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सावधान! गोरा होने की चाहत चेहरे पर उगा सकती है बाल

Sun, 08 Apr 2018 07:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 08 Apr 2018 07:51 PM IST
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Be careful! fairness cream may grow hair on the face

गोरा होने की चाहत में तरह-तरह की क्रीम लगाने से काफी परेशानी होती है। ये शायद ही किसी को पता होगा कि इसके कारण चेहरे पर बाल भी उग सकते हैं। राजधानी के त्वचारोग विशेषज्ञों ने एकजुट होकर बाजार में बढ़ रही स्टेरॉयड युक्त फेयरनेस क्रीम के खिलाफ एक मुहिम छेड़ी है। 

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इस दौरान इंडियन असोसिएशन ऑफ डर्माटोलॉजिस्ट्स, वेनेरेयोलॉजिस्ट्स और लेप्रोलॉजिस्ट्स (आईएडीवीएल) के संयुक्त महासचिव डॉ. रोहित बत्रा का कहना है कि हर कोई गोरा होना चाहता है। कई क्रीमों का इस्तेमाल करता है लेकिन यह क्रीम उसके लिए काफी खतरनाक और दर्दनाक साबित हो सकती है।
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इनमें बीटामेथासोन, मोमेटाजोन और क्लोबिटासोल जैसे स्टेरॉयड मिले होते हैं जिसे इस्तेमाल करने से युवतियों की त्वचा पर बाल भी उग सकते हैं। एसोसिएशन के अनुसार बिना डॉक्टरों की सलाह लिए किसी भी दवा विक्रेता से संक्रमण (दाद-खुजली) के लिए ली गई क्रीम इस्तेमाल करने से त्वचा रोग हॉर्ट और किडनी की बीमारी तक हो सकती है। 
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हर दिन आते हैं नए केस

Be careful! fairness cream may grow hair on the face

बत्रा अस्पताल के त्वचारोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम भस्ने बताती हैं कि उनके पास हर दिन इस तरह के केस आते हैं। इनमें ज्यादात्तर युवतियां होती हैं। लेकिन कई युवक भी इस तरह की क्रीम के शिकार होते हैं। मुंह पर दाने, खाज, दाद इत्यादि के लिए ये लोग दवा दुकान से क्रीम खरीदकर इस्तेमाल करते हैं और उसका दुष्प्रभाव इन्हें ज्यादा भारी पड़ता है।

कई बार ऐसे केस आते हैं जब घर में किसी एक व्यक्ति को फंगस होता है और देखते-देखते अन्य सदस्यों को भी होने लगता है क्योंकि वह एक-दूसरे के तौलिए, कपड़े और क्रीमें शेयर करते हैं। 

सरकार जल्द कर सकती है नियम लागू
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रमेश भट्ट ने बताया कि बीते दिनों देश भर के त्वचारोग विशेषज्ञों की ओर से केंद्र सरकार से स्टेरॉयड युक्त क्रीमों को शिड्यूल एच1 की श्रेणी में लाने की मांग की है। ताकि दवा दुकान पर इसे बगैर पर्ची के न बेचा जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दिशा में सरकार ने काम करना भी शुरू कर दिया है। वहीं डॉ. मुकेश गिरधर ने बताया कि महाराष्ट्र हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। 

सरकारी अस्पतालों में भी बढ़ी है ओपीडी 
दिल्ली सरकार के जीटीबी अस्पताल की डॉ. दीपिका पांदी के अनुसार सरकारी अस्पतालों में भी इस तरह के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। उन्होंने लोगों को साफ्ट साबुन इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में त्वचा रोग से जूझ रहे लोगों की संख्या कई बढ़ गई है। पहले ओपीडी में केवल 10 प्रतिशत त्वचा रोग के मरीज आते थे लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत हो गई है। 

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