: Abhishek Singh
Updated Wed, 15 Jan 2020 01:43 AM IST
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प्रदर्शनकारी
- फोटो : Amar Ujala
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लोकतंत्र की इससे खूबसूरत तस्वीर क्या होगी कि पूर्वी दिल्ली के खुरेजी इलाके में एक ही जगह पर सीएए और एनआरसी का विरोध व समर्थन दोनों हो रहे हैं। दोनों के बीच का फासला बस एक दीवार भर का है। दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी बातें रखकर जनमत जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
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खुरेजी में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में आसपास की सैकड़ों महिलाओं ने सोमवार से मोर्चा खोल दिया है। वे धरने-प्रदर्शन पर बैठ गई हैं। खुरेजी पेट्रोल पंप के ठीक बराबर में खाली पड़े एक बड़े प्लॉट को धरनास्थल बनाया गया है। कड़कड़ाती ठंड में वे पूरी रात धरनास्थल पर बैठी रहीं। मंगलवार को जामिया, जेएनयू, डीयू व अन्य संस्थानों के कुछ छात्र इन्हें समर्थन देने पहुंचे।
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महिलाओं ने कहा कि सीएए संविधान के खिलाफ है। इसे वापस लेेने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। सोमवार रात योगेंद्र यादव समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता वहां पहुंचे। योगेंद्र यादव ने तो इसे दूसरे शाहीन बाग की संज्ञा दी। अपने दो साल के बच्चे के साथ बैठी सलमा ने कहा कि वह हर हाल में शांतिपूर्वक प्रदर्शन जारी रखेंगी।
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इसी प्रदर्शनस्थल के ठीक बराबर में विवेकानंद योगाश्रम में कुछ लोग सीएए के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। विवेकानंद योगाश्रम के आचार्य डॉ. विक्रमादित्य ने बताया कि सीएए के समर्थन में रविवार को एक समर्थन यात्रा निकाली गई थी। इसमें इलाके के लोगों ने हिस्सा लिया। आचार्य ने कहा कि सीएए के समर्थन और देश हित के लिए इस यात्रा का आयोजन किया गया था। आसपास के कुछ लोग सीएए के समर्थन में यहां बैठे हैं।
कुछ पार्टियां अपनी राजनीति चमकाने के लिए आम लोगों को भ्रमित कर रही हैं। सीएए नागरिकता देने का कानून है, न कि लेने का। अगर देश से लोगों को निकालने की बारी आएगी तो सबसे पहले वे देश छोड़कर जाएंगे। दूसरी ओर, कोई शरारती तत्व वहां गड़बड़ी न फैला दे, इस आशंका से यहां खुरेजी की लोकल पुलिस के अलावा अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती कर दी गई है।