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बीबीसी डॉक्युमेंट्री मामला : 10 हजार करोड़ के हर्जाने की याचिका वापस
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याचिकाकर्ता को नई याचिका दायर करने की मिली छूट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) की विवादास्पद डॉक्युमेंट्री इंडिया: द मोदी क्वेश्चन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक बड़ी जनहित याचिका सोमवार को वापस ले ली गई। इस याचिका में बीबीसी से 10 हजार करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा गया था, जिसमें आरोप लगाया था कि इस डॉक्युमेंट्री ने देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय न्यायपालिका के खिलाफ झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को आवेदन वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा, याचिका को वापस लेने के अनुरोध के साथ यथास्थिति में खारिज किया जाता है और याचिकाकर्ता को नई याचिका दायर करने की छूट दी जाती है। गुजरात स्थित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) जस्टिस ऑन ट्रायल की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनके पास निर्धन व्यक्ति आवेदन (आईपीए) और मूल याचिका को इस शर्त के साथ वापस लेने के निर्देश हैं कि वे उसी आधार पर भविष्य में नई याचिका दायर कर सकेंगे। हालांकि, याचिका वापसी के पीछे के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हुआ है। बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री ने पिछले साल काफी विवाद पैदा किया था, जिसमें 2002 के गुजरात दंगों को दिखाया गया था। भारत सरकार ने इसे भारत विरोधी प्रोपेगैंडा बताते हुए देश में इसके प्रसारण पर रोक लगा दी थी और सोशल मीडिया पर भी इसके शेयर करने पर पाबंदी लगा दी गई थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) की विवादास्पद डॉक्युमेंट्री इंडिया: द मोदी क्वेश्चन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक बड़ी जनहित याचिका सोमवार को वापस ले ली गई। इस याचिका में बीबीसी से 10 हजार करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा गया था, जिसमें आरोप लगाया था कि इस डॉक्युमेंट्री ने देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय न्यायपालिका के खिलाफ झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को आवेदन वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा, याचिका को वापस लेने के अनुरोध के साथ यथास्थिति में खारिज किया जाता है और याचिकाकर्ता को नई याचिका दायर करने की छूट दी जाती है। गुजरात स्थित गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) जस्टिस ऑन ट्रायल की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनके पास निर्धन व्यक्ति आवेदन (आईपीए) और मूल याचिका को इस शर्त के साथ वापस लेने के निर्देश हैं कि वे उसी आधार पर भविष्य में नई याचिका दायर कर सकेंगे। हालांकि, याचिका वापसी के पीछे के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हुआ है। बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री ने पिछले साल काफी विवाद पैदा किया था, जिसमें 2002 के गुजरात दंगों को दिखाया गया था। भारत सरकार ने इसे भारत विरोधी प्रोपेगैंडा बताते हुए देश में इसके प्रसारण पर रोक लगा दी थी और सोशल मीडिया पर भी इसके शेयर करने पर पाबंदी लगा दी गई थी।